@HarteerathSingh अबे चूतिये अपराधियों को घुसाते ही क्यों हो गुरुद्वारे में। गुरुद्वारे में जब अपराधी घुसते है तो वो अपवित्र हो जाता है, अपराधी और खालिस्तानियों को घुसने से वो पवित्र हो जाता है।
वह रे नफरतियों
भाजपा का कहना है कि आरक्षण की सीमा कोई ऐसी सीमा नहीं कि उसे तोड़ा न जा सके। मराठा समाज को तीन बार आरक्षण देने और तीनों बार कोर्ट से रोकने के बाद पुनः भाजपा कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%), भाजपा सरकार हर राज्य में 50% से आगे जा चुकी है और हर कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
अतः, जब आपको चटआ गिरोह कहे कि राहुल गाँधी आरक्षण बढ़ा देगा, उसके मुँह पर तथ्य मारिए। भाजपा शीघ्र ही निजी क्षेत्र के चतुर्थ श्रेणी से प्राइवेट में आरक्षण आरंभ करेगी। चटुए उसे भी मास्टरस्ट्रोक कहेंगे।
जैन हैं। बेटी के साथ किसी ने अभद्रता की, वो हॉस्पिटल में है। थाने में केस लिखवाया। कार्रवाई नहीं हुई।
फिर जिस पर केस का आवेदन किया, उसने मोदी एक्ट लगवा दिया है। अब वीडियो बना रहे हैं।
आज एक समाचार देखा कि इंडिगो के पायलट पर ट्रेनी पायलट ने 'मोदी एक्ट' लगवा दिया क्योंकि उसे 'नॉट फिट टू फ्लाई' कहा गया था। ये तो चलिए बाहर आ रहा है हर दिन, पर एक ज्वालामुखी जो मोदी और भाजपा ने सरकारी कार्यालयों में बो रखा है, उसकी स्थिति और विकट है।
मोदी जी के प्रियजन ना काम करते हैं, हल्ला खूब मचाते हैं, समय से आने-जाने पर भी बहुत अधिक रोक आदि नहीं है, प्रमोशन भी समय से पहले इनका ही हों है, तो उनको बस एक काम ही बचता है: मोदी एक्ट लगा कर अपने विरोधियों (जिसे वो ऐसा मानते हैं) को नौकरी से निकलवाना या सस्पेंड करवा कर प्रताड़ित करना।
जब इंडिगो जैसी घटनाएँ होती हैं, तो स्पष्ट संदेश यह जाता है कि मोदी एक्ट लाभार्थियों को नौकरी पर रखने से पहले १० बार सोचो कि कार्यालय में ये क्या-क्या करेंगे। पौने तीन लाख केस पेंडिंग हैं इस एक्ट में। हज़ारों करोड़ कंपनसेशन दिया जा चुका है।
मोदी अपनी बंसी बजा रहा है:
मोदीया की बंशी पुकारे दलित नाम,
पीड़ित का भी काम करूँ, शोषित का भी काम!
मोदीया की बंशी को बजने से काम
वंचित का भी नाम मैं लूँ, दलित का भी नाम!
बताया जा रहा है कि साहिल इतना इंटेलिजेंट था कि उसकी AIR Rank 614 थी।
मतलब, झूठ भी इस तरह बोला जाएगा कि आपको सच लगे।
साहिल की 614 रैंक उसकी अपनी SC कैटेगरी में थी। यानी उसकी Overall Rank कम से कम 20,000 से ऊपर रही होगी।
20,000 के आसपास की रैंक पर साहिल को जो कोर्स और IIT मिला, वह General Category के बच्चे को 2,000 रैंक पर भी नहीं मिलता।
यहाँ यह भी बता दूँ कि साहिल के पिता बैंक में अच्छे पद पर हैं और उसकी माँ शिक्षिका हैं और वह ipjone से ChatGPT use करता था ..
यानी, आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिहाज से वह कहीं से भी "दलित" नहीं था..
बस, इसी का नाम आरक्षण है।
उत्तरप्रदेश के ललितपुर का सिलावन गांव। शाम का वक्त। करीब 44-45 साल का एक शख्स लंगड़ाते हुए चला जा रहा था। वो इधर-उधर देख रहा था, जैसे किसी को पहचानने को कोशिश कर रहा हो।
तभी उसे साइकिल से आता हुआ एक शख्स दिखा। उसने उसे रोककर कहा- ‘मेरा नाम विष्णु तिवारी है। क्या मुझे जानते हैं? मेरे घर का पता बता दो।’ उस शख्स ने हैरानी भरी नजरों से देखा और बोला- ‘भइया पागल हो क्या, तुम्हारा घर है और, मुझसे पूछ रहे हो।’
विष्णु ने एक के बाद एक, कई लोगों से अपने घर का पता पूछा, लेकिन सभी ने उन्हें पागल कहा। अब तक अंधेरा हो गया था। विष्णु थककर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। तभी एक और शख्स वहां से गुजरा और विष्णु को देखते ही ठिठक गया। बोला- तुम विष्णु तिवारी हो न? पहचाना मुझे? तुम्हारा दोस्त सुरेश।
विष्णु फौरन बोल पड़े- ‘मेरे भाई तुमने तो मुझे पहचान लिया’ दोस्त बोला-'तुम तो जेल में थे ना।’ विष्णु ने जवाब दिया- ‘झूठा मुकदमा था। 20 साल बाद हाईकोर्ट ने रिहा कर दिया। मेरे घर का पता तुम्हें याद हो तो घर पहुंचा दो।’ दोस्त ने कहा- ‘तुम्हारा घर तो रहने लायक बचा नहीं, चलकर देख लो।’
विष्णु, दोस्त के साथ अपने घर की ओर चल दिए। कुछ कदम चलने के बाद बोले- ‘घर में तो मेरी राह देखने वाला कोई जिंदा ही नहीं बचा।’ दोस्त बोला- ‘चाचा जिंदा हैं। उन्हीं के घर चले जाना।’
कुछ ही देर में विष्णु अपने घर पहुंचे। दोस्त ने मोबाइल का टॉर्च जलाया तो देखा टूटे दरवाजे में जंग लगा ताला लटक रहा था। दीवारें भी गिर चुकी थीं। विष्णु ने पास ही पड़ा हुआ एक पत्थर उठाया और ताला तोड़ दिया।
अंदर जाकर देखा तो कचरे का ढेर लगा था। उसी ढेर में मां-पिताजी के वोटर आईडी मिले। कहीं दीवार गिर गई, तो कहीं मोटी-मोटी दरारें। विष्णु जमीन पर बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे। दोस्त ने उन्हें संभाला और चाचा के घर ले गए।
चाचा को देखते ही विष्णु बोले-‘सब खत्म हो गया चाचा। न घर बचा, न मां-बाप।’ चाचा ने पूछा जेल से कैसे छूटे। विष्णु बोले- ‘रेप का केस भी झूठा था और SC-ST का मुकदमा भी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया।'