I am just listening to HANUMAN ANSH songs on Repeat mode
So is my 4 year old daughter who doesn’t even know Hindi
The best album after Dhurandhar this year but totally different genre
The songs will make this movie have long long life in people’s memory and second part is just gonna get super opening
हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया।
क्या हमें चालीसा पढ़ते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं?
बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो।
तो लीजिए पेश है श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!!
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।
《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥
《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥
《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥
《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥
《अर्थ》→ आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।
हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥
《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥
《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।
विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥
《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥
《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥
《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।
भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥
《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया।
लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥
《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥
《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥
《अर्थ》→श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥
《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥
《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥
《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥
《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥
《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥
《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥
《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नही रहता।
आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥
《अर्थ 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥
《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥
《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥
《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।
और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥
《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥
《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥
《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥
《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।
तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥
《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।
अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34।।
《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।
और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥
《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥
《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।
जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥
《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥
《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥
《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए
पुलिस ने टीयर गैस चलाई, लाठी चलाई इसलिए दिल्ली में शांति बहाली की उम्मीद कर सकते हैं। मैंने अपनी आँखो से संसद पर हमला करने को तैयार भीड़ को देखा है, उनमें कोई छात्र और कोई युवा नहीं था।
वो सभी रेडिकल पोलिटिकल कैडर थे। उनको मुद्दे। नहीं पता थे, उन्हें बस संसद भवन का रास्ता पता था और बवाल करना पता था। जंतर मंतर पर बैठी भोली भली भीड़ और संसद भवन पर चढ़ने को बेकरार भीड़ दोनों अलग थी। जंतर मंतर की भीड़ पोस्टर थी और संसद भवन की भीड़ उसके पीछे की गंदगी।
ध्यान रहे बीस दिन तक शांतिपूर्ण आंदोलन चला और कुछ नहीं हुआ। जो भीड़ सड़क पर थी उन्हें आंदोलन और उन बीस दिनों से कोई मतलब नहीं था। वो एक दिन में न्याय लेने आई हुई भीड़ थी, और उसने वही रवैया अपनाया, हिंसक।
फ़िलहाल शांति बहाल हो यही उम्मीद है।
इनकाउंटर से पहले भरत तिवारी और पुलिस टीम के बीच हुए संवाद का वीडियो सुना। गोली लगने से पहले भरत तिवारी ने देश, समाज के प्रति जो कुछ भी बोला, ध्यान से सुनिए। इसी में हमेशा से पूछे जाने वाले प्रश्न का उत्तर है, #ब्राह्मण ही क्यों #कम्युनिस्ट बने? कम्युनिस्ट आंदोलन में दूसरी पंक्ति में #क्षत्रिय रहे। जमीनी कतार, यानी पैदल सेना #शूद्रों की रही। आज भी है।
यदि भारत के #औपनिवेशिक_विध्वंस की व्यापक समझ है? सोने की चिड़िया से भारत के #भिखारी_का_कटोरा बनने की गहन पीड़ा है तो मेरी बात भी समझ जाएंगे।
भरत तिवारी, गंगा किनारे आरा के उसी #जवनिया_गांव का था, जिस गांव के घर-द्वार, मंदिर, पीपल को उफनती मां गंगा में समाने की #रील देख कर हम #शहरी रोमांचित हो रहे थे। युट्यूबर कमाई कर रहे थे। गंगा में समाए उसी गांव को खोज रहा था युवा भरत। सरकार की ड्योढ़ी पर जाकर।
भरत तिवारी स्वप्निल आदर्श में जी रहा एक युवा था। उन लाखों, करोड़ों युवाओं की तरह, जो #सत्ता का मूल चरित्र और लोकतंत्र के कारोबारी शक्ल को नहीं पहचान पाते। नेतृत्व के अभाव में पुलिस की गोली से मारे जाते हैं।
हर दिन दसियों भरत तिवारी से मिलता हूं। आपके, हमारे आसपास ही ना जाने कितने भरत तिवारी घूम रहे हैं। हम सबकी सन्तानों में थोड़ा-बहुत भरत तिवारी है। भरत तिवारी जैसा व्यवस्था को बदलने की थोड़ी सनक। सनक ही कहेंगे ना?
