पहाड़ ने नहीं देखा
कभी भी
समंदर ।
समंदर भी कहां चढ़ सका
कभी पहाड़ पर ।
पर फिर भी
जोड़े रखा उन्हें एक दूसरे से
बहती हुई
एक नदी ने ।
वो लोग
जो मिल नहीं सके कभी
जुड़े रहे हमेशा
आंखों से बहती
नदी के सहारे ।।
~गुंजन
#Repost
चित्र:शब्द
सिर्फ़ शब्दों से नहीं,
बिना छुए उसे छूकर,
बिना चूमे उसे चूमकर
बिना घेरे उसे बाँहों में घेरकर,
दूर से उसे पँखुरी-पँखुरी खोलते हुए
बिना देखे उसे दृश्य करते हुए
मैंने उससे कहा।
मुझे भी जानना हैं श्याम ….
मेरे हाथों में ऐसी कौनसी लकीर अधूरी हैं….
कि ख़ुशियाँ सामने होकर भी, मेरी नहीं होती….
और हर चाहत के लिए मुझे तड़पना पड़ता हैं….#N#बज़्म#Nita_Vasave
औरतों को मर्यादा सिखाने में इतना व्यस्त है ये समाज ,के भूल गया है के संस्कार तुम्हें अपने लड़को को भी देने थे...
वो इनसे क्यों नहीं पूछता देर सवेर बाहर क्यों हो... 🙃💯
3 साल की बच्ची हो, 17 साल की लड़की, ड्यूटी पर डॉक्टर या 85 साल की अम्मा,यहाँ तक कि बेज़ुबान जानवर तक... जब इनके साथ Rape-Gangrape जैसी खौफनाक बर्बरता होती है, तब भी मर्दजात को सबसे पहले अपनी So called men ego और Offended होने की फिक्र सताने लगती है.
जिस औरत की कोख, दूध और खून से तुम्हारा वजूद बना है,उसी औरत जात को जब जीते-जी नोच कर मार दिया जाता है, तब तुम्हारी so called मर्दानगी कहाँ चली जाती है? तब तुम्हें उस बर्बरता पर रूह काँपने वाला गुस्सा नहीं आता, बल्कि अपनी सहूलियत और अकड़ बचाने की जल्दी मची रहती है.Its a simple logic — जब इस हैवानियत और मानसिकता पर सवाल उठते हैं, तो तुम्हें मिर्ची क्यों लगती है? अगर तुम उस मानसिकता का हिस्सा नहीं हो, तो तुम्हें बिलबिलाने और सफाई देने की ज़रूरत ही क्या है?
अगर ज़रा सी भी इंसानियत ज़िंदा है, तो इस हैवानियत पर तुम्हारा खून खौलना चाहिए.
सच तो यह है कि इस हैवानियत के खिलाफ सबसे पहली और सबसे बुलंद आवाज़ असली मर्दों की होनी चाहिए, क्योंकि अपराध करने वाली जात भी उन्हीं की है.अगर खुद को इंसान समझते हो, तो अपनी Ego का बचाव बंद करो, और इस घिनौनी सोच के खिलाफ सबसे आगे खड़े होना सीखो.🙏
औरतें उससे भी बड़ी चुटिया होती हैं की अपनी पूरी जिंदगी पुरुष के आगे पीछे निकाल देती है l
उनको उनके माँ बाप को संभालते - संभालते अपनी जिंदगी कब खत्म कर लेती है उन्हें पता ही नहीं चलता l
पुरुष हमेशा चाहता है की औरतें ही उनके लिए sacrifice करें पुरुष तो महान होते हैं उन्हें न कुछ करना पड़े बस उनके लिए सब कुछ होता रहे
गजब का दोगला समाज है ☹️
समय की मांग यही है.....
महिलाओं को चाहिए कि
ना किसी से प्यार करें,
ना किसी से शादी करें,
ना किसी के साथ संबंध बनाएं,
और ना ही किसी बच्चे को जन्म दें....
रोक दें इस दुनिया को आगे बढ़ाना ही,
पुरुषों में बहुत घमंड आ गया है अपने पुरुष होने पर, लेकिन वे यह भूल चुके हैं कि एक औरत ने अपने खून से सींचा है, तभी वे इस दुनिया में आए हैं.😏
अपना अधिकार चाहिए था पांडवों को, राजा चाहिए था राज्य में से हिस्सा चाहिए था द्रौपदी को तो सिर्फ निशाना बनाया गया है, यदि द्रोपदी के कारण महाभारत होने वाला था तो उस समय चीर हरण नहीं होता https://t.co/8uTUWf69r0
किस स्त्री की बात हो रही है ? 🤔
- जिसे पाँच पुरुषों के बीच बाँट दिया गया।
- जिसे उसके ही पति ने जुए में दाँव पर लगा दिया।
- जिसे भरी सभा में अपमानित किया गया।
- जिसके चीरहरण का प्रयास पूरी सभा के सामने हुआ।
- जिसके अपमान पर सभा में बैठे महारथियों की ज़ुबान तक नहीं खुली।
- जिसे बचाने के लिए अंततः स्वयं श्रीकृष्ण को आना पड़ा।
@Ladka__bawaal स्त्री के अपमान के प्रतिशोध में नहीं, खुद अधिकार के प्रतिशोध में,क्योंकि उनको दुर्योधन ने पांच गांव देने से भी मना कर दिया था द्रौपदी को तो निशाना बनाया गया था
थू है ऐसे पुरुष समाज पर जिन्होंने भरी सभा में एक औरत का चीर हरण करवाया
द्रोपदी खुद अपनी रक्षा कर सकती थी,,,,