I just spent some time with this visitor to Bengaluru. That his spine is straighter than mine may not be entirely due to the difference in age.
@kunalkamra88
दिल्ली विश्वविद्यालय का पतन: आरएसएस की 'निगरानी' !
लेकिन क्या कीमत चुकानी पड़ेगी?
आरएसएस को धन्यवाद, जिसकी कड़ी निगरानी में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की सभी नियुक्तियां हो रही हैं। उम्मीदवार संघ के मापदंडों पर फिट हैं, भले ही फैकल्टी के रूप में पूरी तरह अयोग्य साबित हो रहे हों। परिणाम? खाली पड़ी हजारों सीटें, गलत विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक, और एक ऐसा ब्लोटेड सिलेबस जो छात्रों को डुबो रहा है।
क्या डीयू अब वाकई 'इन डिमांड' नहीं रहा?
हालिया रिपोर्ट्स से स���फ है कि डीयू का गौरवमय दौर खत्म हो चुका है। पहले जहां एडमिशन में 30% ओवर-सब्सक्रिप्शन होता था, अब सेमेस्टर के आधे होने पर भी 'मॉप-अप राउंड्स' च���ा रहे हैं।
हिंदी प्रोफेसर राजीव कुनवार जैसे शिक्षक बता रहे हैं कि क्लासरूम में 40 छात्रों की बजाय सिर्फ 4 आते हैं – बाकी 'गायब' हो चुके! महिला नामांकन 2021 के 61% से गिरकर 54% पर सिमट गया, खासकर परिधीय कॉलेजों में। छात्र CUET की जटिलताओं, कोचिंग की महंगाई और देरी से तंग आकर प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (जैसे शिव नादर, अशोका) की ओर रुख कर रहे हैं, जहां अनुशासन और बेहतर एक्सपोजर मिलता है। एक बीएससी छात्र ने कहा, "डी���ू में क्लास कैंसलेशन और राजनीति से तंग आकर गुरुग्राम के SGT यूनिवर्सिटी चला गया।"
फैकल्टी भर्ती का हाल तो और भी खराब है। UGC के नए SOP के तहत वीसी द्वारा नियुक्त बाहरी सदस्यों की मौजूदगी से कॉलेजों की स्वायत्तता खतरे में है। हिंद�� कॉलेज के शिक्षक चेतावनी दे रहे हैं: "अगर आप वर्तमान सत्ता से जुड़े हैं, तो डीयू में पढ़ाने का टिकट मिल जाता है।"
योग्यता की जगह विचारधारा हावी – गैर-डोमेन एक्सपर्ट कोर्स पढ़ा रहे हैं, जैसे ज्यूरिस्प्रूडेंस में "AIDS असली बीमारी नहीं" जैसी बकवास। RSS-संबद्ध प्रोफेसर भी मानते हैं, "हमारे पास अब अयोग्य शिक्षकों का ढेर लग गया है।" 2022-23 की भर्ती में लंबे समय से अस्थायी शिक्षकों को हटाया गया, जिससे असुर���्षा बढ़ी और हाल ही में सितंबर 2025 में RSS-समर्थित NDTF ने DUTA चुनाव भी जीत लिया, तीसरी बार लगातार – यह 'भगवाकरण ' का साफ संकेत है।
NEP 2020 के तहत FYUP ने सिलेबस को 'मल्टीडिसिप्लिनरी' बनाने के नाम पर बर्बाद कर दिया। ऑनर्स कोर्स के कोर सब्जेक्ट्स (जैसे इकोनॉमिक्स में इन्फ्लेशन) हटा दिए गए, जबकि अनावश्यक AEC, SEC, VAC कोर्स थोपे गए – जैसे 'डिजिटल एम्पावरमेंट' में Gmail साफ करना या 'स्वच्छ भारत' में झाड़ू बांटना बिना पॉलिसी डिस्कशन के। छात्रों का बोझ 5-8 घंटे क्लास रोज, लेकिन गहराई शून्य। इकोनॉमिक्स स्टूडेंट कृष ने शिकायत की, "कोर सब्जेक्ट्स को बाएं-दाएं काटा जा रहा है।" गणित के 52 फैकल्टी ने विरोध किया, लेकिन व्याख्यान 5 से घटकर 3 रह गए। आलोचना के बिना अर्थशास्त्र पढ़ाना, हिंदी साहित्य में गहराई न देना – सब कुछ सेंसर हो रहा, जैसे इजरायल-फिलिस्तीन या कश्मीर पर क्लास। केवल 30% छात्र चौथे साल तक पहुंचे!
क्या यह आरएसएस की 'रिक्लेमिंग' का हिस्सा है, जहां लेफ्ट बस्तियन को राइट-विंग में बदलने के चक्कर में क्वालिटी कुर्बान हो रही है ?
