जब चारों तरफ़ नफ़रती ज़हरीले कंटेन्ट की बाढ़ है तो ग़ाज़ियाबाद का बताया जा रहा यह वीडियो सुकून देता है जिसमें हज के लिए जा रहे लोगों का उनके हिन्दू पड़ोसी माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं।
हिंदू दुकानदार से रोजदार ने रोजा इफ्तार के लिए पानी की बोतल मांगी दुकानदार ने पानी के साथ खाना भी मुफ्त दिया साथ में ₹100भी, सैल्यूट।
दुकानदार भाई ने इंसानियत की बहुत बड़ी मिसाल पेश की, देखिये।
@RebornManish स्वामी विवेकानंद जी का ये वक्तव्य मनुष्यों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा, हम सब को एक बेहतर इंसान बनने की कोशिश करते रहना चाहिए और औरों के लिए आपसे प्रेरणा जगे ऐसे कार्य करने चाहिए।
बापू को सदियाँ सुनेंगी, गुनेगीं,और सहेजकर रखेंगी क्योंकि उन्होंने पंक्ति के अंतिम छोर पे खड़े उस शख्स के लिए आवाज़ बुलंद की जिसे कोई भी अपनाना नहीं चाहता था उनके विचारों को आज पुरी दुनियाँ सम्मान देती है।
गांधी इस मिट्टी की खुशबू हैं, इस हवा की सांस हैं, इस देश के दिल की धड़कन हैं। गांधी का नाम लेना सिर्फ इतिहास को याद करना नहीं है, बल्कि उस आत्मा को छू लेना है जो हर हिन्दुस्तानी के खून में दौड़ती है।
सोचिए, ये देश इतना आज़ाद है कि यहां कोई गांधी को गाली भी दे सकता है। मगर क्या यही आज़ादी पड़ोस के चीन में मिलेगी? वहां माओ की आलोचना करने की हिम्मत कौन कर सकता है? गांव-जवार ही नहीं, इंसान की पूरी ज़िंदगी फालूदा बना देंगे।
यही फर्क है भारत विचारों की धरती है, संवाद की धरती है, लोकतंत्र की धरती है। और इस लोकतंत्र की नींव गांधी के विचारों पर टिकी है।
गांधी ने हमें लड़ना सिखाया, मगर दुश्मन से नहीं नफ़रत से, हिंसा से, अन्याय से। उन्होंने हमें दिखाया कि ताकत बंदूक की नली से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा से आती है।
आज चाहे कितने ही लोग गांधी की विरासत को छोटा करने की कोशिश करें, चाहे कितने ही झंडे और चेहरे सत्ता के प्रतीक बन जाएं, मगर इस मिट्टी से गांधी को कोई नहीं मिटा सकता।गांधी इस देश की रगों में उतरे हुए हैं।
वो किसान की थकान में हैं, मजदूर की पसीने में हैं, और सबसे बड़ी बात वो उस साहस में हैं जो हर भारतीय को अपने हक़, अपनी आवाज़ और अपने अस्तित्व के लिए खड़ा होना सिखाता है।
गांधी कोई मूर्ति नहीं जो सिर्फ चौक-चौराहों तक सीमित रह जाएं। गांधी वो विचार हैं जो इस देश के हर दिल में ज़िंदा हैं। भारत की तासीर प्रेम और भाईचारे में है, उसका रंग अहिंसा में है, उसकी ताकत संवाद में है।अगर हम गांधी को भूला देंगे तो भारत अपनी पहचान खो देगा।इसलिए कहना ही पड़ेगा ये देश गांधी का है, और गांधी का ही रहेगा। क्योंकि गांधी केवल इतिहास नहीं भारत का दिल हैं।🌹
गांधी इस मिट्टी की खुशबू हैं, इस हवा की सांस हैं, इस देश के दिल की धड़कन हैं। गांधी का नाम लेना सिर्फ इतिहास को याद करना नहीं है, बल्कि उस आत्मा को छू लेना है जो हर हिन्दुस्तानी के खून में दौड़ती है।
सोचिए, ये देश इतना आज़ाद है कि यहां कोई गांधी को गाली भी दे सकता है। मगर क्या यही आज़ादी पड़ोस के चीन में मिलेगी? वहां माओ की आलोचना करने की हिम्मत कौन कर सकता है? गांव-जवार ही नहीं, इंसान की पूरी ज़िंदगी फालूदा बना देंगे।
यही फर्क है भारत विचारों की धरती है, संवाद की धरती है, लोकतंत्र की धरती है। और इस लोकतंत्र की नींव गांधी के विचारों पर टिकी है।
गांधी ने हमें लड़ना सिखाया, मगर दुश्मन से नहीं नफ़रत से, हिंसा से, अन्याय से। उन्होंने हमें दिखाया कि ताकत बंदूक की नली से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा से आती है।
आज चाहे कितने ही लोग गांधी की विरासत को छोटा करने की कोशिश करें, चाहे कितने ही झंडे और चेहरे सत्ता के प्रतीक बन जाएं, मगर इस मिट्टी से गांधी को कोई नहीं मिटा सकता।गांधी इस देश की रगों में उतरे हुए हैं।
वो किसान की थकान में हैं, मजदूर की पसीने में हैं, और सबसे बड़ी बात वो उस साहस में हैं जो हर भारतीय को अपने हक़, अपनी आवाज़ और अपने अस्तित्व के लिए खड़ा होना सिखाता है।
गांधी कोई मूर्ति नहीं जो सिर्फ चौक-चौराहों तक सीमित रह जाएं। गांधी वो विचार हैं जो इस देश के हर दिल में ज़िंदा हैं। भारत की तासीर प्रेम और भाईचारे में है, उसका रंग अहिंसा में है, उसकी ताकत संवाद में है।अगर हम गांधी को भूला देंगे तो भारत अपनी पहचान खो देगा।इसलिए कहना ही पड़ेगा ये देश गांधी का है, और गांधी का ही रहेगा। क्योंकि गांधी केवल इतिहास नहीं भारत का दिल हैं।🌹
@RebornManish इस तसवीर और लिखे हर्फ़ों को मैंने रामचंद्र गुहा जी की क़िताब "india after Gandhi"मैं महसूस किया कितना मुश्किल दौर रहा होगा ।मुझे लगता है कि हर एक व्यक्ति को उस दौर का इतिहास पढ़ना चाहिए और " भारत गांधी के बाद" तो जरूर पढ़ना चाहिए।
@azizkavish बहसी इंसान का कोई धर्म नहीं होता है है उसके अंदर की इंसानियत ख़त्म हो जाती है उसे सिर्फ बहसी पन ही नजर आता है इसे किसी भी धर्म से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। बेटी किसी भी धर्म की होगी वह केवल बेटी ही होती है बहन होती है एक मासूम होती है बस।
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना
मुनव्वर राना
अपनी बात बेहद सटीक और बेख़ौफ़ अंदाज़ में कहने वाला,अपनी शायरी से मां को बेइंतहा तव्वजों देने वाला एक अज़ीम शायर दुनिया ये फ़ानी को कूच कर गया
अल्लाह से दुआ करता हूँ मग़फ़िरत फरमाए
आमीन
सूचना आई है कि #उसनेगांधीकोक्योंमारा का छठवाँ संस्करण आ गया है। किताब 2 अक्टूबर 2020 में छपी थी।
इस किताब के अंग्रेजी, पंजाबी तथा मराठी अनुवाद छप चुके हैं और उर्दू अनुवाद के जल्द ही आने की उम्मीद है।
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