ग्रीन टैक्स और टूरिज्म के नाम पर करोड़ों की वसूली, लेकिन महिलाओं की गरिमा के लिए एक 'टॉयलेट' तक नहीं!
शर्मनाक!😡
आज रोहतांग पास (Rohtang Pass) में हजारों की भीड़ के बीच एक बेहद कड़वी और बेशर्म सच्चाई देखने को मिली। बर्फ और वादियों के बीच परिवार के साथ आई सैकड़ों महिलाएँ और बच्चियाँ अपनी बुनियादी जैविक ज़रूरतों (Toilets) के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पुरुष तो बेशरम होकर कहीं भी किसी कोने में हल्के हो जाते हैं, लेकिन हमारी माँ-बहनें-बेटियाँ क्या करें? कहाँ जाएँ? क्या 'अतिथि देवो भव:' का आपका खोखला नारा सिर्फ टैक्स और परमिट के पैसे लूटने के लिए है?
अगर NGT के नियमों के कारण पक्के निर्माण की मनाही है, तो 'मोबाइल बायो-टॉयलेट वैन' (Mobile Bio-Toilet Vans) लगाने से किस नवाब ने रोका है? मेलों और रैलियों में रातों-रात VVIPs के लिए टॉयलेट वैन पहुँच जाती हैं, लेकिन देश-विदेश से आने वाली आम महिलाओं के लिए पर्यटन विभाग की आँख और कान दोनों बंद हैं।
यह सिर्फ प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि पर्यटन के नाम पर महिलाओं का सीधा और भद्दा अपमान है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों आँखें खोलें और तुरंत रोहतांग जैसी जगहों पर मोबाइल टॉयलेट्स की व्यवस्था करें!
जनता आपको सुविधाओं के लिए पहले अपनी मेहनत की कमाई की मोटी रकम देकर जाते हैं।
@CMOFFICEHP@hp_tourism@DCKullu@tourismgoi@PMOIndia@NCWIndia
#RohtangShame #WomenDignity #HimachalTourismFail #ToiletForWomen #StopExploitingTourists
भारी-भरकम 'ग्रीन टैक्स' भी लिया जाता है, लेकिन बदले में हमारी माताओं-बहनों को बुनियादी जैविक ज़रूरतों के लिए भारी मानसिक तनाव और शर्मिंदगी से गुज़रना पड़ता है।
मैं @birendra_nic सर द्वारा उठाई गई इस जायज़ मांग का पूर्ण समर्थन करता हूँ।
UPDATE: 🚨केवल सोशल मीडिया पर शिकायत ही नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में मैंने कुल्लू उपायुक्त (@DCKullu), हिमाचल पर्यटन विभाग (@hp_tourism) और माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय (@CMOFFICEHP) को विस्तृत तथ्यों के साथ आधिकारिक ध्यानाकर्षण पत्र (ईमेल के माध्यम से) भेज दिया है।
आधी आबादी की गरिमा और निजता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 'मोबाइल बायो-टॉयलेट' कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि एक बुनियादी जैविक ज़रूरत और हक़ है।
अब देखना है कि प्रशासन इस गंभीर 'सिस्टम बग' को कितनी जल्दी फिक्स करता है! #RohtangPass #Manali #HimachalTourism
ग्रीन टैक्स और टूरिज्म के नाम पर करोड़ों की वसूली, लेकिन महिलाओं की गरिमा के लिए एक 'टॉयलेट' तक नहीं!
शर्मनाक!😡
आज रोहतांग पास (Rohtang Pass) में हजारों की भीड़ के बीच एक बेहद कड़वी और बेशर्म सच्चाई देखने को मिली। बर्फ और वादियों के बीच परिवार के साथ आई सैकड़ों महिलाएँ और बच्चियाँ अपनी बुनियादी जैविक ज़रूरतों (Toilets) के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पुरुष तो बेशरम होकर कहीं भी किसी कोने में हल्के हो जाते हैं, लेकिन हमारी माँ-बहनें-बेटियाँ क्या करें? कहाँ जाएँ? क्या 'अतिथि देवो भव:' का आपका खोखला नारा सिर्फ टैक्स और परमिट के पैसे लूटने के लिए है?
