‘भारत जोड़ो यात्रा’ की वर्षगांठ पर “मेरा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय @RahulGandhi जी, को हृदय से आभार..राहुल जी आपकी हर यात्रा में मैं और मेरी टीम समर्पित है, देश में नफ़रत को ख़त्म करके मोहब्बत की दुकान खोलने का लक्ष्य ही हम सभी का ध्येय है।
आपने आज के दिन 7 सितम्बर 2022 को कन्याकुमारी से कश्मीर के लिये ऐतिहासिक “भारत जोड़ो यात्रा” की शुरुआत की थी..इस यात्रा ��े दौरान 4000 KM की पदयात्रा की थीं।
भारत जोड़ों एक यात्रा जिसने मेरे जैसे लाखों करोड़ों देशवासियों के जीवन की धारा बदल दी, आपने भारत को अपने पैरों से चल कर देखना और हर कदम पर बदलते भारत के लोगों को उनकी सांस्कृतिक विरासत और संस्कृति को जानने समझने की यात्रा रही है, दक्षिण के समंदर सा हिलोरे मारता लोगों के दिलों में प्यार , हरे भरे जंगल और खेतों सी समृद्ध संस्कृति, रंगीन उत्सव जैसी ज़िन्दगी, देशभर के किसान और मज़दूर को रेतीली आँधी सा संघर्ष, ऊँचे बर्फीले पहाड़ों सी शांति और धैर्य।
इस यात्रा के हर कदम ने जीवन को सिखाया।
राहुल जी मेरी भी भूमि अधिग्रहण क़ानून-2013 को वापस से बहाल करने के मुद्दे पर मेरे किसान साथियों के साथ इस यात्रा के दौरान 15 दिसंबर 2022 को दौसा लालसोट में आपसे मुलाक़ात हुई जो मेरे जीवन की अस्मरणीय यादें रहेगी, मुलाक़ात के दौरान आपने जिस सहजता से हमसे मिले और हमारे साथ बैठकर किसानों की समस्याओं को बड़ी गहराई से सुना, क्या समाधान हो सकता उस पर किसानों की राय ली, हमारी मुलाक़ात को आपने याद रखते हुए दो साल बाद 1 जुलाई 2024 को लोकसभा में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा उठाया जो मैंने भारत जोड़ों यात्रा के दौरान आपके संज्ञान में लाया था।
राहुल जी आपने मुझे किसानों के मुद्दों पर और मज़बूती से लड़ने की प्रेरणा दी है और मुझे भी देश के किसानों को उनके मुद्दे पर लड़ने वाला मज़बूत सारथी मिल गया।
‘भारत जोड़ों यात्रा’ में मैं प्रदेश यात्री बतौर शामिल रहा उनके साथ चलना यह यात्रा मुझे जीवन भर याद जारी रहेगी, यह मेरे जीवन की नई उम्मीद और आशा लेकर आयी थी।
“नफ़रत छोड़ो..भारत जोड़ों” 🇮🇳
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भाजपा और आरएसएस की तर्ज पर @INCOBCDept भी फर्जी किसान नेताओं पेश करने से क्या कांग्रेस पार्टी मजबूत हो सकती है?
ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष @DrJaihind जी क्या आप बता सकते ��पके इस संवाद कार्यक्रम में कितने किसान नेता है जिन्होंने कभी धरातल पर आंदोलन किया है या किसानों के किसी भी मुद्दे पर देश के किसी प्रदेश या जिले में सड़कों पर उतरे है? और आपके कार्यक्रम में मौजूद कितने ऐसे किसान नेता हैं जिनके खिलाफ उनके जीवन में किसान आंदोलन करते वक्त कितने मुकदमे दर्ज हुऐ है? जरा जानकारी के लिए बता दीजिए..
जयहिंद सर ऐसे फर्जी किसान नेता व्यक्तिगत स्वार्थ, राजनीति या प्रचा�� के लिए किसानों के नाम का गलत इस्तेमाल करते हैं।
और ऐसे लोग किसानों के मुद्दों का उपयोग राजनीतिक लाभ, पद पाने या अपनी चमक बढ़ाने के लिए करते हैं।
जयहिंद सर जब ये फर्जी नेता किसानों के हित की बजाय व्यक्तिगत सौदेबाजी करते हैं, तो असली किसान संगठन इनसे दूरी बना लेते हैं।असली किसान आंदोलन के नेताओं के चेहरे जाने पहचाने होते है..
