जो लोग सरकार पर सवाल कर रहे हैं की सोनम वांगचुक को कैसे उठाया गया है जबकि ये सब कोर्ट के ऑर्डर के बाद किया गया है
वो कॉक्रोच देखे
साल 2011, दिल्ली के 'रामलीला मैदान' में 'बाबा रामदेव' काँग्रेस सरकार के खिलाफ 'काल��� धन' को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे
सभी आंदोलनकारी रात को आराम से सो रहे थे
तभी 'सोनिया गाँधी सरकार' ने 5 हज़ार पुलिस वालों को भेजकर सोते लोगों पर लाठीचार्ज करवा दिया था।
पूर्व MHA अंडर सेक्रेटरी R.V.S. मणि का बड़ा खुलासा।
26/11 हमला कांग्रेस और ISI के बीच एक फिक्स्ड मैच था।
अगर अजमल कसाब ज़िंदा नहीं पकड़ा जाता, तो 26/11 को ‘हिंदू आतंक’ करार दिया जाता।
इशरत जहाँ मामले में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को निशाना बनाने की कोशिश हुई।
थी तब वह तुम्हारे पास गया और तुमने हिंदू युवा वाहिनी को भेज कर कब्रिस्तान से उसकी जमीन बचाई थी 😭
तुम्हारे मंच से दिए भाषण में इसका खुलासा करने से यह बात दूर-दूर तक चली गई है अब यादवों को मैं कैसे संतुष्ट करूं कि हमार राज में तुम्हारी सुनवाई नहीं होगी तो और किसकी होगी 😭
तुमने मंच से भाषण देते हुए इस बात का खुलासा क्यों कर दिया कि पापा जी का खासम खास रहा बस्ती जिले का यादव सपा अध्यक्ष भी पापा जी के राज में ही कब्रिस्तान से अपनी जमीन नहीं बचा पा रहा था 😭
पापा जी के राज में भी यादव सपा नेता की कब्रिस्तान के खिलाफ कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही conti
सामाजिक न्याय पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं अगर 2027 में तुमने Non PDA वालों से गद्दी छीनकर किसी PDA को ना दे दी तो सामाजिक न्याय मिट्टी में मिल जाएगा
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गद्दी पर किसी भी ऐ��े गैरे PDA को बैठा दो, गद्दी पर सैफई वाला ही बैठना चाहिए।
सुनोगे तो तुम भी खुशी से झूम उठोगे, हमारी बेटी के लिए जाटव PDA लड़के का रिश्ता आया है
हम समाजवादी यादवों की किस्मत में बहुत मुश्किल से ही जाटव दामाद नसीब होते हैं, म��ंने रिश्ते को हां कर दी है
तुम जाकर निमंत्रण पत्र छपने को दे दो मैं जाकर PDA बहादुर को यह खुशखबरी सुना कर आती हू
तो क्या कुआँ केवल ठाकुरों के पास ही था?
ये आईने अकबरी, Vol. 2 का स्क्रीनशॉट है..👇
इसमें अहिर, कुर्मी, खाती, डीमरी आदि जातियों को उस समय मिली जमींदारियों का विवरण है।
जब इन सभी जातियों के पास जमींदारियाँ थीं, तो फिर दलितों के पास जमीन न होने का ठीकरा अकेले ठाकुरों के सिर ही क्यों फोड़ा जाता है?
"ठाकुर का कुआँ" ही क्यों कहा जाता है? "अहिर का कुआँ", "कुर्मी का कुआँ" या अन्य जातियों के कुओं की बात क्यों नहीं होती?
प्रतिशत के हिसाब से भी देखें तो उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार औरंगज़ेब के समय क्षत्रियों की जमींदारियों का प्रतिशत कई OBC जातियों से कम था। फिर भी "शोषक" का टैग केवल ठाकुरों को ही क्यों दिया जाता है?
यदि ��प मानते हैं कि दलितों के साथ भेदभाव हुआ था, तो उसके लिए जिम्मेदार सभी जातियों की समान रू�� से चर्चा कीजिए। आगे आकर यह भी कहिए कि जहाँ-जहाँ भेदभाव हुआ, उसमें हमारी भी जिम्मेदारी थी।
केवल ठाकुर और ब्राह्मण ही दूसरों के पापों का बोझ अपने कंधों पर क्यों ढोएँ?
मौलाना साहब मैं तो हिंदू ज्योतिषियों से मायूस होकर ब���ुत उम्मीद के साथ आपके पास आया था लेकिन आप भी वही कह रहे हो जो उन लोगों ने कहा था
आप तो मुझे अपना कोई नजूमी तरीका बताओ जिसे करके 2027 में मैं यहां का मुख्यमंत्री बन जाऊं
हज उमरा करने तो जा नहीं सकता, बाकि आप बोलो क्या करना है
डार्लिंग हम लोगों ने घर से भाग कर कल रात PDA शादी तो कर ली है लेकिन मैं सोचता हूं हम लोग चलकर तुम्हारे PDA बहादुर भैया से आशीर्वाद भी ले लें
PDA जाटव के घर में PDA यादव बेटियां बहू बनकर आने लगी हैं यह जानकर वह खुशी से गदगद हो जाएंगे
अखिलेश राज का वो जवाहर बाग हत्याकांड
जिसमे मथुरा को खून से नहलाया गया था
इस घटना में SP व SO समेत 29 लोगो को मौत के घाट ���तार दिया गया था !
टोंटी चोर की हिम्मत नहीं थी कोई एक्शन ले पाए
सपा का एक ही नारा था, खाली प्लाट हमारा है !
