इस देश के #SCST वर्ग बाबासाहेब भीमराव
अंबेडकर जी और SCST एक्ट के खिलाफ कितनी घटिया मानसिकता है इस स्वतंत्र भारद्वाज की।
ये खुदको नक्सली बता रहा है और जातिव���दी
मीडिया इसे एक्टिविस्ट रही है।
��ितनी खराब टिप्पणी की है इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की ब्यूरोक्रेसी के बारे में!
ओरवेलियन डिस्टोपिया.. जानते हैं इसका मतलब क्या होता है ? ऐसा भयावह और दमनकारी समाज, जहाँ सत्ता.. लोगों की निगरानी, सूचना पर नियंत्रण, प्रचार, झूठ और डर के जरिए नागरिकों की सोच और व्यवहार को नियंत्रित करती है।
• अकेले नोएडा की DM मेधा रूपम के चक्कर में पूरे
ब्यूरोक्रेसी पर सवाल खड़ा हो गया है।
https://t.co/DrDWwM6cMn
"ऑरवेलियन डिस्टोपिया.."
उत्तर प्रदेश की हाईकोर्ट का ये शब्द सोशल मीडिया पर छाया है.. और एक बहुत बड़ी आईएएस अफसर के करियर पर कुंडली बनकर भी बैठ गया है!!
"ऑरवेलियन डिस्टोपिया.." अंग्रेजी लेखक जार्ज ऑर्वेल के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 से आया है.. जॉर्ज ने अपने उपन्यास में एक काल्पनिक देश की कहानी लिखी है जहां एक काल्पनिक सरकार है.. एक काल्पनिक समाज है.. ऐसा काल्पनिक समाज जो ऊपर से ठीक दिखता है.. व्यवस्थित.. लेकिन वहां लोगों का जीवन डर से भरा हुआ होता है.. उनक�� हर पल पर सरकार का नियंत्रण होता है.. उनकी आजादी, उनके अधिकार छीन लिए जाते हैं.. एक ऐसा समाज जहां के लोग अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते.. उनकी आवाज को दबाया जाता है.. एक ऐसा समाज जहां के लोग सरकार के पक्ष से अस्मत नहीं हो सकते.. उनकी असहमति को कुचल दिया जाता है..
हाईकोर्ट को नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन में आई दिल्ली की छात्रा आकृति चौधरी के मामले में कुछ ऐसा ही लगा.. आकृति पर एनएसए लगाकर 5 महीने तक जेल में ठूंस दिया गया था.. कोर्ट ने आकृति को जमानत देते हुए जो फैसला दिया है.. उसमें "ऑरवेलियन डिस्टोपिया" शब्द का जिक्र है..
हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश शायद ही कभी दिया हो..
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "आकृति चौधरी को जेल भेजने वाले जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को उनकी तनख्वाह से 5 लाख रूपए काटकर जुर्माना देना होगा.. ये कार्रवाई अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी.. यही नहीं, अदालत की ये टिप्पणी भी अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी..
यानि आईएएस मेधा रूपम को भविष्य में प्रमोशन के लाले पड़ जाएंगे..
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क्या SIR वोट काटने का नया हथियार बन गया है?
SIR के तीन चरणों की Draft voter lists में करीब 13.37 करोड़ नाम बाहर हैं। बिहार में 65.1 लाख, यूपी में 2.9 करोड़, महाराष्ट्र में 2.1 करोड़ और कर्नाटक में 1.08 करोड़। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हर चरण के साथ Elector–Population Ratio में गिरावट बढ़ी - 8%, 13% और फिर 17%।
2024 में करीब 98 करोड़ मतदाता थे। SIR के बाद यह संख्या करीब 88 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि voting-age population लगभग 103 करोड़ हो सकती है। यानी करीब 15 करोड़ का अंतर!
सवाल सिर्फ नाम काटने का नहीं, मताधिकार और लोकतंत्र का है। आखिर इतने बड़े पैमाने पर कौन लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो रहे हैं और क्यों? अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है तो SIR का स्वतंत्र और पारदर्शी ऑडिट कराने से डर कैसा?