किसानों के हक और न्याय के लिए विरोध के अपने संवैधानिक अधिकार ( Right to protest ) की रक्षा के लिए ��ेशभर में सैकड़ों किसान नेता हैं जो बेखौफ ढंग से और बलिदानी भावना के साथ सड़कों पर लड़ रहे है और भाजपा और आरएसएस जैसी फ़ासिस्ट नीति उनके दमन से पस्त और सहमे देशवासियों को लोकतन्त्र के लिए लड़ने का नया हौसला दे रहे है..जीत की नई उम्मीद पैदा कर रहे है।
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ओबीसी आयोग द्वारा प्रस्तुत गोपनीय रिपोर्ट को भाजपा सरकार द्वारा मीडिया में लीक करने के बाद
राजस्थान में OBC वर्ग को लेकर आज अलग-अलग तरह के आंकड़े मीडिया और सोशल मीडिया में बताए जा रहे हैं..यदि ये आँकड़े ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में सत्य है तो ये आँकड़े झूठे, फर्जी और भ्रामक है.. और झुठ का पुलिंदा है..
मीडिया में तथाकथित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट बाहर आई है..मैंने MBC परिवारों के 200 लोगों से जानकारी प्राप्त की आपके पास या आपके गांव में ओबीसी आयोग से कोई प्रतिनिधि लेने आया था क्या ?
200 लोगों में से एक भी व्यक्ति ने ओबीसी आयोग के किसी प्रतिनिधि ने उनसे संपर्क किया हो उसकी अनभिज्ञता जताई है..
जबकि ओबीसी आयोग ने बताया कि ओबीसी के 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया है। ओबीसी आयोग अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी जी कह रहे “हमने बंद कमरों ��ें बैठकर रिपोर्ट तैयार नहीं की। जनता के बीच गए हैं। सर्वे करके डेटा लिया है।”
मैं दावे से कह सकता हूँ ओबीसी आयोग ने जो रिपोर्ट बनाई है वो झूठी,फर्जी और भ्रामक है और मनगढ़ंत आँकड़े बनाये गये है।
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जयपुर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण महापड़ाव पर बैठे घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु (डीएनटी) समुदाय के लोगों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने और पत्थरबाजी की घटना अत्यंत निंदनीय है��
यह हमारे लोकतंत्र, हमारी सामाजिक चेतना और राज्य की संवैधानिक नैतिकता की परीक्षा है। जो समुदाय सदि��ों से हाशिये पर धकेले गए, जिन्हें कभी औपनिवेशिक शासन ने अपराधी जातियों के कलंक से चिन्हित किया और आज़ादी के बाद भी जिनके माथे से वह अपमान पूरी तरह नहीं धुला, वे यदि अपने अधिकारों के लिए राजधानी में आवाज़ उठाते हैं तो राज्य का पहला कर्तव्य उन्हें सुनना होना चाहिए, उन्हें पीटना नहीं।समाज के कमजोर, वंचित और उपेक्षित वर्गों पर दमनात्मक कार्रवाई करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। भाजपा स��कार के पास हर समस्या का समाधान केवल लाठी, आंसू गैस और दमन ही रह गया है। भाजपा सरकार संवाद और समाधान में पूरी तरह विफल हो चुकी है।पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन कानून-व्यवस्था का अर्थ नागरिकों की आवाज़ को कुचलना नहीं हो सकता। पत्थरबाज़ी यदि हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर पूरे समुदाय की पीड़ा को अपराध की तरह देखना खतरनाक है।जनता और सरकार के बीच संवाद का रास्ता इतना बंद हो जाए कि पुलिस बैरिकेड, डंडा और आँसू गैस ही भाषा बन जाएं।
घुमंतू और अर्धघुमंतू समाज की 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कोई अचानक उठी हुई राजनीतिक सनक नहीं है। यह उन समुदायों की ऐतिहासिक उपेक्षा, सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक व शैक्षिक पिछड़ेपन से निकली हुई मांग है, जिनके पास स्थायी बसावट नहीं, ज़मीन नहीं, पहचान के का��ज़ नहीं, शिक्षा-संरचना तक आसान पहुँच नहीं और सरकारी योजनाओं तक पहुँचने का व्यवस्थित रास्ता भी नहीं। ऐसे समाज जब महापंचायत बुलाते हैं, तो वह केवल भीड़ नहीं होती; वह इतिहास के अंधेरे कोनों से उठी हुई सामूहिक पुकार होती है।
घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु (डीएनटी) समुदाय के लोगों पर सरकार द्वारा की गई इस दमनात्मक कार्रवाई की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और सरकार से मांग करता हूँ कि डीएनटी समुदाय ���े प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल वार्ता की जाए। @RajCMO
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“ख्यालों के रास्तों से उभरती है दुनिया, तुम देखते हो जैसे ठीक वैसी है दुनिया!”
डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन के संस्थापक श्री वीरेंद्र चौधरी जी द्वारा संचालित जनपक्ष लेकर आ रहा है, जनपक्ष सिटिंग्स! जिसमें हम बात करेंगे अलग अलग उम्र, सोच और अनुभव के पड़ाव से निकले हुए साथियों से। जनपक्ष सिटिंग्स का उद्देश्य है समाज में व्याप्त अलग अलग विचारों को एक साझा मंच पर लाना। इस ही कड़ी में जनपक्ष सिटिंग्स का पहला एपिसोड आगामी सोमवार को रिलीज़ किया जाएगा। इस पहले एपिसोड में हम बात देश की युवा शक्ति यानी Gen-Z के दृष्टिकोण से वर्तमान समय को समझने और जानने की कोशिश करेंगे। इस पॉडकास्ट में जनपक्ष के फाउंडर श्री वीरेंद्र चौधरी जी बात करेंगे विनम्र कुलवाल, आर्यन शर्मा और यति नंदवाना से!
पॉडकास्ट देखने के लिए जनपक्�� के यूट्यूब चैनल को अभी सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन पर क्लिक करें���
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कॉकरोच को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मिली। हिरासत में नहीं लिए जाएंगे कॉकरोच..है ना ग़ज़ब का खेल..
किसान भाइयों आपको याद है या भूल गये..मोदी सरकार द्वारा किसान विरोधी 3 काले कृषि क़ानून पारित करने पर देशभर के किसानों ने इन क़ानूनों को रद्द करने एवं MSP पर गारंटी कानून बनाने की मांग पर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगी गईं थी..मोदी सरकार ने अनुमति देने की बजाय कैसे किसानों के साथ बर्बरतापूर्ण और क्रूरता की हदें पार की थी….किसानों को दिल्ली में घुसने नहीं दिया.. किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र बनाने ���े लिए अर्धसैनिक बल की कंपनियों को तैनात किया..किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर कैसे किलेबंदी की थी..पुलिस और सुरक्षा बलों ने सिंघु, टिकरी ग़ाज़ीपुर,शाहजहांपुर बॉर्डर्स को सील करने के लिए कंक्रीट के भारी बैरिकेड्स, कंटीले तार, और सड़कों पर लोहे की कीलें (Spikes) लगाई हैं..
भारी बैरिकेडिंग और कंक्रीट की दीवारें सीमेंट के बड़े-बड़े ब्लॉक कंटेनर और बैरिकेड्स लगाए गए हैं…
नुकीली कीलें और कांटेदार तार रोकने के लिए सड़कों पर लोहे की कीलें और कंटीले तार (Concertina Wire) बिछाए गए..
दिल्ली को आने वाली सभी सड़कों और रास्तों को गहरा खोद दिया गया था..
13 महीनों तक मोदी सरकार ने दिल्ली और आसपास के राज्यों (पंजाब,हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) के बीच आवागमन प्रभावित बाधित किया गया।
किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र बनाने के मकसद से आंदोलनकारियों पर सिर पर निशाना साधते हुए गोली मारी गई..सैकड़ों किसानों को घायल कर दिया..
13 महीने और उसके बाद MSP पर गारंटी कानून की मांग पर 750 से अधिक किसानों को शहीद कर दिया गया था..
…..पर आज सीधे एयरपोर्ट पर लैंड किए व्यक्ति को प्रदर्शन की इजाजत मिल गई जिसका एक सहयोगी कल इंडिया को नेपाल बनाने की बात कर रहा था।बड़ा सौहार्दपूर्ण माहौल है? फिक्स गेम है क्या?
किसान जातियों को समान विचारधारा के वंचित समुदायों के साथ मिलकर इस सिस्टेमिक ऑर्गनाइज्ड लूट से मुक्ति के लिए एकजुट होना पड़ेगा।
वरना ये ताकते धर्म ,जाति और भाषा के नाम से लूटती रहेगी..
