🛑 नम्र निवेदन- कुछ बैंकर्स दोस्तों को लंबे समय के बाद भी follow back करने में शर्म आ रही है,, twitter पर एक्टिव होने के बावजूद, वो फॉलो बैक नहीं करते है ।
ध्यान रहे ऐसे स्वघोषित celebrities को जल्द ही unfollow कर दिया जाएगा ।
#BankersUnited#Followbackbankers#BankingCommunity
@Adityarahbar120 सत्य से कोसो दूर है ये,,, काट कर फेंक देते है लड़कियों को,,,सामू���िक कुकृत्य करवाया जाता है उनके साथ,,, महीने में कम से कम 5 बार ऐसी खबरे आती है, अखबार में ।।
इतनी बड़ी हकीकत कैसे नजरंदाज कर दी अपने भाई ।।
Working days in Week 👇
▶️RBI- 5days
▶️DFS - 5 days
▶️LIC - 5 days
▶️CVC - 5 days
▶️SEBI - 5 days
▶️BSE- 5 days
▶️NSE- 5 days
▶️NPCI - 5 days
▶️IRDAI- 5 days
▶️Ministry - 5 days
▶️State Govt - 5 days
▶️NABARD- 5 days
❌Banks - 6 days
Bankers demand #5DaysBanking
“मनमोहन सिंह जी का रिकार्ड :-
ए. राजा - जेल
कलमाडी - जेल
कनिमोझी - जेल
रामलिंगा राजू - जेल
सहाराश्री - जेल
संजय चंद्रा - जेल
विनोद गोयनका - जेल
अब एक अपने मान्यवर मोदीजी का रिकार्ड :* -
विजय माल्या - फुर्र
ललित मोदी - फुर्र
संजय भंडारी - फुर्र
जतीन मेहता - फुर्र
छोटा मोदी - फुर्र
मेहुल भाई - फुर्र
चौकसी - फुर्र
हमारी अतिशय राजनैतिक होशियारी (मूर्खता) का पैमाना ये है कि...
एक आदमी लाखों का सूट-बूट* पहनकर कहता है, कि मैं गरीब हूं ,
और हम उसे गरीब मान लेते हैं..
CBI, NIA जैसी एजेंसियां जिस आदमी के हाथों की कठपुतली हैं ,
वह आदमी कह रहा है,
कि मुझे सताया जा रहा है, और हम मान लेते हैं..
जो संसद मे *पूर्ण बहुमत* में है ,
बीस से ज्यादा राज्यों मे सरकार है ,
वह कहता है कि मुझे काम नही करने दिया जा रहा है,
और हम मान लेते हैं…
जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में रह चुके लोगों को चुनाव टिकट देता है ,
फिर कहता है कि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं ,
और हम मान लेते हैं..
जिसके शासन मे सबसे ज्यादा हमारे सैनिक शहीद हुए हैं ,
वह कहता है कि दुश्मन हमसे कांप रहा है , और हम मान लेते हैं..
जिसके समय में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है, और वह कहता है कि हमने किसानों की आय दुगुना कर दी है, और हम मान लेते हैं..
जो सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर सत्ता में आया हो ,
और चार सौ साल पहले के भूतकाल में हमें घुमा रहा हो ,
और फिर भी हम खुश हैं….
✍ Excerpts from a post of *indian public*
अब निर्णय कीजिये कि क्या हम सोचने विचारने वाले मनुष्य हैं या फिर किसी की अंगुलियों पर बँधी डोर से नाचते, उसके कहने पर हँसते, रोते, हिलोरें लेते, गुलाटियाँ खाते और सामाजिक रूप से नपुंसकता की ओर बढ़ते पुतले!