Dear @jawamotorcycles,
I am extremely disappointed with the after-sales support for my Jawa 42 Bobber. I have been facing recurring throttle body issues for nearly 2 years despite repeated service visits and complaints.
#Jawa#Jawa42Bobber
ಪೆರಿಯಾರ್— ಒಬ್ಬ ಕನ್ನಡಿಗ— ಬಿತ್ತಿದ ಜಾತಿ ವಿನಾಶ, ಸ್ತ್ರೀ ಸಮಾನತೆ ಮತ್ತು ಸ್ವಾಭಿಮಾನದ ದ್ರಾವಿಡ ಚಿಂತನೆಗಳೇ ಇವತ್ತು ತಮಿಳುನಾಡಿನ ಪ್ರಾದೇಶಿಕ ಶಕ್ತಿ, ಆ ವೈಚಾರಿಕ ಬಲವೇ ಅಲ್ಲಿ ಯಾವುದೇ ಹಿಂದಿ ಪಕ್ಷಗಳ ಆಧಿಪತ್ಯಕ್ಕೆ ಜಾಗವಿಲ್ಲದಂತೆ ಮಾಡಿ, ತಮ್ಮ ಭಾಷೆ-ನೆಲದ ಹಕ್ಕುಗಳಿಗಾಗಿ ತಲೆಬಾಗದೆ ನಿಲ್ಲುವ ಗಟ್ಟಿತನವನ್ನು ಕೊಟ್ಟಿದೆ.
#Periyar
REPOST | Remembering Periyar E.V. Ramasamy on his birth anniversary: a legacy that continues to define the fight for social justice and human rights. Read @frontline_india's stories.
Samadharma: Periyar’s idea for India
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https://t.co/uweQfkZlhm
.@Kanchanyadav000, पहले ये बता, अजीत भारती ने ऐसा कब कहा था? या फिर आरोप लगाने से पहले तथ्य जाँचना तुम्हारी जिम्मेदारी में आता ही नहीं?
किसी के घर की महिलाओं पर घटिया टिप्पणी करेंगे और फिर जवाब में फूलों की माला की उम्मीद रखेंगे? जवाब मिला तो अचानक नैतिकता याद आ गई?
जिसने मर्यादा की सीमा पहले लांघी, जवाबदेही भी उसी की बनती है। अपनी कही बात का हिसाब दिए बिना दूसरे के जवाब पर रोना बंद कर दो।
दलितों ने OBC आरक्षण लागू कराने के लिए बड़ा संघर्ष किया है, जब कई OBC स्वयं अपने OBC आरक्षण का विरोध कर रहे थे। क्योंकि अनुच्छेद 16 में “Backward” शब्द को सम्मिलित कराने के लिए बाबा साहब को बड़ा संघर्ष करना पड़ा था। संविधान सभा में अनुच्छेद 16 में “Backward” शब्द लिखे जाने का बहुत विरोध हुआ था, लेकिन बाबा साहब के आगे टिक नहीं पाया। वैसे ही अनुच्छेद 340 और अनुच्छेद 15 का भी संघर्ष है।
आरक्षण विरोधी बार-बार डराते हैं“कम नंबर वाले SC-OBC-ST आरक्षण से डॉक्टर बन जाएंगे, मरीजों का क्या होगा?”
तो ज़रा NEET-2025 का गणित भी समझ लीजिए। पेपर 720 नंबर का था। क्वालीफाई करने की सीमा General/EWS के लिए 144 नंबर यानी 20%, जबकि OBC-SC-ST के लिए 113 नंबर यानी करीब 16% थी।
अब मेरा सवाल है - देश के कितने दलित-पिछड़े-आदिवासी परिवार इतने अमीर हैं कि अपने बच्चे की MBBS पर एक करोड़ या उससे ज्यादा खर्च कर सकें? सामाजिक-आर्थिक गैरबराबरी को भी इस बहस में रखिए।
गरीब SC-OBC-ST का बच्चा आरक्षण से मेडिकल कॉलेज पहुँचे तो आपको अचानक ‘मेरिट’, ‘काबिलियत’ और ‘मरीज की जान’ याद आ जाती है; लेकिन कम रैंक के बावजूद मोटी फीस देकर कोई महंगी MBBS सीट खरीदने की क्षमता रखता हो, तो आपकी ‘मेरिट’ की घंटी क्यों नहीं बजती?
असल दिक्कत कम नंबर से है या गरीब-दलितों-पिछड़ों व आदिवासियों को अवसर मिलने से?
