संकट मोचन में जगह-जगह भक्त हनुमान की मौजूदगी है। कलाकृति रूप में वह जहां कहीं भी हैं उनकी दृष्टि दीनानाथ प्रभु श्रीराम की ओर ही है। साहित्य-कला मंच पर विराजमान की गई कृति को ही देखिए। इस मंच से रुद्रावतार न सिर्फ श्रीराम दरबार के शिखर की ओर निहार रहे हैं।
नीर विहीन होती सदानीरा...मां गंगा को सदानीरा कहा जाता है।अर्थात् जिसमें जल की कभी कमी न हो लेकिन कलियुग का यथार्थ बिल्कुल अलग है। काशी में उल्टी प्रवाहित होने वाली मां गंगा विश्वसुंदरी पुल से सामनेघाट पुल के बीच पश्चिमी छोर पर गंगा में मध्य धारा तक सिर्फ रेत ही रेत नजर आ रही है।
यह भी साक्षी : संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा में गुरुवार की रात चंद्रदेव भी दिखे। श्रोताओं की दीर्घा से दूर चंद्रमा मंदिर के शिखर के पास से संगीत की दैवीय प्रस्तुतियों का साक्षी बने रहे। मान्यता है कि स्वयं हनुमान लला भी स्वयं सारी रात जागकर संगीत समारोह का आनंद लेते हैं।
लौटी रंगत...यह है काशी का पौराणिक दुर्गा कुंड आप के अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की पहल के बाद अब न सिर्फ कुंड का जल शुद्ध हो चुका है बल्कि शाम ढलने के बाद इसका अनूठा सौंदर्य भी सभी को आकर्षित करता है।
फोटो : अमन मंसूर आलम
#hindustan#varanasi
हे मइया बड़ी कठिन डगरिया...
काशी में विवाह की अंतिम रस्म गंगा पुजइया होती है। पियरी की गांठ बांधे यह वर-वधु सोमवार को गोदौलिया चौराहे के आसपास कुछ इस तरह तलाशते रहे गंगा पुजइया के लिए जाने का रास्ता ☺️
#Kashi#MahaKumbh2025
PC : @amanalam40
काशी के अविरल गंगा पर ग्रहण बन रहे कुछ लोग जहां गंगा का निर्मलता दिख रही वही ये कपड़े धो रहे। मेरे द्वारा खींची फोटो में आप सभी साफ देख सकते है कि गंगा जल के तह पर साफ घाट का पटिया दिख रहा है और ये यही कुकर्म कर रहे।
फोटो :- अमन मंसूर आलम
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#बोले#काशी
ड्रम की नाव से पार करते हैं जिंदगी का भंवर
विकास के नए प्रतिमान रचने वाले शहर के एक कोने में सीवर भरे तालाब ने कुछ सौ परिवारों का रुआब छीन लिया है।स्थानीय संवाददाता नरेंद्र शर्मा भईया के सहयोग से बोले काशी आशुतोष पांडेय सर कलम और अमन मंसूर आलम की फोटो कंटेंट प्रस्तुति