सिर्फ़ 4 घंटों में,
व्यूज़ –– 187 मिलियन
लाइक्स –– 22.8 मिलियन
रिप्लाई –– 1.5 मिलियन (88% पॉजिटिव)
RaGa पर बने एडिट्स पोस्ट करने वाले किसी भी इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर के लिए ज़बरदस्त रीच।
बेटा ...... अब जो चपरासी आएं वो तुम्हारे लेक्चरर से भी ज्यादा टैलेंटेड आ गए।
अब पूरे स्कूल में चतुर्थ श्रेणी अधिकारी जो A to Z सहायक कर्मचारी से लेकर 10-12 तक के स्टूडेंट्स को भी पढ़ाकर स्कूलों की काया पलट का काम करेंगे।
किफायती शिक्षा को करोड़ों युवाओं तक पहुँचाने वाले खान सर ने पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आसान, समझने लायक और हर छात्र की पहुँच में ला दिया। सरल हिंदी और अपने अनोखे अंदाज़ से उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का तरीका बदल दिया। यही वजह है कि आज लाखों छात्र उन्हें सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि प्रेरणा मानते हैं।
महाराष्ट्र में अब नकली (नॉन-डेयरी) पनीर पर पूरी तरह बैन! 🚫
दूध के नाम पर मिलावट बेचने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। खाने में धोखा नहीं, अब कानून का सामना करना होगा।
ऐसे जाबाज़ और ईमानदार ऑफिसर को सलाम
राघव चड्ढ़ा पुराने रंग में
आज डॉक्टरों के "रैफरल सिस्टम" को जिस तरह उधेड़ कर रख दिया है, वह काबिले तारीफ है। ऐसा नहीं है कि हमें यह जानकारी तब मिली है, जब @raghav_chadha ने यह मुद्दा सदन में उठाया है, बल्कि हालत यह है कि इस बात को
हर कोई जानता है लेकिन सदन में ऐसे मुद्दे उठाने से अच्छे-अच्छे सांसद बचते हैं।
रेफर करने, टेस्ट के नाम पर लूटे जाने, गैर-जरूरी टेस्ट करवाने आदि न जाने कितनी सारी अनैतिक प्रैक्टिस होती हैं, जिन्हें झेलने के अलावा आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं होता। ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधि भी ज्यादातर चुप रहना ही पसंद करते हैं। ताकतवर मेडिकल लाॅबी के आगे हर कोई बेबस ही नज़र आता है। ऐसे में राघव चड्ढ़ा ने यह मुद्दा उठाकर एक तरह से साहब ही दिखाया है। अब कुछ होना भी चाहिए। सभी अपने-अपने सांसदों/विधायकों पर दबाव ही बनाएं कि इस मुद्दे पर ज्यादा से ज्यादा बोलें तो आम आदमी को कुछ राहत मिले।
एक मंत्री के इस्तीफ़ा देने से क्या फ़र्क़ पड़ेगा…??
शुरुआत में बहुत लोगों की तरह हमें भी यही लगा था
लेकिन हम ग़लत थे…
बहुत फ़र्क़ पड़ता है…
लोग आवाज़ उठाना सीखते हैं…
लोग हक़ माँगना सीखते हैं…
ये बदलाव कम नहीं है…!!!
कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश और राजस्थान का नाम विश्व मंच पर रोशन करने वाली हमारे प्रदेश की बेटी अरुंधति चौधरी के जयपुर पहुंचने पर सरकार के किसी भी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी का स्वागत करने तक नहीं पहुंचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है |
मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहता हूं कि सरकार की इस संवेदनहीनता के लिए कौन जिम्मेदार है ?
राजस्थान का नाम विश्व पटल पर रोशन करने वाला इस बेटी के लिए राजस्थान सरकार द्वारा अभी तक किसी प्रकार की आर्थिक मदद की घोषणा क्यों नहीं की गई ?