सुमंत कबीर
@AmitShah@samrat4bjp
नित जीवन के संघर्षो से,
जब टूट चूका हो अंतर मन।
तब सुख के मिले समंदर का,
रह जाता कोई अर्थ नहीं।
जब फसल सूख कर जल के बिन,
तिनका तिनका बन गिर जाये।
फिर होने वाली वर्षा का,
रह जाता कोई अर्थ नहीं।
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मेरे आदरणीय,
कृपया आपसे निवेदन है…
“मार्च 2027” तक भारत की जनगणना पूरी होने जा रही है। जनगणना अधिकारी शीघ्र ही आपसे जानकारी एकत्र करने के लिए मिलेंगे।
आपसे जब आपकी मातृभाषा पूछी जाएगी और उसके बाद जब आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कौन-कौन सी भाषाएँ जानते हैं, तो कृपया “संस्कृतम्” को भी उन भाषाओं में अवश्य शामिल करें जिन्हें आप जानते हैं। यद्यपि हम सभी संस्कृतम् बोल नहीं पाते, फिर भी हम प्रतिदिन अपनी प्रार्थना, जप, श्लोक तथा सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में इसका उपयोग करते हैं।
पिछली जनगणना के अनुसार पूरे देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या मात्र हजारों में थी, जबकि अरबी और फ़ारसी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है। उन भाषाओं के विकास के लिए उन्हें वित्तीय सहायता भी मिलती है। यदि संस्कृतम् को “लुप्तप्राय” भाषा घोषित कर दिया गया, तो हमारे प्राचीन धर्मग्रंथ, वेद, पुराण आदि का प्रकाशन बंद हो सकता है। हम अपनी जड़ों से कटते जाएंगे और अंततः पूजा-अर्चना का अर्थ केवल DJ बजाने तक सीमित हो जाएगा।
देवभाषा संस्कृतम् भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि संस्कृत को “लुप्त” भाषा घोषित कर दिया गया, तो इसके विकास और विस्तार के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। संभव है कि हम संस्कृत को हमेशा के लिए खो दें।
केवल हमारी जागरूकता और प्रयास ही संस्कृत को जीवित रख सकते हैं। अभी भी देर नहीं हुई है। कृपया संस्कृत सीखने के साथ-साथ यह छोटा-सा प्रयास अवश्य करें।
यदि आपको यह उचित लगे, तो कृपया इस संदेश को अपने सभी परिचितों तक अवश्य पहुँचाएँ।
भारतीय सनातन परंपरा, संस्कृति और नवचेतना के प्रतीक हिंदू नव वर्ष, नव संवत्सर, विक्रम संवत-2083 के पावन अवसर पर प्रदेश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
यह दिवस सृष्टि के नव आरंभ, धर्म, सत्य और संस्कारों की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। हिंदू नव वर्ष हमारी काल गणना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करने वाला दिन है।
आइए, नव संकल्पों के साथ सशक्त भारत, समृद्ध भारत व विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें।
शंकराचार्य जी हिंदुओं के सर्वोच्च गुरु हैं; लेकिन अधिकांश लोग उनका नाम तक नहीं जानते। मैं हमारे पूर्वांचल की बात कर रहा।
हमारे यहाँ लोग तो भोले बाबा, विंध्याचल देवी, पाटन देवी, रामजी, कृष्ण जी, छट्टी माई, हट्टी माई, काली माई स्थान, ग्राम देवता, स्थान देवता, बरम बाबा का नाम जानते हैं।
शास्त्र; हमारे गावों के लोगों को तो शास्त्र पढ़ना तक नहीं आता था। संस्कृत तो छोड़िये, हिन्दी तक ठीक से नहीं आती थी… भोजपुरी अवधी आती है।
हम मंत्र, स्तोत्र नहीं जानते।
तुलसी बाबा की चौपाई जानते हैं क्यूँकि अवधी में है…
"भोले बाबा लाज रक्खें! विंध्याचल माई… पाटन देवी तोहर भंडार भरें" सदियों से यही हमारी प्रार्थनाएं हैं।
हमारे लोग वार-त्योहार, विवाह इत्यादि प्रसंगों के पहले राच घुमाने मंदिर जाते थे। कुछ अच्छा हो तो पूड़ी-हलुआ (कढ़ाई) चढ़ाते हैं।
हमारे एक ग्राम देवता होते हैं, एक लोक देवता होते हैं। उनके मंदिर के लिए घी का दीपक हर घर से जाता है। इतने में वो प्रसन्न हो जाते हैं।
हमारे यहाँ दादियां-नानियां प्रभात के चार बजे उठकर रामचरित मानस, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ नहीं करतीं थी
“जगदम्बा घर में दियरा बार अइनी हे, जगतारण घर में दियरा बार अइनी हे” लोकगीत गाती हैं…
हमारे गाँवों के ब्राह्मणों को विवाह हो अथवा घर का मुहूर्त; उन्हें मंत्र कम आए या ज़्यादा। हमारा फिर भी “बाबा पा लागी” कहते है। हमारे यहाँ कहते हैं - पंडित जी बस रहे काफ़ी हैं।
हमारे यहाँ जागरण में गाँव के ही गोस्वामी आते हैं। एक जन आए, तब भी चल जाता है। शेष, गाँव समाज के लोग ढोलक, मंजीरे, झांझर बजा लेते हैं। ऐसे में हो जाता है जागरण।
माता जी का जागरण तो हमारे घर की माताएं, बहनें, बहुएं कर लेती हैं। पाँच अवधि-भोजपुरी भजन गा लेती हैं, दस बार चाय पी लेती हैं, बस। हमारे यहाँ “देवी माई” हम जैसे ही हैं। हम उन्हें अपनी तरह से मनाते हैं और वो मान भी जाती हैं।
मंदिर के सामने से निकल रहे हैं, और प्रणाम में सर झुका लिया, मंगल को हनुमान जी पूजते हैं और सोम को भोले बाबा को... फिर भी हमारे लिए वो आठों याम सहायतार्थ तैयार हैं।
हमारे यहाँ हम नवरात्र में दुर्गा पूजा पंडाल देखते हैं। आनंद आ जाता है। हरेक पंडाल, देवी दुर्गा के ही अलग अलग रूप को सजाते है। मौज ही मौज। प्रसाद वितरण हुआ, माताजी को हाथ जोड़े और चल पड़े घर... हमारे ऐसा करने से हमारे माँ कभी रुष्ट नहीं हुए।
खैर, अब तो बलि देना बंद ही हो गया। पहले बकरे की बलि देते थे।
हम समझदार नहीं हैं। हम विद्वान नहीं हैं। हम शास्त्रज्ञ नहीं हैं। हम नियमित पूजापाठी नहीं हैं।
फिर भी हम हिन्दू हैं।
गौ, गंगा, गायत्री जैसे पवित्र हिन्दू। शंकराचार्य जी के बराबर हिन्दू।
Those who killed Dipu Das and Dipu Das spoke the same language, yet he was dragged, lynched, killed, hanged, and burnt solely because he was Hindu.
