दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणाम पर विवेचना करते हुए कई लोग लिख रहे हैं कि विपक्षी एकता बनी होती या एनएसयूआई ने टिकट ठीक से दिया होता, तो नतीजे अलग होते.
किसी संगठन ने किसे टिकट दिया या नहीं दिया, यह उस संगठन का मसला है, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना है.
लेफ़्ट समूह या समाजवादी उम्मीदवारों के साथ एनएसयूआई के गठबंधन की बात बेमतलब है.
छात्र संघ चुनाव में वैचारिकी और विचारधारा के आधार पर गठबंधन हो सकते हैं, पर केवल जीत-हार के गणित से ऐसा नहीं होना चाहिए.
छात्र जीवन विचारों को जानने, समझने, मानने आदि का समय होता है. ऐसे चुनावों में विचारों और विचारधाराओं को टकराने देना चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं और छात्रों को अच्छी जानकारी मिले, अच्छा प्रशिक्षण मिले, वे आगे के लिए अच्छे से सोच-विचार करें.
इस अवस्था में बीसियों विचारों और समूहों को प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए. यहीं से तो आग़ाज़े-दास्ताँ होनी चाहिए.
https://t.co/c8O6lb4yWQ ये लापरवाही से टक्कर है? बाकि बामन प्रिविलेज देखो, गाड़ी का नंबर ब्लर और लड़के को मास्क पहना दिया, जबकि गुड़गांव वाले केस में जहां एक्सीडेंट था, वहां आइडेंटिटी भी बताई गई, कास्ट भी बताई, और आरोपी को नीचे बैठाकर अपमानजनक स्थिति में फोटो खींचा गया।
थाना नॉलेज पार्क(ग्रेटर नोएडा):- कार चालक द्वारा कार को तेजी व लापरवाही से चलाते हुए 04 व्यक्तियों को टक्कर मार देने के संबध मे अभियोग पंजीकृत करते हुए घटना मे प्रयुक्त कार को कब्जे पुलिस मे लेकर कार चालक आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।
#Noidapolice
ये नेशनल न्यूज में डिबेट का टॉपिक नहीं बनेगा, क्योंकि स्टूडेंट्स पर गाड़ी चढ़ाने वाला मनीष बामन है, इनको कोई नहीं बोलेगा कि जजमान गुज्जरों के पास पैसा आया तो दान बढ़ गया और ये बामन गुज्जरों से दान लेकर हवाबाज़ी करने लगा। 😃
Devdutt Sharma car owner his son Manish Sharma hit people drove rashly. From video it's a clear case of attempted murder. For some a reason they were put in“Kumeen Category”under British rule. Strict action against them. Why isn't media covering this clear attempted muder case ??
जब-जब राजस्थान में बीजेपी की सरकार आती है, तब-तब हमारे आरक्षण पर आंच क्यों आती है? और फिर हमारे समाज के कुछ नेताओं को “आरक्षण बचाने वाले वर्चस्ववादी मसीहा” बनाकर सामने क्यों लाया जाता है?
क्या पहले संकट पैदा करना, फिर आंदोलन करना और अंत में खुद को आरक्षण का रक्षक बताना यह कोई राजनीतिक रणनीति है?
बीजेपी समाज को आरक्षण के नाम पर ऐसे कथित मसीहा बनाकर आखिर कब तक गुमराह करती रहेगी?
समाज को अब सवाल पूछना होगा—आरक्षण पर संकट किसके फैसलों से आता है और उसका राजनीतिक लाभ आखिर किसे मिलता है?
@BhajanlalBjp@BJP4India@DrKirodilalBJP@ashokgehlot51@GovindDotasra@TikaRamJullyINC@RajGovOfficial
मुझे अभी भी याद है जब मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तब तुम्हे कोई बचाने नहीं आया, तब भी जाट ही थे जो बचा रहे थे, कैंप से वापस लेकर जा रहे थे, और अपनी बिरादरी में ही बुरे बन रहे थे, गालियां खा रहे थे, किसी और की तो हिम्मत भी नहीं थी। जिस अखिलेश की बात करते, वो तो सरकार होते हुए नही आगे आया।
इनमें बहुत ताकत है, जब मेवात में संघियों ने ड्रामा रचा, सरकारी दमन शुरू हुआ तब कोई मीणा या अहीर नहीं आया समर्थन में, जाटों ने रैली की थी, कि अगर नाइंसाफी की तो खैर नहीं। जबकि हमें कोई समीकरण भी नहीं बनाना था, ना ही हरियाणा में किसी सीट पर किसी जाट को जिताने के लिए वोट लेनी थी।
और वेस्ट यूपी में भाजपा ज्यादा कुछ कर नहीं पा रही उसका कारण भी किसान यूनियन और लोकदल है। भाजपा को टारगेट करो, लेकिन जो तुम्हारा साथ देता है, उनको तो छोड़ दो।
@raghu_bish9e विशेष यादव से ही पूछ ले , इतने उसके साथ यादव भी थे जितने जाट घूम रहे थे, और जाट सोशल मीडिया हैंडल देख एक बार, और कैसे करते समर्थन, इस चक्कर में तो अपना भी हरवा दिया 😃
इस दिल्ली यूनिवर्सिटी वाले चुनाव ने भविष्य में विजय के लिए आमेर विधानसभा के ताले खोल दिए mla बनने के लिए
और इस दूसरे वाले के लिए भी ताले खुले हैं बीजेपी दफ्तरों में झाड़ू पोंछा करने के लिए 😂😂
@mandeeppunia1 वामी लोगों के बीच पॉलिटिकल करेक्ट होने की कोशिश करता एक वामी जाट, एनएसयूआई के हारने से ज्यादा दुःख कन्हैया कुमार को टारगेट पर लेने का हो रहा है। जीत जाता तो कन्हैया कुमार का करिश्मा बताना पड़ता। 😃
संघी किरोड़ी लाल की अपील से 3-4 हजार मीणा वोट टूट गये और नाम जाटों का ले रहे कि जाटों ने हरवा दिये। जाट गुज्जर जितने कांग्रेस के साथ थे, उन्होंने वोट दिया, जितने abvp या न्यूट्रल आदमी उनकी वोट क्या बोल कर लेते, जब मीणा ही बोल रहे थे जाट गुज्जर वर्चस्व खत्म करना DU से। 😃
इस अपील से 25-30% मीणा भी एबीवीपी को वोट कर गये, संघी बाबा की अपील थी तो मानना तो पड़ता ही, हार की असली वजह तो ये ही, संघी बाबा कितना भी कमजोर हो, 1000-2000 वोट इधर से उधर करने की ताकत तो रखता ही है। 🙂
दिल्ली विश्वविद्यालय के कल होने वाले छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करके विजयी बनाये
अध्यक्ष - यश डबास 7️⃣
उपाध्यक्ष - इशू मौर्या 3️⃣
सचिव - रिया छाबड़ी 3️⃣
संयुक्त सचिव- लक्ष्यराज 3️⃣
#ABVP#DUSUElections@ABVPVoice