भाजपा सरकार को यह समझने की जरूरत है कि देश का मान बढ़ाने वाली बेटियां सम्मान की हकदार हैं, उपेक्षा की नहीं।
🇮🇳🥇
@RajCMO
असल ज़िंदगी का 'सिंघम' तुकाराम मुंढे!🔥
ईमानदारी, सख्त कार्रवाई और जनता के हित को सबसे ऊपर रखने वाले अधिकारियों की यही पहचान होती है।
ऐसे अफसर व्यवस्था में भरोसा जगाते हैं।
आज जयपुर के SMS अस्पताल पहुंचकर 15 दिन से अनशनरत छात्र नेता श्री शुभम रेवाड़ से मुलाकात कर कुशलक्षेम जानी।
श्री रेवाड़ ने कल से पानी भी त्याग दिया था। उनकी गिरती सेहत को देखते हुए उन्हें जल पिलवाया एवं अनशन समाप्त करने हेतु समझाइश की।
युवाओं के प्रति भाजपा सरकार का ऐसा रवैया बिल्कुल उचित नहीं है। राज्य सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द इनकी मांगों पर ध्यान देकर समाधान निकालना चाहिए।
ईशान किशन सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं हैं बल्कि वो RBI में असिस्टेंट मैनेजर भी हैं।
जब भी ईशान किशन को क्रिकेट के मैदान से छुट्टी मिलती है वो अपनी दूसरी जिम्मेदारी निभाने RBI ऑफिस पहुंच जाते हैं।
कल ईशान किशन पटना स्थित RBI कार्यालय में जब अचानक से पहुंचे तो वहां हड़कंप मच गया और सेल्फी के लिए भागादौड़ी होने लगी।
ईशान किशन को ये नौकरी 2017 में खेल कोटे के तहत उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया था उनके अलावा भी कई खिलाड़ियों को नौकरी मिली है।
लेकिन मेरा मानना है कि क्रिकेट में सबसे ज्यादा पैसा है ऐसे में ये नौकरियां उन एथलीटों को दी जानी चाहिए जो इसके असली हकदार हैं।
ये है हुसैन मंसूरी जो कई दिनों से असम में बाढ़ पीड़ितों को मदद कर रहे है।
कभी अनाज तो कभी जरूरत की चीजों से। खुद अपने हाथों से दिन रात लगे है।
ऐसे जांबाजो को सलाम🫡
CWG 2026 : गोल्ड मेडलिस्ट जैस्मिन लंबोरिया भारत पहुंचीं
◆ उन्होंने कहा, "मेरा अगला लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में भी और मेडल जीतना है"
#JasmineLamboria | Jasmine Lamboria | #CWG2026
यह IAS तुकाराम मुंडे हैं। इन्होंने लगातार प्राइवेट कैंटीन में छापे डाल रहे थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कभी सरकारी कैंटीन में छापे मारो। इन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के कैंटीन में छापे डाल कर सील कर दिया।
25 साल के IAS करियर में 21 बार ट्रांसफर किया गया है।
बहुत दुख की बात है कि हमारे देश में खेलों को लेकर इतना दोहरा मापदंड है।
साक्षी चौधरी ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है,
लेकिन अफसोस की बात यह है कि देश में ज्यादातर लोगों को इस बात का पता तक नहीं है।
आज हालत यह हो गई है कि IPL के एक मैच में अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ एक छक्का भी मार देता है तो पूरा देश उसे सिर पर उठा लेता है।
सोशल मीडिया से लेकर हर जगह सिर्फ उसी की चर्चा होने लगती है।
दूसरी तरफ, देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाली साक्षी को खुद वीडियो बनाकर लोगों को बताना पड़ रहा है कि
उन्होंने भारत के लिए गोल्ड जीता है।
एक चैंपियन खिलाड़ी के लिए इससे ज्यादा खराब बात क्या हो सकती है कि उसे अपनी मेहनत और जीत की पहचान खुद मांगनी पड़ रही है।
हमें क्रिकेट के दीवानेपन से बाहर निकलकर ऐसे असली हीरोज को पहचानना होगा
उन्हें वह सम्मान देना होगा जिसके वे हकदार हैं, वरना हम सिर्फ एक ही खेल के देश बनकर रह जाएंगे।
आपदा में सबसे बड़ी पहचान धर्म या जाति नहीं, बल्कि इंसानियत होती है।
असम बाढ़ पीड़ितों तक राहत, उम्मीद और मुस्कान पहुँचाने के लिए Global Sikhs के साथ जुड़े @RandeepHooda
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।