अगर NGT के नियमों के कारण पक्के निर्माण की मनाही है, तो 'मोबाइल बायो-टॉयलेट वैन' (Mobile Bio-Toilet Vans) लगाने से किस नवाब ने रोका है? मेलों और रैलियों में रातों-रात VVIPs के लिए टॉयलेट वैन पहुँच जाती हैं, लेकिन देश-विदेश से आने वाली आम महिलाओं के लिए पर्यटन विभाग की आँख और कान दोनों बंद हैं।
यह सिर्फ प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि पर्यटन के नाम पर महिलाओं का सीधा और भद्दा अपमान है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों आँखें खोलें और तुरंत रोहतांग जैसी जगहों पर मोबाइल टॉयलेट्स की व्यवस्था करें!
जनता आपको सुविधाओं के लिए पहले अपनी मेहनत की कमाई की मोटी रकम देकर जाते हैं।
@CMOFFICEHP@hp_tourism@DCKullu@tourismgoi@PMOIndia@NCWIndia
#RohtangShame #WomenDignity #HimachalTourismFail #ToiletForWomen #StopExploitingTourists
@Ashuauqi शत-प्रतिशत सहमत हूँ आशुतोष जी। हमारे सिस्टम का यह एक ऐसा 'बग' (Bug) है जिसे प्रशासन जानबूझकर फिक्स नहीं करना चाहता। जब तक हम सब मिलकर आवाज़ नहीं उठाएंगे, सुविधाओं के नाम पर यह काला धब्बा ऐसे ही बना रहेगा।
शुक्रिया अशोक! जब तक हम आम नागरिक इन 'ज़मीनी कमियों' पर खुलकर सवाल नहीं उठाएंगे, तब तक ये भाषणों वाले विजन हकीकत में नहीं बदलेंगे। इस आवाज़ को आगे बढ़ाने और समर्थन के लिए धन्यवाद।
@birendra_nic बिल्कुल सही कहा सर आपने ! कागजों पर नारे और विजन बहुत बड़े हैं, लेकिन जब ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को एक 'टॉयलेट' जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही, तो 'विश्व गुरु' का सपना अधूरा ही लगेगा। बदलाव सिर्फ भाषणों से नहीं, ज़मीनी एक्शन से आएगा।
@Ashokbhk91 शुक्रिया अशोक ! जब तक हम आम नागरिक इन 'ज़मीनी कमियों' पर खुलकर सवाल नहीं उठाएंगे, तब तक ये भाषणों वाले विजन हकीकत में नहीं बदलेंगे। इस आवाज़ को आगे बढ़ाने और समर्थन के लिए धन्यवाद।
यही तो सबसे बड़ी विडंबना है! विजन 2047 का है, लेकिन ज़मीनी व्यवस्था आज भी सदियों पुरानी है। ग्रीन टैक्स के नाम पर करोड़ों का राजस्व वसूलने के बाद भी अगर महिलाओं को टॉयलेट के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो 'स्वच्छ भारत' के नारों पर सवाल उठना लाज़मी है।
पर्यटन स्थलों पर आधी आबादी (महिलाओं) की गरिमा और सुरक्षा का ध्यान रखे बिना ये सारे नारे सिर्फ खोखले शब्द बनकर रह जाएंगे। प्रशासन को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी ही होगी।
On this Constitution Day, I read the Preamble to the Constitution of India to uphold the values of #Justice, #Liberty, #Equality and Fraternity! Read the Preamble here : https://t.co/jnnLLpk32Z https://t.co/vquHY7nxgk #ConstitutionDay#Democracy via @mygovindia
@ChampaiSoren@DC_Ranchi .. for health benefits. They come here, especially the elderly people, who knows which company and how they get the contract and who doesn't see anything, now you Sir do something.2/2