@smartySikandar भारत में इस्लाम का अपना इतिहास ही 900 साल का है लेकिन उन्होने कई हजार साल के भारत पर दावा करके पाकिस्तान और बांग्लादेश ले लिए।
यहाँ तो बात केवल एक मस्जिद की है और सरकार उस धरती की स्वामी भी है।
@WasimAkramTyagi@IlhanMN ये वो ही है ना जिसने अमेरिकन नागरिकता के लिए अपने सगे भाई से शादी की है ? और ये स्वयं जान बचाने के लिए अपने देश से दूसरे देश में जाकर शरण ली है ।
बताओ, अब ऐसे लोग भी ज्ञान बांटेगे !
@ssrajputINC ईसाई और पारसियों में कब से गोत्र व्यवस्था चलने लगी ?
पता नही कुछ लोगों को ईसाई या पारसी होना इतना अपमानजनक क्यों लगता है कि वो बताने से ऐसे शर्माते है जैसे गुप्त रोग बताने में शर्माते है !
समस्या ये है विधर्मी हिन्दू धर्म तो अपना सकते है लेकिन गोत्र नही अपना सकते।
@Voiceofpavan जिस तरह अम्बेडकर वादी,वामपंथी-लिबरल हर किसी को शुद्र घोषित कर रहे है।लगता है कि अब हिन्दू धर्म में केवल शुद्र वर्ण ही रह जाएगा।
इतिहास पढ़ो।भारत में मुसलमान आने तक हर समय देश के किसी ना किसी क्षेत्र में यादवों का शासन रहा है।
1857 विद्रोह में लडने वाले रेवाडी के राजा अहीर ही थे।
@Rationalbahujan इन विदेशी यात्रियो ने लिखा कि समाज के एक वर्ग को अछूत मानकर गांव से बाहर रखा जाता था।
तब ये शोषण कौन करता था? बौद्ध समाज के लोग!
1)7वी सदी से पहले ब्राह्मण-क्षत्रिय लोग क्या करते थे?
2)आज जो शुद्र जातियाँ है वो कहाँ से आई?क्या वो बचे हुए बौद्ध है जिन्होने सनातन धर्म अपना लिया था
@dromsudhaa वाह! क्या चालाकी से SC ST को क्रीमी लेयर से बाहर रखने की वकालत कर दी कि संवैधानिक व्यवस्था नही है। OBC में भी क्रीमी लेयर बाद में जोडी गई है।
वैसे संविधान ने तो SC ST आरक्षण केवल 10 साल के लिए ही दिया था। जब उसमें परिवर्तन हो सकता है तो उनके लिए क्रीमी लेयर में क्यो नही ?
@RanaAyyub जैसे कुछ मुसलमान देशभक्त हो सकते है। वैसे ही कुछ हिन्दू देशद्रोही भी हो सकते है।
अपवाद हर जगह मिल सकते है।
और कभी-कभार हिन्दुओ का नाम ऐसे कामों में आ जाए तो जिहादी ऐसे खुशी से पागल हो जाते है कि बस यहीं जन्नत मिल गई।
@WaqarHasan1231 जब भारत पर मुसलमानों ने 1192 के युद्ध के बाद कब्जा किया तो 1034 में मस्जिद कैसे बन गई ?
मान भी ले कि कोई मुसलमान हमलावर 1192 से पहले यहाँ तक पहुँच गया था। तो उससे पहले यहाँ कोई मुसलमान था ही नही तो मस्जिद बनाई किसके लिए ?
आजकल मुसलमान बिना इतिहास पढे लंबी-लंबी फैकने लगे है ?
@KraantiKumar विचार तो अच्छा है लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है।
भाजपा और वामपंथी दलो को छोड़कर बाकि सब दल एक व्यक्ति या परिवार के अधीन कार्य कर रहे है।ऐसे मे सारी पार्टी एक परिवार की निजी संपत्ति हो जाएगी।
त्रिशंकु जनमत की स्थिति में परिवार का स्वार्थ चलेगा और जनप्रतिनिधि बंधुआ मजदूर बन जाएगे।
@Ramesh18498367 अब यदि इस झूठी पोस्ट पर FIR हो जाए तो ये मत कहना कि लोकतंत्र और बोलने की स्वतंत्रता खतरे में है।
एक-दो पुलिस केस लग गए तो ये मनोरंजन, जी का जंजाल बन जाएगा।
@savedemocracyI जब तमिलनाडु में TVK के विरूद्ध लड़े और फिर उसके साथ सरकार बना ली। ये भी जनमत को धोखा है।
पूरी पार्टी दल-बदल करे तो ठीक। वरना गलत कैसे ?