लोकतंत्र में सरकारें वोट से बनती हैं - वोटर घटाकर नहीं।
सुधीर चौधरी पर 5 करोड़ की मानहानि का मुकदमा।
20 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता विजय शेरावत ने पत्रकार सुधीर चौधरी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
आरोप है कि डीडी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में स���धीर चौधरी ने शेरावत की गलत पहचान करते हुए उन्हें संसद गिराने और भारत को नेपाल बनाने जैसे नारे लगाने वाला बताया।
मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है और 5 करोड़ रुपये की मानहानि की मांग की गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में नोटिस भी जारी किया है।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम खुद एक IAS ऑफिसर हैं और नोएडा की DM की कुर्सी पर बैठी हैं।
इन्होंने एक लड़की के ऊपर NSA लगा दिया था लेकिन आरोप स��बित नहीं हो पाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरा केस झूठा करार देते हुए 5 लाख का जुर्माना ठोक दिया।
मामला था नोएडा के मजदूर आंदोलन का, जहां छात्र नेता "आकृति चौधरी" को गिरफ्तार कर उन पर NSA लगा दिया गया। पांच महीने जेल में रहीं, जबकि कोर्ट ने पाया कि जिस हिंसा के लिए उन पर आरोप लगा, वो उसे हिरासत में लेने के दो दिन बाद हुई थी।
हाईकोर्ट ने डीएम के इस आदेश को उपहास के लायक बताया और चेतावनी दी कि ऐसे अफसर��ं पर लगाम न लगी तो यूपी दमनकारी राज्य बन सकता है।
जुर्माने के साथ साथ डीएम और बाकी जिम्मेदार अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में भी नाराजगी दर्ज करने का आदेश दिया गया। इसमें "आकृति चौधरी" की क्या गलती थी, न्याय स्वरूप संबंधित प्रकरण में लिफ्ट सभी लोगों को 5 महीने जेल में रखा जाए। माफ़ी पत्र दिलवाया जाए।
🚨दरभंगा में BDO के ठिकानों पर EOU का बड़ा एक्शन! 🚨
•आय से अधिक संपत्ति के मामले में बहादुरपुर BDO आनंद कुमार विभूति के ठिकानों पर EOU की छापेमारी से हड़कंप!🔥
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💰 आय से अधिक संपत्ति का मामला
🚨 EOU की बड़ी कार्रवाई
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•आखिर सरकारी अफसर की संपत्ति में ऐसा क्या मिला कि EOU को छापेमारी करनी पड़ी?
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“इतनी फोर्�� मंगाउंगा, इतनी फोर्स मंगाउंगा. ठंडा कर दूंगा ,गोरखपुर पुलिस है हम बता दे रहा हूं”
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के छात्र 25 अगस्त से धरने पर बैठे हैं. यही पहुँच दरोगा जी र���ब झाड़ रहे हैं. छात्रों को हड़का रहे हैं.
यूपी के अधिकारियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उसके बाद पूरे प्रदेश प्रशासन को शर्म से डूब मरना चाहिए -
"अगर यूपी के तानाशाह अफसरों का 'तानाशाही' रवैया ज���री रहा तो यह प्रदेश को एक "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" (एक ऐसी जगह जहां सरकार का पूरा नियंत्रण हो और लोगों की आज़ादी न हो) में बदल सकता है। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनकी वफ़ादारी संविधान के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका यानी सरकार के प्रति। अफ़सर जनता की सेवा करने वाले सेवक होते हैं और लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है। अगर नौकरशाह और अफ़सर अपनी शपथ को नज़रअंदाज़ करते हैं और उसके उलट काम करते हैं तो लोग उन्हें "ब्रिटिश शासन की दमनकारी ��िशानी" के तौर पर देख सकते हैं, जिससे नागरिक अशांति का माहौल बन सकता है।"
हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी (24) की NSA के तहत हिरासत पर सुनवाई के दौरान यह टिप्प्णी की। आकृति को मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने नोएडा की DM मेधा रूपम के व्यवहार को शर्मनाक बताया और केस रद्द कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि मेधा रूपम व अन्य अधिकारियों की सैलरी से ��ाटकर 5 लाख रुपये आकृति चौधरी को मुआवजे के रूप में दिए जाएं। मेधा रूपम चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं।
इस समय पूरे देश के अधिकारियों में संविधान के प्रति नहीं, बल्कि एक पार्टी और सरकार के प्रति अपनी निष्ठा साबित करने के लिए होड़ मची है। नेताओं को खुश करने के लिए वे सारी हदें पार कर रहे हैं और अदालतें उनकी बेलगाम नेता भक्ति को नियंत्रित करने के लिए आदेश दे रही है, जुर्माना लगा रही है। ��त्यंत शर्मनाक!
