નાના છોકરાને રમકડું લેવું છે.
બાપા ના પાડે..
છોકરું રિસાઈ..
જમે નહીં..
બાપા મારે..
છોકરું માને નહીં..
છેલ્લે બાપા રમકડું લઈ દે..
મોરલ ઓફ ધ સ્ટોરી - છોકરાને લાગે કે હવે કઈ પણ જોતું હોય રિસાવું તો પડશે જ.
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પણ ઈ છોકરાને ખબર નો હોય તો જાણ સારું -
એક વાર લઇ દેતા... બે વાર લઇ દેતા... ત્રીજી વાર તો પછી બાપા'ય પટ્ટો લેતા....
@i_m_prapti ચુંટણીના પરીણામ પછી વિપક્ષ જે રીતે રોવે, એવો જ વારો ભક્તો નો આવ્યો. ભાજપ ભક્તો અને નેતાઓનો અંહકાર રાવણ થી પણ વધી ગયો હતો. હજુ પણ સમય છે સુધરી જાવ.
शायद जे. पी. नड्डा जी @JPNadda को यह ध्यान में न हो कि गुजरात में पिछले 30 वर्षों से और केंद्र में 2014 से भाजपा के 'डबल इंजन' शासन के दौरान युवाओं और परीक्षाओं की क्या स्थिति रही है।
राज्यसभा प्रतिनिधित्व: श्री जगत प्रकाश नड्डा (केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री) गुजरात राज्य से ही राज्यसभा सांसद के रूप में निर्विरोध चुने गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात से हैं और गृह मंत्री (अमित शाह) भी गुजराती हैं।
गुजरात में केवल 2014 से 2024 के बीच ही 34 से अधिक पेपर लीक और धांधली के मामले सामने आए हैं:
व्यापक असर: प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कूल बोर्ड परीक्षाओं और विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के पर्चे लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं।👇🏻
📌इतने बड़े घोटालों के बावजूद मुख्य आरोपियों और मास्टरमाइंड्स पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मुख्य आरोपी आज भी सख्त सजा से बचे हुए हैं।
अपराधियों और बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण और पद दिये जाते है।
गुजरात में शिक्षा, परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली एवं पेपर लीक का विस्तृत ब्योरा👇🏻
गुजरात में प्रतियोगी परीक्षाओं, विद्यालयी शिक्षा और उच्च शिक्षा स्तर पर भर्ती व परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। नीचे विभिन्न श्रेणियों में उजागर हुए मामलों, शिकायतों, याचिकाओं और उजागर की गई गड़बड़ियों का क्रमबद्ध व विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
૧. सरकारी भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षा घोटाले
📌2014 चीफ ऑफिसर भर्ती प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप पर समय से पहले लीक होने के आरोप।जांच व विभागीय शिकायतें दर्ज।
📌2015 रेवेन्यू तलाटी (Revenue Talati) हाई-टेक गैजेट्स, ब्लूटूथ और इयरपीस के जरिए परीक्षा हॉल में नकल।
📌2016 तलाटी परीक्षा (राजकोट व) 2016-17 प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था के आरोप।राजकोट और सुरेन्द्रनगर में परीक्षा रद्द।
📌2017 TAT (Teacher's Aptitude Test) (29 जुलाई)लगभग 1.47 लाख परीक्षार्थियों की इस परीक्षा का पर्चा सोशल मीडिया पर लीक।परीक्षा रद्द की गई (बाद में 2019 में पुनः आयोजित)।
📌2018 मुख्य सेविका भर्ती परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल व व्हाट्सएप द्वारा प्रश्नपत्र वायरल होने की शिकायतें।अभ्यावेदन/आरोप लगाए गए; परीक्षा रद्द नहीं हुई।
📌2018 LRD (लोकरक्षक दल) 2 दिसंबर 2018 को परीक्षा से कुछ ही घंटे पहले कर्नाटक/दिल्ली कनेक्शन से पेपर लीक।परीक्षा रद्द;
📌2019 बिन सचिवालय क्लर्क (GSSSB)2019 युवराजसिंह जड़ेजा ने पिपरलिक के सबूत दिए सरकार नहीं मानी उसके बाद बड़ा आंदोलन हुआ। OMR शीट में गड़बड़ी, मोबाइल के इस्तेमाल और व्यापक धांधली के साक्ष्य। छात्र आंदोलनों के बाद जांच।SIT का गठन; परीक्षा रद्द।
📌JMC (MPHW)2019-20परीक्षा केंद्र एवं उत्तरपुस्तिकाओं के आवंटन में अनियमतताओं के आरोप।ज्ञापन सौंपा गया; परीक्षा रद्द नहीं हुई।
📌AAE मैकेनिकल (Mechanical Engineeering)2019-20OMR शीट में बैकएंड से हेरफेर और _ के संशोधन के आरोप।अभ्यावेदन दर्ज; परीक्षा रद्द नहीं हुई।
📌सब-ऑडिटर (Sub-Auditor)2021परीक्षा केंद्र पर अनियमतताओं को लेकर शिकायत।धोलेरा/धोलका में पुलिस शिकायत; परीक्षा रद्द नहीं हुई।
🛑2021 हेड क्लर्क (GSSSB), परीक्षा के अगलेदीन युवराजसिंह जड़ेजा ने पिपरलिकेज के आरोप लगाये और सबूत दिये फिर जांच 17 तारीख को शुरू की (12 दिसंबर)साणंद स्थित 'सूर्या ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस' से 10-15 लाख रुपये में पेपर बेचे जाने के साक्ष्य उजागर।परीक्षा रद्द; 30+ गिरफ्तारियां;