��ाय-कुंभ जैसे इवेंट्स पर फोकस, लेकिन लैंड राइट्स या ब्राह्मण वेलफेयर पर सेंसरशिप? क्या यह दलित-आदिवासी छात्रों को और अलग-थलग करेगा, जहां CUET जैसी बैरियर्स पहले ही गरीबों को बाहर कर रही हैं? डीयू का भविष्य क्या – एक विचारधारा का प्रचार केंद्र या शिक्षा का मंदिर?
समय है जागने का। छात्र, शिक्षक, अभिभावक – NEP की समीक्षा, पारदर्शी भर्ती और सिलेबस सुधार की मांग करें। डीयू को बचाना है, तो आवाज उठाएं!
#SaveDU #EndRSSInfluence #EducationForAll
यदि वास्तव में पुलिस ने ताला लगा दिया है तो पुलिस का ऐसा कृत्य बेहद अन्यायपूर्ण और शर्मनाक है। इसके बजाय पुलिस को कट्टरपंथियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ।
यूपी –
मेरठ में अनु��व कालरा ने अपना मकान बेचने के लिए 3 महीने इंतजार किया, लेकिन कोई हिंदू नहीं आया। आखिरकार शाहिद कुरैशी ने 1 करोड़ रुपए में ये मकान खरीद लिया। अब हिंदू संगठन खिलाफत में खड़े हो गए हैं। पुलिस से कहकर मकान पर ताला लगवा दिया है।
हिंदू संगठनों ने आज थाने पर हनुमान चालीसा पढ़ी। वे चाहते हैं कि शाहिद कुरैशी से मकान खाली करवाया जाए। वहीं, शाहिद कहते हैं कि कोई 1 करोड़ रुपए दे और मकान खरीद ले।
# ये हैं स्टैनफोर्ड के पूर्व छात्र हमारे 'महाराज'
अपने हालिया अमेरिका प्रवास में हम 'स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी' भी गए थे। तब हमें इस विश्वविद्याल में पढ़े एक पूर्व छात्र की याद आई थी।
ये पूर्व छात्र हैं हमारे ग्वालियर के 'महाराज' ज्योतिरादित्य सिंधिया।
उन्होंने स्टैनफोर्ड से एमबीए की पढ़ाई की है। इस सुयोग्य पूर्व छात्र को आप वीडियो में देख रहे हैं। वे एक बाबा ��ी आरती उतार रहे हैं।
बाबा को भी आप खूब जानते पहचानते हैं। बाबा इन दिनों तंत्र-मंत्र, झाड़ -फूंक, भूत-प्रेत, अंधविश्वास-पोंगापंथ के ध्वजवाहक है।
बाबा आज कल 'हिंदू राष्ट्र' की स्थापना का अभियान भी चला रहे हैं
सिंधिया जिस ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति के तीर्थ स्टैनफोर्ड में पढ़े हैं उसने दुनिया को एक से एक महान प्रतिभाएं दी हैं।
करीब एक सौ चालीस साल पहले (सन1891) स्थापित स्टैनफोर्ड के पूर्व और व��्तमान फैकल्टी में 58 नोबल पुरस्कार विजेता हैं। इनमें भारतीय वैज्ञानिक हर गोविंद खुराना भी शामिल हैं।
पुलित्जर पुरस्कार सहित दुनिया के अनगिनत सर्वोच्च सम्मान और पुरस्कार पाने वालों में स्टैनफोर्ड के छात्रों की अंतहीन सूची है।
अमेरिका के राष्ट्रपति रहे हरबर्ट हूवर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापान के प्रधानमंत्री युकियो हातोयामा , इजरायल के प्रधानमंत्री ईहुद बराक भी इस विश्वविद्यालय में पढ़े हैं।
आप जिस इंटरनेट पर यह पोस्ट पढ़ रहे हैं उस इंटरनेट के जनक विंटन सेर्फ भी स्टैनफोर्ड से ही ग्रेजुएट हैं। (बॉब काह्न उनके सह संस्थापक थे।)
स्टैनफोर्ड के पूर्व छात्रों ने दुनिया में जिन बड़ी बड़ी कंपनियों की स्थापना की है उनमें ह्यूलेट-पैकर्ड, {विलियम ह्यूलेट और डेविड पैकर्ड}, सिस्को सिस्टम {संड्रा लेरनर और लियोनार्ड बोसाक}, NVIDIA, SGI, VMware, MIPS टेक्नोलॉजी, याहू {ची -युआन यांग और डेविड फिल्लो} , गूगल {सेर्गेई ब्रिन और लॉरेंस पेज} जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इतना जानने के बाद सोच कर देखिए कि अपने एक पूर्व छात्र को इस रूप में देख कर 'स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय' की दीवारें क्या महसूस कर रहीं होंगी?
खेद है 'महाराज',
आपको इस हाल में देखना हमें अच्छा नहीं लगा।🫤😕