हम सब हाशिये पर चले जाएँगे।
किसान क़ौम को अपने हक़ और अधिकारों सड़कों पर संघर्ष नहीं करना पड़ेगा..अंत में स��र
यहीं है इस सत्ता के बवंडर को समझने के लिए पहले अपने उसी नेता चयन करे जो आपके हक़ और अधिकारों की सोच रखता हो फिर उसी को सत्ता दिलवाने में एकजुट होकर संघर्ष करना पड़ेगा।
पूर्वी राजस्थान में फिर ना घुलें नफ़रत का ज़हर मेरा यह प्रयास हमेशा रहेगा..
मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं सोशल मीडिया के माध्यम से गुर्जर-मीणा समाज के युवाओं द्वारा एक दुसरे समाज को नीचा दिखाने, अभद्र टिप्पणी कर जातिये नफरत फैलाने का काम कर रहें है..मेरी इन रील बाज युवाओं से अपील है इस पर लगाम लगायें अन्यथा भयानक दुष्परिणाम हो सकते हैं।
किसानों की लड़ाई पानी के लिए सरकार होनी चाहिये और हम मिलकर लड़कर एक नहीं कई बांध और बनवा सकते है बशर्ते एक साथ रहे तो..मेरी फिर से अपील है किसान क़ौम गुर्जर-मीणा भाई पानी के नाम पर आपस में ��ा लड़ें.. नेताओं ��े बहकावे ना आए..पूर्वी राजस्थान में गुर्जर-मीणा समुदाय सदियों से एक साथ रहते आए है..
हमारा भाईचारा मजबूत होगा तभी हम सभी क्षेत्रों में तरक़्क़ी कर सकते है।
मैंने खुली आँखों से देखा है कैसे गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष-2007 से 2013 के बीच गुर्जर-मीणा समाज में कड़वाहट पैदा हुई थी इस कड़वाहट को दूर करने और वापस से हमारा भाईचारा मजबूत करने में हमें 6 साल का लंबा समय लग गया था।
मेरी सभी राजनीतिक ��ार्टियों के नेताओं कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील है ‘पांचना और डूँगरी बांध’ के मुद्दे को सुलझाने के लिए आगे आये।
मेरी सभी नेताओं से गुज़ारिश हैं।👇
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@AapkaMurarilal
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मीडिया बंधुओं से आग्रह है आप नफ़रत फैलाने वाले नेताओं के बयान��ं को प्रसारित करने में कंजूसी रखें।
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किसान क़ौम गुर्जर-मीणा समुदाय से मेरी विनम्र अपील..अनुरोध॥आग्रह ॥
किसानों की लड़ाई पानी के लिए सरकार होनी च���हिये लेकिन किसान क़ौम गुर्जर-मीणा लड़ आपस में रहे है..पूर्वी राजस्थान में गुर्जर-मीणा समुदाय सदियों से एक साथ रहते आए थे पिछले 25-30 सालों में किसी न किसी बहाने आपस इन्हें लड़ा दिए गए।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष-2007 से 2013 के बीच गुर्जर-मीणा समुदाय में सामाजिक वैमनस्यता और जातिय कटुता आयी थी उसे हमने मिलकर आपसी समझ से दूर किया था।आपसी भाईचारे को प्रगाढ़ करने में हमें 6 साल लग गये थे।
पूर्वी राजस्थान में एक बार फिर से नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए गुर्जर-मीणा बाहुल्य इलाक़ों में ऐसा माहौल बना दिया है ‘पानी�� के नाम पर एक बार फिर से दोनों समाजों को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है।
मैं किसान क़ौम गुर्जर-मीणा समुदाय से विनम्र अपील करता हूं..आप आपसी भाईचारे से दोनों समाज एक जाज़म पर बैठकर ‘पाँचना बांध एवं डूँगरी बांध’ का हल निकालें और शांति बनाये रखे।
हमें आपस में लड़ने की बजाय सरकार से लड़ें। नेताओं के बहकावे में न आए।
मैं प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर शीघ्र हस्तक्षेप करने मांग करता हूँ सरकार को द���नों समुदाय के नेताओं से वार्ता कर आपसी सहमति समन्वय का प्रयास कर पानी का हक़ सभी किसानों को समान रूप से मिलना चाहिये ऐसा हल निकाला जाए जिससे किसानों में आपसी सौहार्द भाईचारा हमेशा-हमेशा के लिए क़ायम रहे।
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#गुर्जरात्रा की शौर्य परम्परा ने देश के इतिहास को समृद्ध किया है..ब्रिटिश हुकूमत के ‘पॉलिटिकल एजेंट’ तथाकथित इतिहास लेखक कर्नल जेम्स टॉड द्��ारा फ़र्ज़ी नामकरण ‘राजपूताना’ नहीं..