नये पेड़ लगाने से पहले सुनो उनकी कहानी
जिन पेड़ों को लगाके कभी भी न दिया पानी
भाजपा के लिए ‘वृक्षारोपण’ दरअसल ‘भ्रष्टारोपण’ का कार्यक्रम है।
ये 35 करोड़ पेड़ लगाने का नहीं बल्कि प्रत्येक पेड़ से कम-से-कम 10 रूपये मतलब कुल मिलाकर 350 करोड़ कमाने क�� गुप्त भाजपाई योजना है।
जिन्होंने न छोड़ा प्रभु का दरबार
वो क्या छोड़ेंगे बगीचा और बाग
परनाना नेहरू जी को 1 और दादी इंदिरा जी को सिर्फ 2 देश ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया और मोदी इंडोनेशिया से भी सर्वोच्च सम्मान पाकर 35 देश क�� सर्वोच्च सम्मान पा गया, वह ज��ां भी जाता है वही देश उसको अपना सर्वोच्च सम्मान दे देता है
मेरे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ रही है,
ये नहीं देखा तो क्या देखा...
दीपक कुमार नाम का ये अखबार बांटने वाला हरियाणा के इन्द्री का है। पर ये व्यक्ति जिस तरह अखबार बांटता है वो किसी कलाकारी से कम नहीं। अचूक निशानेबाज़।
मामला बहुत तूल पड़ चुका है, मेरे खातों की भी जांच करने की मांग उठने लगी है
अब तुम हमको फोन करने की भी कोशिश मत करना और अपने आदमियों और परिवार वालों से भी कह देना कि कोई हमसे मिलने की कोशिश नहीं करेगा
चंदा चोरी में हमारे एजेंट तुम जब थे तब थे लेकिन अब मैं तुमको जानता ही नहीं।
पत्रकार महोदय महिला को भटका रहे थे, महिला ने ऐसा ज़वाब दिया हिल गये-
अखिलेश यादव के बारे में महिला ने जो कहा वह डर प्रदेश की सारी महिलाओं का है।
2027 में चुनाव में EVM को हैक करने का इरादा किया है!
अरे गजब हो गया
चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन नाम के दलित को राम मंदिर ट्रस्ट का ��ंतरिम महासचिव बना दिया गया जौ ऑल इंडिया सर्विस का रिटायर्ड अफसर है
यानी अब दलित कार्ड चल दिया गया है
वाह रे हिन्दू दानदाता
इतना ओछापन, इतना लालच
यदि किसी व्यक्ति को आज यह चिंता सता रही है कि उसने श्री राम मंदिर में जो स्वर्ण, रजत, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु दान की थी, उसका क्या हुआ, यदि वह अपने दान का ��िसाब मांग रहा है, यदि उसे अपने दान पर विश्वास से अधिक स्वामित्व का भाव है, तो श्री राम मंदिर ��्रस्ट को चाहिए कि ऐसे सभी लोगों को सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करे।
जो भी व्यक्ति यह दावा करता है कि उसने अमुक वस्तु दान की थी और अब उसे उस दान की चिंता है, उसे बुलाया जाए। उसकी पहचान और दावे का सत्यापन किया जाए, फिर यदि संभव हो तो उसकी वही वस्तु उसे वापस सौंप दी जाए। साथ ही उससे एक शपथपत्र (एफिडेविट) पर हस्ताक्षर भी करवा लिए जाएँ कि उसने अपनी दान की गई वस्तु स्वेच्छा से वापस प्राप्त कर ली है, और इस ���ूरी प्रक्रिया का एक छायाचित्र भी सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में कोई भ्रम या विवाद न रहे।
क्योंकि दान का अर्थ अधिकार सुरक्षित रखना नहीं होता। दान का अर्थ है, समर्पण। जिस वस्तु पर बार बार स्वामित्व जताना पड़े, जिसका हर समय हिसाब माँगा जाए, जो अवसर मिलने पर राजनीतिक या सामाजिक हथियार बना दी जाए, वह दान कम और अहसान अधिक प्रतीत होता है।
यह भी स��पष्ट होना चाहिए कि यदि किसी संस्था में चोरी, गबन या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी ही चाहिए और दोषियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए। लेकिन जाँच और न्याय की माँग तथा दान पर अपना अधिकार जताने की मानसिकता, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए, पर दान को लेन-देन का अनुबंध बना देना भी दान की मूल भावना के विपरीत है।
मंदिर श्रद्धा से चलते हैं, सौदेबाज़ी से नहीं। और दान तभ��� दान कहलाता है, जब उसे देने के बाद उसका मोह समाप्त हो जाए। यदि हर दान के साथ भविष्य में हिसाब मांगने और स्वामित्व जताने की शर्त जुड़ जाए, तो वह दान नहीं, एक अस्थायी जमा (डिपॉजिट) बनकर रह जाएगा।
श्री राम के चरणों में जो समर्पित किया जाए, वह श्रद्धा से किया जाए; और यदि श्रद्धा नहीं बची, तो ऐसी वस्तु का वापस चले जाना ही शायद सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा।
खैर ...
शरद सिंह जी काशी वा��े
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अखिलेश अपने ही चक्रब्यूह में फंसते जा रहे हैं?
पहले राम मंदिर चढावा चोरी का आरोप लगाया-
फिर क���ा पुलिस हमें बताये हम जाँच में सहयोग करेंगे
फिर योगी जी ने जाँच शुरू करा दी, तब अखिलेश घबराये,
कहा जाँच में पूछताछ क्यों हो रही है?
परसों टिन्नू यादव निर्दोष का ट्वीट किया?