चंद्रशेखर का नाम लेकर अजीत भारती गाली दे रहा है साथ ही दलित महिलाओं को मोमबत्ती से टॉर्चर करके सेक्स करने का ट्रायल यानी रेप की धमकी दे रहा है बावजूद इसके अगर दिल्ली पुलिस इसपर एक्शन नहीं लेती है तो साबित हो जाएगा तीनों का मालिक एक ही है; मना कर रहा है।
लंबे समय से संविधान प्रदत्त हिस्सेदारी की व्यवस्था यानी आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
कान खोलकर सुन लो—आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह सदियों से सामाजिक भेदभाव और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
भारत सरकार व लखनऊ दरबार में बैठे सत्ताधीशों, कान खोलकर सुन लो—आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरक्षण पर हमला यानी सामाजिक न्याय पर हमला है और सामाजिक न्याय से समझौता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) किसी भी कीमत पर नहीं करेगी।
हम यह भी देख रहे हैं कि इस पूरे माहौल को बनाने में मीडिया की बड़ी भूमिका है। हमारे हितों के विपरीत विचार रखने वाले लोगों को बार-बार बुलाकर एकतरफा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन याद रखिए—हमारे सब्र का इतना इम्तिहान मत लीजिए। अगर हमारी आवाज को लगातार दबाने और नजरअंदाज करने की कोशिश की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
हम जानते हैं कि मेनस्ट्रीम मीडिया में हमारा पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी।
और आरक्षण का विरोध करने वालों को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) खुली बहस के लिए आमंत्रित करती है।
अगर आपके पास आरक्षण के खिलाफ तर्क और तथ्य हैं, तो सामने आइए। बहस हो—तर्क से, तथ्यों से और संविधान के दायरे में।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!
चलो जंतर मंतर
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों के लिए।
आरक्षण को बचाना और बढ़ाना है।
तारीख - 27 सितंबर 2026 दिन रविवार
जो बहुजनों को ज्यादा आरक्षण देगा सत्ता पर वही राज करेगा।
“पानी नहीं मूत पिलाएँगे”. दलितों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले और उनको सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने वाले इस जातिवादी को देखिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से कहना है की ये किसी कमरे के अंदर नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से कहीं गई बात है। @DelhiPolice
सुप्रीम कोर्ट का डबल स्टैंडर्ड इसलिए है क्योंकि वहाँ एससी,एसटी,ओबीसी का प्रतिनिधित्व नहीं है।जेनरल वर्ग के ओवर रिप्रजेंटेशन के चलते सिर्फ उसी समाज के वर्चस्व को बनाए रखने के लिए काम किया जा रहा है।
साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने जजों की लिस्ट जारी की.
जजों के नामों की लिस्ट को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन के पास भेजा गया.
महामहिम राष्ट्रपति ने कहा, इस लिस्ट में तो सभी सवर्ण है, दलित या आदिवासी जजों का नाम क्यों नही है ?
कोलेजियम तब जाकर केजी बालाकृष्णन का नाम जोड़ा. केजी बालाकृष्णन सुप्रीम कोर्ट के जज बने. और बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने.
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दलित समाज से थे. उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल मंदिरों में दर्शन करने में बिता दिया. तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से हैं,
आज तक इन्होंने आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व पर क्या किया ? किसी समाज से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनाने से समाज का विकास नही होता है. किसी भी समाज का विकास तब होता है जब आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलता है.
The difference between an Ambedkarite and a Manuvadi?
In the CJP protest , In a crowd of one lakh Ambedkarites, women from every community were safe.
But
In the UGC protest, in a crowd of just 500 Manuwadis, a woman from their own community is not safe. Delhi Police must ensure the safety of women.
E20 पेट्रोल में गन्ना प्रयोग करके पैसे बचाने की बात प्रचारित की गई लेकिन एक्चुअल डेटा तो उलट है।
चीनी, गुड, चावल कनकी, मक्के का आटा, इड्ली रवा/राइस फ्लोर, पशु आहार, पोल्ट्री फीड सबके दाम बढ़ गए इससे दूध, अंडे इत्यादि के भी दाम बढ़ गए है।
पेट्रोल धनी लोगो के लिए था लेकिन घरेलू दाम गरीबो के लिए भी बढ़ गए?
पहले चीनी शीरा निर्यात होता था अब आयात करने की नौबत आ गई है।
आखिरकार रैपिड़ो को बहुजनो के आगे झुकना ही पड़ा 🔥🔥
जातिसूचक टिप्पणी का विरोध करने पर @rapidoapp_ ने ड्राइवर अंकित कुमार को 99 साल के लिए सस्पेंड कर दिया था फिर जब भाई आकाश आनंद और बहुजनों ने रैपिड़ो के खिलाफ मुहिम छेड़ी तो अंततः रैपिड़ो को अंकित कुमार का सस्पेंशन रद्द करना पड़ा...जय भीम
Rapido को सबक सिखा दिया है, लेकिन देश के बाकी व्यापारियों, उद्यमियों और कारोबारी संस्थानों को भी यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं: यदि आपको इस देश में व्यवसाय करना है, तो आपको संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही व्यापार करना होगा। जो कारोबारी संस्थान संवैधानिक मूल्यों और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनका व्यापार चौपट कर दिया जाएगा।