‘गुर्जरात्रा’ यहां की रंग बिरंगी संस्कृति,वास्तु वैभव देश की सांस्कृतिक विरासत को गौरवशाली बनाते हैं..
शौर्य,त्याग,वीरता एवं बलिदान की पावन धरा #गुर्जरात्रा से बना राजस्थान के स्थापना दिवस के अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को मेरी और से हार्दिक शुभकामनाएँ।
“जय जय गुर्जरात्रा”
“जय राजस्थान”
देशभर के सभी किसान भाइयों को आज दिल्ली पर #फ़तह_दिवस की हार्दिक बधाई..
4 साल पूर्व आज के दिन..भाजपा और RSS का टूट था अभिमान, जीता था मेरे देश का किसान..
आज 4 साल पूर्व की जीत किसान शहीदों को समर्पित हैं।
मोदी जी के माफ़ी का दिन..
19.11.2021 किसानों का ऐतिहासिक दिन..
आज का दिन मेरे लिए यादगार का दिन हैं..आज के दिन किसानों के सामने मोदी ने घुटने टिकाये थे।किसान क़ौम का 13 महिने चले आंदोलन में दिल्ली फ़तह की हार्दिक बधाई..दुनिया झुकती है झुकानेवाला चाहिये..
याद रहे विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह ने दिखा दिया..पूँजीपरस्त सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी,खालिस्तानी,आढ़तियों,मुट्ठीभर लोग,देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया.!
देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि तानाशाही से..
बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।
‘जय किसान’
#किसान_मजदूर_एकता_जिंदाबाद✊
@RahulGandhi
कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने पेश किया दावा
कांग्रेस पार्टी के दौसा जिलाध्यक्ष का दावा पेश किया, दौसा ऑब्जर्वर अनिल भारद्वाज को आवेदन किया प्रस्तुत...
#Congress#RajasthanWithFirstIndia@INCRajasthan
कल सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा विशेष पिछड़ा वर्ग [SBC] आरक्षण विधेयक -2015 को रद्द किये जाने के खिलाफ दायर SLP पर सुनवाई हुई..राजस्थान सरकार के अधिवक्ता ए. ए़. जी ने पूर्व की वसुंधरा सरकार द्वारा दायर SLP को वापस लेने का तर्क दिया और कहां राजस्थान विधानसभा ने 11 फ़रवरी 2019 को MBC का नया विधेयक पारित कर दिया इसलिए अब SBC आरक्षण विधेयक -2015 निष्प्रभावी हो गया इसलिए SLP निष्फल है इसे ��ाजस्थान सरकार वापस लेने का निर्णय लेती है..ए. ए़ जी के तर्क को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
15 अक्टूबर 2015 से 9 दिसंबर 2016 की अवधि में चयनित 1252 कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द होने का खतरा पैदा हुआ।
राजस्थान हाईकोर्ट में समता आंदोलन समिति ने SBC आरक्षण विधेयक 2015 द्दारा 5% आरक्षण 50% सीमा से अधिक आरक्षण देने पर चुनौती दी गई थी..जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीष भंडारी द्वारा 9 दिसंबर 2016 को SBC आरक्षण विधे���क 2015 को रद्द कर दिया था..राजस्थान हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ गुर्जर समाज के दबाव में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में वर्ष-2017 SLP दायर की गई थी..SBC आरक्षण से चयनित 1252 अभ्यर्थियों को SLP के अधीन ज़ीरो मेरिट पर नियुक्ति दी गई थी..
