"Jharkhand govt has no role in HC staying notifications cancelling appointments of CDPOs, recruitment through JSSC-CGL exam.
Political parties like BJP doing politics using students."
- JMM MLA Hemlal Murmu
गढ़वा के माननीय विधायक श्री सत्येन्द्र नाथ तिवारी जी के अस्वस्थ होने की दुखद ख़बर मिली।
माँ गढ़देवी से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।दीपावली के शुभ दिन पर प्रभु श्रीराम की भाँति उनके जल्द गढ़वा आगमन की प्रार्थना करता हूँ।
वे शीघ्र समान्य होकर गढ़वा के विकास में अपना योगदान देंगे…यह विश्वास है।
@HemantSorenJMM@sntiwarimla
श्री मिथिलेश कुमार ठाकुर जी।
सिद्धांत और नीति के प्रतीक!!
श्री मिथिलेश कुमार जी का व्यक्तित्व और कार्यशैली सदैव समाज में आदर्श स्थापित करते रहे हैं। यह सर्वविदित है कि वे अपने वचनों और नीतियों से कभी नहीं डिगे। परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी रही हों, उ���्होंने अपने सिद्धांतों का मार्ग नहीं छोड़ा।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी भी सत्ता और पद की राजनीति को प्राथमिकता नहीं दी। जनसेवा ही उनके जीवन का ध्येय रहा। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना और उसकी समस्याओं का समाधान करना ही उन्होंने अपना कर्तव्य माना।
साधनहीन और वंचित वर्गों के लिए उनके प्रयास हमेशा प्रेरणादायी रहे। उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली और निष्कलंक छवि ने उन्हें जनता के बीच विशेष सम्मान दिलाया है।
आज जब राजनीति में अवसरवाद और स्वार्थपरता देखने को मिलती है, तब श्री मिथिलेश कुमार जी का आदर्श और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वे हमें यह सिखाते हैं कि नीतियों पर अडिग रहकर भी जनसेवा की जा सकती है और सच्चे अर्थों में लोकसेवा वही है जिसमें त्याग और ईमानदारी हो���।
@MithileshJMM @JMM_Garhwa
भवनाथपुर विधानसभा से लोकप्रिय विधायक आदरणीय श्री @AnantPartapdeo जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मां गढ़देवी से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुयशपूर्ण जीवन की प्रार्थना है।
झारखंड सरकार के माननीय मंत्री श्री @hafizulhasan001 जी के अस्वस्थ होने का समाचार मिला है।
इलाज के लिए उन्हें राजधानी रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हम सभी की दुआएं और प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।
मां गढ़देवी से हफ़ीज़ुल भाई के शीघ��र स्वस्थ और शतायु होने की कामना है।
@HemantSorenJMM @JmmJharkhand
यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी ने आज झारखंड विधानसभा के तृतीय मानसून पूरक सत्र से पहले मा. विधानसभा अध्यक्ष आदरणीय श्री @Rabindranathji जी का अभिनंदन किया।
आप दोनों का मार्गदर्शन झारखंड की लोकतांत्रिक परंपराओं को और अधिक मजबूत करेगा।
@JmmJharkhand
आज दिल्ली के अपोलो अस्पताल पहुंचकर मा. शिक्षा मंत्री श्री रामदास सोरेन जी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और परिजनों को संबल दिया।
आदरणीय रामदास दा जी की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बनी हुई है। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली के सहारे रखा गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम निरंतर उनकी देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
इस कठिन समय में हम सभी आदरणीय रामदास दा जी के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थनाएं और दुआएं करें।
मैं माँ गढ़देवी से प्रार्थना करता हूँ कि आदरणीय रामदास दा जल्द स्वस्थ होकर हम सबके बीच लौटें।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@KunalSarangi@IrfanAnsariMLA
आप सभी को भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और समर्पण के पावन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई।
ईश्वर से प्रार्थना है कि सभी का जीवन सुख, शांति, समृद्धि और सौहार्द से परिपूर्ण हो और रिश्तों की यह पावन डोर सदा मजबूत बनी रहे।
@HemantSorenJMM
बाबा...
नदी की तरह बहते थे आप,
पहाड़ों की तरह अडिग रहते थे आप,
रगों में धड़कते स्वाभिमान थे आप।
खुरदुरी माटी में थे आप,
पसीने और संघर्ष में थे आप,
मेहनतकश दिल की धड़कन थे आप।
जब जंगलों पर हमला हुआ,
जन अस्मिता कुचली गई,
ढाल बन बनकर खड़े थे आप।
झारखंड जानता है,
लड़कर आपने हक पाया है,
सिर उठाकर चलना सिखाया है।
आज आप हमारे बीच नहीं हैं,
लेकिन...
झारखंड की रोई हुईं लाल आंखों में,
खामोश जंगल की सरसराहट में,
शोक में डूबे लोगों की सुबुकाहट में,
आज भी जिंदा हैं दिशोम गुरु... और अनंतकाल तक जिंदा रहेंगे।
झारखंड आपकी राह चलेगा,
आपका सपना पूरा करेगा,
झारखंड आपका सदा ऋणी रहेगा...
