#साहित्य_सागर (राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत संस्था) - जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्य को बढ़ावा देना है एवं नव रचनाकारों को सही दिशा प्रदान करना है। #SahityaSagar
तुम्हें इस बात पे शायद, यक़ीं नहीं होगा,
कोई उस जैसा यहां पर, हसीं नहीं होगा,
बेतक़ल्लुफ़ वो, दिल के मक़ां में रहता है,
शहर में सारे, कोई ऐसा, मक़ीं नहीं होगा ।
~ आदि
@AreSunoTo
किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
जो दिल की धड़कनें समझे न आँखों की ज़बाँ समझे
नज़र की गुफ़्तुगू समझे न जज़्बों का बयाँ समझे
उसी के सामने उस की शिकायत का इरादा है
~ साहिर लुधियानवी
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कहाँ तक सुनोगे कहाँ तक सुनाऊँ
हज़ारों ही शिकवे हैं क्या क्या सुनाऊँ
हुज़ूर आप पर इक जहाँ की नज़र है
निगाह-ए-करम से भी मुझ को ये डर है
जहाँ की नज़र में कहीं आ न जाऊँ
कहाँ तक सुनोगे कहाँ तक सुनाऊँ
~ तनवीर नक़वी
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अब वो करम करें कि सितम मैं नशे में हूँ
मुझ ���ो न कोई होश न ग़म मैं नशे में हूँ
सीने से बोझ उन के ग़मों का उतार के
आया हूँ आज अपनी जवानी को हार के
कहते हैं डगमगाते क़दम मैं नशे में हूँ
~ साहिर लुधियानवी
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न मय के न जाम के लिए मरते हैं
न दहर में नाम के लिए मरते हैं
शायद कभी ब'अद-ए-मर्ग पूछे वो हमें
बस हम इसी काम के लिए मरते हैं
~ मीर हसन
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सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।
~रामधारी सिंह 'दिनकर'
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तुम तो ऐ मेहरबान अनूठे निकले
जब आन के पास बैठे रूठे निकले
क्या कहिए वफ़ा एक भी वअ'दा न किया
ये सच है कि तुम बहुत झूटे निकले
~ मीर तक़ी मीर
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मिल जाएगा प्यार दीवानों दिल लगाओ तो सही,
दौड़कर आएगी चाहत तुम्हारी बुलाओ तो सही।
दुनिया में जीते हैं सब पर कितने याद रह पात�� हैं,
समान समझकर "सैनी" आगे बढ़ाओ तो सही।
~ अशोक कुमार
मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
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