महान शिक्षाविद, आदर्श शिक्षक, पूर्व राष्ट्रपति, 'भारत रत्न' डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!
सभी को 'शिक्षक दिवस' की बधाई और अनंत शुभकामनाएं!
#TeachersDay#शिक्षक_दिवस
माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल जी, यह SI भर्ती थी या भंडारा? जिसने जी चाहा पेपर पास कर लिया। राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों की गैंग ने भी पेपर बेचे हैं। इसके बावजूद भी आप इस भर्ती परीक्षा को रद्द करने का निर्णय नहीं ले रहे हैं, यह आश्चर्यजनक है।
जल्दी ही SI भर्ती परीक्षा को रद्द करके एक मिसाल कायम कीजिए। #SI_भर्ती_2021_रद्द_करो
@BhajanlalBjp , @RajCMO@DrKirodilalBJP@JogarampatelMLA@Rajendra4BJP
राज्य के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी को पत्र लिखकर सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 को निरस्त नहीं किये जाने की मांग की है। प्रदेश के मेहनतकश युवा जिन्होंने अपने माता-पिता के खून पसीने की कमाई से पढ़-लिखकर नौकरी प्राप्त की है, उन युवाओं को कुछ चंद असामाजिक तत्वों की करतूतों की सजा नहीं मिलनी चाहिए। कुल भर्ती में से 5 प्रतिशत दोषी अभ्यर्थियों के कारण से इस संपूर्ण भर्ती को निरस्त किया जाता है तो यह उन मेहनतकश निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ कुठाराघात एवं अन्याय होगा। @BhajanlalBjp@RajCMO
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp
माननीय शिक्षामंत्री @madandilawar
नागोर जिले का एक 1st ग्रेड अध्यापक @JATbera1 भेराराम जाट काफी समय से राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले रहा है।
तथा SI भर्ती 2021 को लेकर सोशल मीडिया
X ट्विटर पर उनके द्वारा भर्ती रद्द नही करवाने को लेकर मुहिम चलाई जा रही है। जो विधि संगत नहीं है।
उक्त व्यक्ति द्वारा सरकारी भर्तियों पर लिखकर यूवाओ को आंदोलन हेतु भड़काना
सरकारी कर्मचारियों का "केंद्र सरकार सेवा (आचरण) नियम, 1964" और राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गई आचरण संहिता का पालन का पालन नहीं करके सेवा नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
उनके द्वारा पद पर रहते हुए कभी कांग्रेस सरकार के नेताओ तो कभी बीजेपी सरकार के नेताओ को लेकर राजनीतिक पोस्ट की जाती है। उक्त मामले में संज्ञान लेकर उस पर विधिक कानूनी कार्यवाही की जाए।
नियम 9: सार्वजनिक मीडिया में व्यक्तिगत राय व्यक्त करना
सरकारी कर्मचारियों को किसी सार्वजनिक मंच पर, जिसमें सोशल मीडिया भी शामिल है, सरकार या सरकारी नीतियों के खिलाफ आलोचनात्मक या नकारात्मक राय व्यक्त करने से मना किया गया है। ऐसा करने से कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना
सरकारी कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा लेने से मना किया गया है। अगर कोई शिक्षक किसी राजनीतिक या विवादित विषय पर लिखता है, तो उसे प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
यदि कर्मचारी की पोस्ट से सरकारी नीति, निष्पक्षता, या तटस्थता का उल्लंघन होता है, तो उसके खिलाफ सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। इसमें चेतावनी, वेतन कटौती, स्थानांतरण, निलंबन या सेवा समाप्ति शामिल हो सकती है।
साइबर कानून:
यदि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ मानहानि (Defamation) या झूठी जानकारी फैलाने का आरोप सिद्ध होता है, तो कर्मचारी पर आईटी एक्ट, 2000 के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
इसके द्वारा ट्विटर पर IAS टीना डाबी और आरक्षण पर गलत पोस्ट की गई है।
भारतीय संविधान के तहत सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार कुछ प्रतिबंधों के साथ आता है। सरकारी कर्मचारियों को इस अधिकार का उपयोग करते समय ध्यान रखना होता है कि:
अगर कोई सरकारी शिक्षक सोशल मीडिया पर गैर-सरकारी संस्थाओं पर लिखता है और उसकी पोस्ट से सरकारी नियमों, निष्पक्षता, या सार्वजनिक सेवा नियमों का उल्लंघन होता है, तो सरकार उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकती है।
इसमें निम्नलिखित हो सकते हैं:-
निलंबन या वेतन में कटौती।
स्थानांतरण या सेवा से हटाना।
सरकारी नियमों का उल्लंघन साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
इस मामले में उचित संज्ञान लेकर इस अध्यापक पर कानूनी विधिक कार्यवाही करे।
क्योंकि यह एक अध्यापक के सेवा आचरण नियम के खिलाफ है।
साथ ही इसके द्वारा इनके X ट्विटर हैंडल से सरकारी भर्तियों को लेकर यूवाओ को भड़काने का प्रयास भी किया जा रहा है।
तथा समाज के आंतरिक मामलो में टिप्पणियां कर अभी इनके द्वारा शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जा रहा है। @rajcmo
अध्यापक भेराराम द्वारा SI भर्ती को रद्द नही करने को लेकर जयपुर धरने में भाग लेने हेतु ट्वीट करने का लिंक
https://t.co/pOug0bm6mH
ट्विटर X पर सरकारी सेवा से जुड़े होने के बाद भी एक गैर संस्था से लोगो को जोड़ने की मुहिम चलाना
ट्वीट का लिंक
https://t.co/1UO2MaT9jk
माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आपके विभाग के अध्यापक अगर इस तरह की गतिविधियों में भाग लेने लग जायेंगे तो सरकारी स्कूलों के और भी अध्यापकों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने का हौसला बढ़ेगा।
जिससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ साथ स्कूलों में अध्यापकों द्वारा राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना आम बात हो जायेगी।
आपको इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
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