Radicalization in West Bengal is following a similar path under Mamata Banerjee’s leadership. Hargobindo Das and Chandan Das were killed because they were Hindu.
Yesterday, a singer was stopped from singing “Jaago Maa” simply because some people object to Maa Durga.
Now it feels as though Bengalis need permission to worship Maa Durga from a particular vote bank supported by Mamata Banerjee. During Aurangzeb’s regime, Hindus had to pay Jiziya to practice their faith. Now we have to accept the terror of Jihadis under the regime of Mamata.
THEY ARRESTED HIM FOR THIS POSTER!
The Emergency mindset is still well and alive in India.
The Congress Govt in Telangana can’t handle the truth, so they resort to authoritarianism.
When BJP Telangana put up THIS poster exposing Revanth Reddy’s 2-year failure, the government sent police, not replies.
Two years in power, six powerful hands, one failed Chief Minister.
The poster that shook the Congress:
• Real estate in Telangana taken over by CM’s family
• Weekly money collections sent to Delhi high command
• Hindu temples being demolished across the state
• Secret deal to protect KCR & stop all prosecution
• Goons & rowdies controlling public space instead of law & order
• 25% commission on every file, contract and project
Instead of defending itself democratically and offering accountability, Congress arrested the Social Media Convener of BJP Telangana.
Rahul Gandhi’s “mohabbat ki dukaan” is a farce.
He is proudly carrying forward Indira’s dictatorial baton.
आप लोग पढ़े लिखे हैं | SIR के काम में हाथ बंटा सकते हैं | इसके लिए आपकी वोटर id में मोबाइल लिंक करना जरुरी है | अगर मोबाइल लिंक है तो आसानी से दो मिनट में SIR का फॉर्म बिना किसी से मिले भार सकते हैं |
step 1. आइये देखते हैं कि मोबाइल लिंक कैसे करते हैं |
आप eci की साईट पर जाइए, अपना अकाउंट बनाने के लिए sign up करिए | उसके बाद वहा पर मौजूद Form 8 को भरिये , उसमे जो जो चीजे अपनी वोटर id की सुधारना चाहते हैं , सब सुधार कर सकते हैं | लास्ट में आधार के OTP से e-sign करके फॉर्म सबमिट करिए |
step 2. जब अब आप फिर से अपना अकाउंट लॉग इन करिये | अपने बूथ की 2003 की वोटर लिस्ट डाउनलोड करिए | जहा पर आपके माता जी या पिता जी वोटर दर्ज थे | वहा से अपने माता -पिता का क्रमांक नोट कर लीजिये |
स्टेप 3. उसके पश्चात अपना फॉर्म भरिये | यहाँ पर आपके पिता जी या माता जी की डिटेल भरनी पड़ेगी | और आपको अपना डॉक्यूमेंट भी देना पड़ेगा |
और फॉर्म सबमिट कर दीजिये |
हो गया फॉर्म कम्पलीट | अपने BLO को सूचित कर दीजिये |
जो लोग दिवाली में धुआँ और ध्वनि प्रदूषण की दुहाई देते नहीं थकते थे आज दिल्ली के आतंकी विस्फोट पर कोई बयान नहीं… ?
निर्दोष हताहतों के प्रति संवेदना💐।
हमारे देश की जाँच एजेंसियाँ इस घृणित काण्ड का खुलासा तो कर ही देंगी, कोई दोषी बचेगा भी नहीं पर संतोष इस बात का है कि सारे देशवासी जान रहे हैं कि इस कृत्य के पीछे कौन सी विचारधारा काम कर रही है।
बँटोगे तो कटोगे।
वन्दे मातरम् 🙏🏼
Cylinder ब्लास्ट पर गृहमंत्री बयान नहीं दिया करते।
सिर्फ दिल्ली पर नहीं, देश पर ये आतंकी हमला है।
थोड़ी देर में गृहमंत्री स्वयं घटना स्थल पर होंगे, बड़ी कार्यवाही देश के अंदर होते आप देखेंगे।