कल सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार द्वारा दायर SLP पर सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता अधिवक्ता ने तर्क दिया कि ये मामला निष्फल है और उक्त आशय का एक आवेदन दायर किया जाएगा। अपेक्षित आवेदन दायर करने के लिए, प्रार्थना के अनुसार, तीन सप्ताह का समय प्रदान किया जाता है।
प्रतिवादी समता आंदोलन समिति को उक्त आवेदन पर प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाता है।
इस मामले को 19.11.2025 को सूचीबद्ध किया गया है।
SLP वापस लेने के दुष्परिणाम ;
1.यदि राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर SLP वापस लेती है तो राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 9 दिसंबर 2016 फ़ैसले से सुप्रीम कोर्ट का स्टे हट जाएगा और 50% से अधिक आरक्षण को रद्द करने का फ़ैसला माना जाएगा जिसका प्रभाव 5% SBC आरक्षण से चयनित 1252 अभ्यर��थियों पर पड़ेगा जो अब सरकारी नौकरी कर रहे हैं उन पर तुरंत लागू होगा।
2. 50% सीमा से अधिक 5% SBC को आरक्षण देने का विधेयक रद्द होने से MBC आरक्षण विधेयक 2019 पर तलवार स्थाई रूप से लटक जायेगी।
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्दारा गुर्जर सहित पाँच जातियों को 11 फ़रवरी 2019 को 5 फ़ीसदी MBC आरक्षण विधेयक विधानसभा से पारित किया था जिसके तहत 13 फ़रवरी 2019 को राजस्थान सरकार ने गुर्जर सहित पाँच जातियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5% आरक्षण देने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका DBCWP NO. 4565 of 2019 अरविंद शर्मा ने लगाकर MBC का 5% आरक्षण 50% सीमा से अधिक आरक्षण देने पर चुनौती दी गईं।
SLP व���पस लेने पर इसका असर उक्त याचिका पर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार द्दारा पिछले 7 साल से संविधान की नवीं अनुसूची में MBC विधेयक को शामिल नहीं करने बाद
आख़िरकार 5 फ़ीसदी MBC आरक्षण विधेयक रद्द होने और पिछले 7 साल में MBC आरक्षण से मिली नियुक्तियों पर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तलवार लटका ही दी।
संविधान की नवीं अनुसूची की माँग गुर्जर समाज पिछले 7 साल से कर रहा है और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को के���्द्र सरकार से संविधान की नवीं अनुसूची सूची में शामिल करा कर इस पांच फीसदी आरक्षण को सुरक्षा चक्र प्रदान करे अनुरोध करता आ रहा है किंतु दुर्भाग्य है कि हमारे युवाओं की बड़ी शहादत और देश के बड़े आंदोलनकारी क़ौम को भाजपा सरकार ने वोट बैंक समझा।
मैं भाजपा सरकार को च���तावनी देता हूँ भविष्य में अगर गुर्जर आरक्षण पर आंच आती है और बच्चों का भविष्य ख़राब होता है तो गुर्जर समाज को सड़कों पर आने में देर नहीं लगायेगा..हम फिर से वही आंदोलन करना आता है।
आंदोलन की धार को बोथरा नहीं होने देंगे..सुप्रीम कोर्ट में MBC पक्ष रखा जाये या नहीं इस संबंध राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की जल्द बैठक कर MBC की सभी जातियों के प्रतिनिधियों को अवगत कराया जायेगा���
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ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों के सामने आज भी कई बड़ी चुनौतियाँ है, मोबाइल जर्नलिज्म के पत्रकारों के लिए काम करना आसान नहीं है, मोबाइल जर्नलिज्म के पत्रकारों को कानूनी जानकारी होना भी बेहद जरूरी है, युवा पत्रकारों में जोश की कमी नहीं है, लेकिन युवाओं को सही गलत का ज्���ान होना चाहिए।
- श्री वीरेंद्र चौधरी संस्थापक, डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन
@virender_RJ21 #जनपक्ष #janpaksh25 #mobilejournlism
राजस्थान के हर क्षेत्र से पधारे मोबाइल पत्रकारों के autographs के साथ प्रथम सत्र का प्रारंभ।
• चर्चा सत्र - हम भारत के लोग
- नाज़नी रिज़वी
- प्रदीप सिंह बीदावत @thinQ360
- विनय सुलतान
#janpaksh25#mobilejournlism
जाट समाज वैर भुसावर, भरतपुर द्वारा आयोजित
नेह मिलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल होकर समाजबंधुओं के साथ समय बिताने और प्रतिभाओं को सम्मानित होते देखना गौरवपूर्ण रहा।
ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारा, एकता और नई ऊर्जा का संचार होता है।
जब संविधान सभा में प्रेस की स्वतंत्रता पर बात हुई तब स���विधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी सहित सम्पूर्ण सभा का क्या भाव था… सुनिए विनय सुल्तान की जुबानी! #janpaksh25