📌2021 ATDO भर्ती अंकों के आवंटन और चयन सूची में पक्षपात के लिखित आरोप।मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में लिखित शिकायत दर्ज।
📌2021 पशुधन निरीक्षक (Livestock Inspector) / MPHW बाहरी राज्यों की फर्जी/अमान्य संस्थाओं के बोगस प्रमाण पत्रों का उपयोग कर नौकरी पाने के आरोप।साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद भर्ती रद्द नहीं हुई।
🛑2021 बोगस PSI मामला (मयूर तडवी) युवराजसिंह जड़ेजा ने पूरा मामला उजागर किया ट्रेनिंग सेंटर (गांधीनगर) में बिना परीक्षा पास किए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश के सबूत दिए
🛑2022 वनरक्षक (Forest Guard) (27 मार्च)उनावा (महसाणा) में स्कूल लेटरपैड पर हल प्रश्नपत्र बांटने तथा भावनगर में दोपहर 1:04 बजे व्हाट्सएप पर पेपर वायरल होने का मामला।पुलिस शिकायत दर्ज; प्रशासन ने इसे व्यक्तिगत 'कॉपी केस' माना, परीक्षा रद्द नहीं हुई।
अंजना जी, TRP की मंडी' में बैठकर 'शिक्षा के मंदिर' पर उंगली उठाना बहुत आसान है।
जिन बच्चों की गाढ़ी कमाई लूटने का आप आरोप लगा रही हैं, उन्हीं बच्चों के हक़ के लिए जब शिक्षक सड़कों पर लाठियां खाते हैं, तब आपका 'निष्पक्ष' कैमरा AC स्टूडियो से बाहर क्यों नहीं निकलता?
जब ट्विटर पर हमारे बच्चे महीनों तक ट्रेंड चलाते हैं, तब आपके प्राइम टाइम में क्या चल रहा होता है, ये पूरा देश जानता है।
अगर सच में आपको इन बच्चों की फिक्र है, तो इनकी असली आवाज़ बनिए। अपने शो में बेबाकी से दिखाइए कि SSC GD से लेकर UP SI के एग्जाम्स में धांधली और अव्यवस्था के नाम पर सिस्टम इनके साथ क्या खेल कर रहा है। जिस दिन आप इन मिडिल क्लास छात्रों का असली दर्द देश के सामने रखेंगी, यकीन मानिए मैडम, उस रात आपको बहुत सुकून की नींद आएगी और ऊपर वाला भी आपके इस काम को देखकर खुश होगा। गालियां देने से बेहतर है, इनका सच दिखाइए।
असली दिक्कत YouTube Teachers से नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ से है। आज किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी हो, पेपर लीक हो, रिज़ल्ट में अन्याय हो या छात्रों के साथ गलत हो, तो यही YouTube Teachers सबसे पहले छात्रों के हक़ की लड़ाई में कूद पड़ते हैं। लाखों छात्रों की आवाज़ बन जाते हैं। सरकार पर दबाव बनता है, सवाल पूछे जाते हैं और जवाब माँगे जाते हैं।
शायद यही कारण है कि कुछ लोगों को शिक्षक नहीं, उनकी सक्रियता खटकती है।लोगों की आँखों की किरकिरी बन जाता है।
इसलिए जो बातें सत्ता सीधे नहीं कह सकती, वही बातें कुछ चेहरे अपने मुख से कह देते हैं।
ध्यान रहे कि "सरकार कहना चाहती थी, अंजना ने कह दिया"
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
कोचिंग व्यवस्था गलत है, तो पहले यह बताइए कि कोचिंग पैदा क्यों हुई?
करोड़ों बच्चे स्कूल से निकलने के बाद कोचिंग की तरफ भाग क्यों रहे हैं?
क्या उन्हें कोचिंग का शौक है?
शिक्षा व्यवस्था उन्हें वह नहीं दे पा रही जिसकी उन्हें आवश्यकता है|
कोचिंग बंद हो जाए, मुझे भी कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उससे पहले स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था तो ऐसी बनाइए कि बच्चे को कोचिंग की ज़रूरत ही न पड़े।
कोचिंग बीमारी नहीं है, कोचिंग उस बीमारी का लक्षण है जो हमारी शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से मौजूद है।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
नाम नहीं लूंगा, आप लोग गूगल कर लेना।
ज्यादा पुरानी बात नहीं है-एक युवा राज्यसभा सांसद आम लोगों के मुद्दे उठाने के लिए जाने जाते थे। एयरपोर्ट पर समोसे की कीमत तक को लेकर फिक्रमंद रहते थे।
Gen Z जनता उनसे इंस्टाग्राम पर खूब जुड़ी हुई है।
लेकिन अभी NEET पेपर लीक, जो Gen Z का इतना बड़ा मुद्दा है, उस पर न जाने क्यों चुप हैं। पता नहीं क्या वजह है। उन्हें पता तो होगा ही कि पेपर लीक हो गया है।
આટલી ઉંમરે આ વૃદ્ધ દંપતી ક્યાં જશે?
આવી સરકારસાહી કરતાં રાજાશાહી સારી હતી.
જામસાહેબ, ભાવસિંહજી, કૃષ્ણકુમારસિંહજી, મહારાણા નટવરસિંહજી, સયાજીરાવ ગાયકવાડ, દરબાર ગોપાળદાસ, મહારાવ ખેંગારજી આવાં તો અનેક રાજવીઓ પોતાની પ્રજાને માટે સર્વોચ્ચ ન્યોછાવર કરી દેતાં.