Biharis are always at the forefront when it comes to burning Bihar for the sake of the entire country.
But when it’s time to actually stand up and do something for Bihar itself, inse kuch nhi hota.
This protest has once again proved it.
Bihar didn't vote Prashant kishor not because they didn't want to vote him or not trusted him or didn't agree with him and his vision.
People didn't vote him because they didn't see him winning this time, Jan Suraaj need to work for atleast 5yrs on ground to win people's trust.
Not any more. This is a great day for Indian cricket. And the greatest in the women's game. They have done India proud and you cannot do more than that.
An innings fit to be ranked among the very best by an Indian by @JemiRodrigues. And she will be the first to admit the support from Harmanpreet, Deepti and Richa. This is an astonishing run-chase
🚨 URGENT: My parents are stuck in the #UttarakhandFloods along with a group of 62 people, 11 drivers & 8 kitchen staff.
Last known location: Gangotri Temple, 12:30 PM, Aug 5
No contact for the last 30+ hours.
Please help with any updates or rescue.
@PushkarDhami@narendramodi
नई दिल्ली स्टेशन पर हुई भगदड़ के समाचार आए, फिर आधिकारिक रूप से कहा गया ऐसा कुछ नहीं हुआ, फिर समाचार आए कि 15 व्यक्ति, जिसमें बच्चे भी हैं, मृत पाए गए हैं।
कारण? वही पुराना वाला- प्लेटफ़ॉर्म परिवर्तन की घोषणा। छठ के समय लोग ऐसे में मरते रहे हैं। ऐसे कौन कर्मचारी हैं जो भीड़ के दिनों में प्लेटफ़ॉर्म क्या रहेगा, तय नहीं कर पाते और अंतिम समय में बताते हैं कि ट्रेन 12 की जगह किसी और प्लेटफ़ॉर्म पर आ रही है?
क्या आपने सुना है कि इनके ऊपर हत्या का केस चलता है? क्या आपने कभी भी देखा है कि आम जनता तीन दिनों तक ऐसी किसी भी दुर्घटना पर मृत्युदंड माँगती है? नहीं माँगती क्योंकि इसमें वो मजा नहीं है जो समय रैना या अलाहबादिया वाले केस में है।
यह समाचार यह बताता है कि हमारी प्राथमिकताएँ क्या हैं और हम कैसे विकृत हो चुके हैं। हमारे लिए रेलवे कर्मचारियों की हत्यारन त्रुटियाँ एक दिन का आउटरेज हैं, जबकि टिकट खरीद कर गाली सुनने जाने वालों का सर माँगना पाँच दिन से चल रहा है।
रेलवे ने ट्रेन चलाई, विशेष गाड़ियों की व्यवस्था की और फिर कर्मचारी को लगा कि प्लेटफ़ॉर्म तो सही नहीं है, बदल देते हैं। वो कमरे में बैठा माइक पर घोषणा करा देता है। क्या उसे पता नहीं कि प्रयागराज जाने को उद्यत भीड़ यह सुनेगी तो क्या होगा?
यदि रेलवे कर्मचारियों को यह बात पता नहीं है, तो उन्हें नौकरी से निकाल देना चाहिए। यदि पता है, तो उन्होंने प्लेटफ़ॉर्म बदला क्यों? भारतीय जीवन इतना सस्ता है कि कमरे में बैठ कर कुछ भी बोल दिया जाए?
@AshwiniVaishnaw जी, यह सामूहिक हत्या है और ऐसे कर्मचारियों को मृत्युदंड ही मिलना चाहिए। सदैव ही भीड़ का दोष नहीं होता। आप अपने राष्ट्र की भीड़ का व्यवहार नहीं समझ पा रहे, वह भी रेलवे की ही गलती है।
यह नरसंहार सदृश दुर्घटना है। ‘भगदड़’ वह होती है जब भीड़ जहाँ है, वहाँ किसी कारण से अराजकता फैलने से लोग भागने लगते हैं। यह वह अराजक कृत्य @RailMinIndia के कर्मचारियों द्वारा किया गया है। यदि सरकार ही भगदड़ मचाने का कार्य करे, तो वह भगदड़ नहीं, हत्याकांड ही है।
संभव है कि सुबह के आउटरेज के बाद, दोपहर तक दिल्ली के मुख्यमंत्री के नामों पर चर्चा के साथ यह समाचार लुप्त हो जाएगा। चूँकि आज यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना घटी है, तो सीएम का नाम भले ही सोमवार को आता, अब रविवार को ही आ जाएगा।
No matter how upset I may be with certain roll-backs of the current dispensation, I cannot ever imagine voting for such anti-India ideas.
This is pure evil - not funny like aaloo sona anymore.