रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया :
मैं तुममें दो चीज़ें छोड़कर जा रहा हूँ जबतक तुम इन दोनों पर अमल करते रहोगे तो कभी गुमराह नहीं होगे यानी अल्लाह की किताब कुर'आन और रसूल ﷺ की सुन्नत (हदीस )
(मिशकात शरीफ हदीस न.186)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:-
तुम में से कोई शख्स ईमान वाला न होगा, जब तक उसके वालिद, उसकी औलाद और तमाम लोगों से ज्यादा उसके दिल में मेरी मोहब्बत न हो जाए
(सहीह बुखारी हदीस न. 15)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“क़यामत के दिन तुम सब हकदारों के के हक़ूक़ इनको अदा करोगे, हत्ता की उस बकरी का बदला भी जिस के सींग तोड़ दिए गए हों सींगों वाली बकरी से पूरा पूरा लिया जाएगा”
(मुस्लिम 6580)
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रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया=
जो अपने माल की हिफाज़त करते हुए मारा जाए वोह शहीद है और जो अपनी जान बचाते हुए मारा जाए वोह भी शहीद है और जो शख़्स अपने घरवालों का बचाव करते हुए मारा जाए वोह भी शहीद है.
( सुनन निसाई शरीफ़ हदीस नं .4099 )
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रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया :
हमारे रब का इरशाद है रोज़ा एक ढाल है जिसके जरिए बन्दा जहन्नम से बचता है और यह सिर्फ़ मेरे लिए है और मैं ही इसका बदला दूंगा
(मुसनद अहमद हदीस न. 3645)
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अल्लाह तआला फ़रमाता है =
अल्लाह ने तो (जंगे) बदर के मौक़े पर ऐसी हालत में तुम्हारी मदद की थी जब तुम बिल्कुल खाली हाथ और बिना सामान के थे, लिहाज़ा (सिर्फ़) अल्लाह का ख़ौफ़ दिल में रखो, ताकि तुम शुक्रगुज़ार बन सको।
(सूरह आले इमरान आयत न. 123 )
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रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :
नेकी के किसी भी काम को मामूली मत समझो, चाहे तुम अपने भाई से मुस्कुराते हुए चेहरे और विनम्रता से मिलो।
📓(मिश्कात : 1894)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“तुम्हारा रब फ़रमाता है, हर नैकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक है और रोज़ा मेरे लिए है और में ही इसका बदला दूँगा”
(तिर्मिज़ि 767)
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