योगी के गोरखपुर पुलिस में इ���स्पेक्टर है।
भूख हड़ताल पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के बच्चों को धमकी दे रहा है
"इतनी फोर्स मंगाउंगा, ठंडा कर दूंगा"
@gorakhpurpolice जरा एक्सप्लेन कीजिए कैसे ठंडा करेंगे?
@Cockroachisback को आना पड़ेगा या खुद एक्शन लोगे?
यह मनबढ़ कहना चाहता हैं DM के पास अपना दिमाग नहीं हैं वो खुद से जाँच नहीं करती अनपढ़ हैं उनसे कोई कही भी साइन करवा लेगा।
वो 2014 बैच की है तो उनको नहीं पता NSA का मतलब क्या होता हैं उनके एक साइन से 25 साल की लड़की 144 दिन से जेल में हैं।
उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
इस बहन की बात सुनिए 👇
ये बिल्डिंग 3-4 साल से बंद थी, इस साल से इसमें बच्चे रह रहे है ! बिना MCD को पैसे दिए कोई काम नहीं होता ,,
यानी जब दिल्ली में AAP थी MCD में तब बिल्डिंग बंद कर दी गई, लेकिन जैसे ही BJP आई खेल शुरू कर दिया !!
उत्तर प्रदेश के बरेली में 4 करोड़ रुपए से बनी पानी की टंकी नदी में समा गई!! नदी से थोड़ा दूर ही दूर टंकी बनाई गई थी, बाढ़ में वो दूरी भी खत्म हो गई।
अधिकारी मौज में ही होंगे.. ठेकेदार मौज में ही होंगे..
@kpmaurya1 जी, क्या टंकियां गिरेंगी तभी दूसरी ��नेंगी? और बनेंगी तो गिरेंगी ही ,ये मान लिया जाए?
क्योंकि देखने पर तो यही लगता है कि टंकी बनी भी नहीं और गिर गई।
और कितना गिरेंगे ये अधिकारी-ठेकेदार?
जवाबदेही, जिम्मेदारी, नियम-कानून कुछ मायने भी रखते हैं या बस लूट सको उतना लूट लो, क्योंकि कानून का डर तो जैसे है ही नहीं!!
PG माफियाओं की यह दबंगई देखिये..
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र इतने डरे हुए हैं कि अपने हॉस्टल खाली करने को मजबूर हैं।
जब बच्चे अपनी एडवांस फीस वापस मांग रहे हैं, तो ऑनर द्वारा उनको डराया-धमकाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि “मेरी जा-पहचान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से है।”
छात्रों को सुरक्षा चाहिए, धमकी नहीं।
NSUI छात्रों के साथ है और न्याय मिलने तक उनकी आवाज़ मजबूती से उठाती रहेगी।
सुनिये 👇🏻
मनुवादियों का धन्यवाद, जिन्होंने सोए हुए बहुजन समाज को जगा दिया।
अब बहुजन समाज सिर्फ आरक्षण बचाने की नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र में आरक्षण बढ़ाने और कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर न्यायपालिका में पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्च���त करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुका है।
एक ही देश... एक ही कानून... आरोप भी एक जैसे... तो फिर कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों?
15 से 20 दिनों में SC/ST Act के तहत दर्ज मामलों की जमीनी हकीकत ये है...
स्वतंत्र भारद्वाज: 14 दिन की न्यायिक हिरासत
अजीत भारती: अग्रिम जमानत याचिका खारिज
राहुल गांधी: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
आशुतोष रांका: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है 'कानून के निष्पक्ष और समान पालन' का...
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है.. क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है? क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है?
पूरा विश्लेषण ��ेखिए वीडियो में मेरे सोशल मीडिया चैनल्स पर
#SCSTएक्ट
#ajeetbarati
@ajeetbharti
@NijiSachiv
@AshutoshRanka
@CJP_for_India
@BhimArmyChief
PG खाली करने पर छात्रों का रेंट व सिक्योरिटी मनी हड़पने की साज़िश और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी के नाम की धमकियाँ!
PG माफियाओं की यह दबंगई और सत्ता की सरपरस्ती अब नहीं चलेगी- NSUI हर पीड़ित छात���र के साथ डटकर खड़ी है और उनका हक दिलाकर रहेगी।