कहाँ तक सुनोगे कहाँ तक सुनाऊँ
हज़ारों ही शिकवे हैं क्या क्या सुनाऊँ
हुज़ूर आप पर इक जहाँ की नज़र है
निगाह-ए-करम से भी मुझ को ये डर है
जहाँ की नज़र में कहीं आ न जाऊँ
कहाँ तक सुनोगे कहाँ तक सुनाऊँ
~ तनवीर नक़वी
#साहित्य_सागर#SahityaSagar
नाश भी हूँ मैं
अनंत विकास का
क्रम भी त्याग का
दिन भी चरम
आसिक्त का तम भी
तार भी आघात भी
झंकार की गति भी
पात्र भी, मधु भी,
मधुप भी, मधुर विस्मृति भी
अधर भी हूँ और
स्मित की चाँदनी भी हूँ
बीन भी हूँ मैं
तुम्हारी रागिनी भी हूँ
~ महादेवी वर्मा
#साहित्य_सागर#SahityaSagar
निगाहों से वो अपनी कत्ल-ए-आम कर रहा है
नाम लेकर मेरा, वो मुझे बदनाम कर रहा है ।
अभी तो हुआ नहीं इकरार भी सही से और वो
किस्सा-ए-मुहब्बत को, यूँ सरेआम कर रहा है ।
#चंचल_माहौर 'स्वर'