जंगलों की गूंज,
झारखंड की धड़कन थे आप।
न लाठी से डरे-न बंदूक से,
हर डर के आगे एक दीवार थे आप।
यातनाएं सही-लड़ाइयां लड़ीं,
आखिरी तक हक की मशाल थामे रहे आप।
पूरे झारखंड ��े विश्वास थे आप
वंचित-शोषित के खास थे आप।
आपने सिखाया
जंगल झुकेगा नहीं।
वंचित का हक़ छिनेगा नहीं।
झारखंड की आवाज दबेगी नहीं।
@HemantSorenJMM @JmmJharkhand
दिशोम गुरु की पूरी जिंदगी झारखंड के हक, अस्मिता और अधिकारों के लिए समर्पित रही।
हम सबकी जिम्मेदारी है कि उन्हें ��ह सम्मान दिया जाए, जिसके वे असल हकदार हैं।
श्री मिथिलेश जी की इन मांगों का समर्थन है। इन मांगों में इतिहास का सम्मान व भविष्य की प्रेरणा बसी हुई है।
@HemantSorenJMM
माटी का बेटा,माटी में लौटा।
“मिट्टी का ऋण कभी खत्म नहीं होता और शिबू सोरेन उसी मिट्टी की आवाज थे।"
दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का निधन एक युग, एक विचार, एक आंदोलन, एक पीढ़ी के साहस, संघर्ष और चेतना का अवसान है। उनका निधन झारखंड की आत्मा का एक टुकड़ा खो जाने जैसा है। वो टुकड़ा जो सदियों से उपेक्षा, शोषण और हक की लड़ाई लड़ता आया था।
शिबू सोरेन महज एक नेता नहीं थे। वे झारखंड की मिट्टी से उपजे वह बीज थे; जिसने जल, जंगल, जमीन की रक्षा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। वे आदिवासी अस्मिता के सबसे सशक्त प्रहरी, पीड़ितों की सबसे मुखर आवाज और मजदूरों के लिए अनथक लड़ने वाले सेनानी थे।
शिबू सोरेन जी का जीवन झारखंड की ही तरह तपस्वी और संघर्षशील रहा। शिबू सोरेन ने बहुत ही कम उम्र में शोषण के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या जब स्थानीय महाजन ने की, तो यह घटना उनके जीवन का अह��� मोड़ बन गई। उन्होंने तय किया कि वे समाज को जागरूक करेंगे, उन्हें उनके अधिकारों के लिए लड़ना सिखाएंगे।
1970 के दशक में शिबू सोरेन जी ने आदिवासी किसानों को महाजनी शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए धनकटनी आंदोलन शुरू किया। तभी आदिवासी समाज के लोगों को उनमें अपना नेता दिखाई दिया, जो उन्हें सूदखोरों से आजादी दिला सकते थे। इसी आदोलन के दौरान शिबू सोरेन को दिशोम गुरु की उपाधि मिली।
झारखंड मुक्ति मोर्��ा (JMM) की ��्थापना एक जनांदोलन की उपज थी। शिबू सोरेन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि यह पार्टी नहीं, एक परिवर्तन की चेतना है। उन्होंने कहा था कि झारखंड कोई भूगोल नहीं, यह हमारे जीवन का नाम है।
उन्होंने हर मंच से दिल्ली की सत्ता को चुनौती दी कि जब तक झारखंड को एक अलग राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में नौजवान, आदिवासी, किसान, छात्र-छात्राएं इस आंदोलन से जुड़ते ग��।
साल 2000 में जब झारखंड अलग राज्य बना, तो यह दिशोम गुरु की तपस्या का फल था। उन्होंने यह साबित कर दिया कि आवाज अगर सच्ची हो, तो वह पर्वत भी हिला सकती है।
मुख्यमंत्री के रूप में जब आदरणीय बाबा ने राज्य की बागडोर संभाली; तब ग्रामीण विकास, वनाधिकार कानून का क्रियान्वयन, लोक-कल्याणकारी योजनाएं और गरीबों की सीधे भागीदारी उनकी प्राथमिकता में शामिल रहा। उन्होंने कई योजनाएं ऐसी बना��ं जो राज्य के पिछड़े जिलों को मूलभूत सुविधाएं दिला सकें। वे मानते थे कि विकास का अर्थ केवल शहरों को सजाना नहीं, बल्कि गांवों को अधिकार और आत्मनिर्भरता देना है। वे ऐसे मुख्यमंत्री थे, जो हर पंचायत में जाकर जनता से सीधे संवाद करना पसंद करते थे।
शिबू सोरेन जी के पास न कोई दिखावा था, न कोई छल। सादा जीवन, खादी का कुर्ता और गांव की भाषा में बोलने वाला नेता। वे झारखंड के आम आदमी के प्रतीक बन चुके थे। उनके लिए सत्ता कभी लक्ष्य नहीं रही, बल्कि केवल जनहित के लिए एक साधन थी।
आज दिशोम गुरु हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका संघर्ष, दर्शन और विचार हम सबके भीतर जीवित हैं। वे केवल एक पीढ़ी के नेता नहीं थे, वे आने वाली पीढ़ियों की चेतना बन गए हैं। झारखंड की हर पहाड़ी, हर पगडंडी में उनकी स्मृतियां बसी हुई हैं। आदरणीय शिबू सोरेन जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिवर्तन सिर्फ नारों से नहीं, समर्पण और संघर्ष ��े आता है। उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए, जल-जंगल-जमीन और पीड़ित-शोषित-वंचितों की रक्षा के लिए हम सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।
दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन अमर रहें।
मिथिलेश कुमार ठाकुर
केंद्रीय महासचिव, झारखंड मुक्ति मोर्चा।
पूर्व मंत्री, झारखंड सरकार ।
@HemantSorenJMM @JmmJharkhand