@ChandanSharmaG श्रीराम मंदिर निर्माण पर राशि समर्पण हमने किया हृदय से किया मंदिर निर्माण हुआ अति प्रसन्नता हुई
दान चोरी को बढ़ाकर दिखाना दिन रात इसी में हो हल्ला मचाना हमारी धार्मिक भावनाओं को भड़काने हिन्दुओं को बांटने की गहरी साजिश है
जिन्होंने ने श्रीराम मंदिर आंदोलन से लेकर आज कुछनहीकिया
…
वह नेह क्या,
जिसमें तिरंगे की विचारधारा को विस्तृति देने का ध्येय न हो
वह देह क्या
जिस देह में धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीयता की तीक्ष्ण देग न हो…
#नमोजी#NewProfilePic
आस्था के नाम पर वोट बटोरे गए।अब नोट बटोरने का धंधा सामने आया है।रावण ने माता सीता का हरण किया था पर इन धंधेबाजों ने करोड़ों लोगों की आस्था विश्वास का हरण किया है।हिंदू-हिंदुत्व के ठेकेदारों की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है।हिंदू धर्म को खतरे में बता कर हंगामा करने वाले कहाँ हैं ।
कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे-पीछे सपनों के भागे
इक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों से आगे कहां…
ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय,
कभी तो हंसाए कभी ये रूलाए…
#NewProfilePic
बताइए एक महिला पत्रकार को ऐसी धमकी
अंजना ओम कश्यप माफ़ी माँग लो, नहीं तो बच्चों को बोल देंगे की कमेंट में समय रैना का कंटेंट भर दो, रात भर नींद नहीं आती है जब रोजाना कि 5-6 गालियां पड़ रही होती हैं:-अभिनय जी (यूट्यूब पर मैथ पढ़ाता हैं)
बताइए एक महिला पत्रकार को ऐसी धमकी कोई शिक्षक दे सकता है? ये आदमी क्लास में गालियाँ ही सिखाते हैं? मतलब ट्वीट भेज भेज कर महिलाओं को गाली दिलवाते हैं क्या?
ये आदमी घमंड के कुँए में पूरी तरह से डूबा हुआ प्रतीत होता है। जिस तरह उछल कूद कर वीडियो बना रहे वो बेहद शर्मनाक है।
इनकी भाषा शैली आपको गुंडों वाली नहीं लगती? ये कोचिंग संस्थान चला रहे हैं या गिरोह?
पत्रकारों को ये समझ क्या रखे हैं? इनकी गुंडागर्दी से कोई डर जाएगा?
खुला चैलेंज है भरवाओ समय रैना का कंटेंट कमेंट में। हम भी देखते हैं? कितने बड़ेतीसਸ मार खा हो,,,।
@ABPNews@vikramsingh112 धन्यवाद आदरणीय डीजीपी महोदय जी
आपने एक सच्चे सिपाही होने के काम करने के तरीके की सभी बातें बताईं, परन्तु इस ऐजेण्डाधारी को पसंद न आया क्योंकि यह व्यक्ति सीधा सवाल नहीं पूछता देश में कैसे दंगा भड़के इसकी पूरी कोशिश करता है
मैं 2017 में उस समय YouTube पर 10 लाख (1 Million- aap hi bio mai million ka aura dekha) लोगों को जोड़कर बैठा था, जब न Reels थीं, न Shorts थे और न ही Jio का आज जैसा विस्तार था।
उस समय लोगों को जोड़ने का एक ही तरीका था -विषय पर पकड़, पढ़ाने की क्षमता और छात्रों का विश्वास।
शिक्षक का मूल्यांकन पत्रकार से नहीं, लाखों छात्रों के परिणामों से होता है।
पत्रकारिता बची है नहीं, देश की जनता कर रही है इसका फैसला।
पेपर लीक, बेरोज़गारी और भर्ती घोटालों पर सवाल पूछने वाले शिक्षक आपको तमाशेबाज दिख रहे हैं।
कोचिंग माफिया वाले मास्टर और 'सर' लोगों को नैतिकता के दंभ नहीं भरने चाहिए। चाहे ख़ान हो या अभिनय, इनके वीडियो में ज्ञान कम और परफॉरमेंस अधिक होता है। मैथ्स पढ़ाने वाले जब कोविड वैक्सीन के कारण लोगों को हार्ट अटैक होने की बकवास करते हैं और स्मार्ट बोर्ड के सामने नाचने लगते हैं, तो वो टीचिंग नहीं होती।
ख़ान, ओझा, स्कोडा, लहसुन सब के सब को देखा हुआ है, सबका मॉडल पता है। ये लोग बच्चों के पक्ष में नहीं होते, ये केवल उस पक्ष में खड़े हो कर अपना पक्ष प्रबल कर रहे होते हैं। ख़ान ने कहा था कि ये मीडिया वाले पुतिन का इंटरव्यू करेंगे? उसका इंटरव्यू किसी BPSC या UPSC की तैयारी करने वाले को करना चाहिए!
कितनी बकचोदी वाली बात है ये! UPSC या BPSC वाले (अधिकांशतः) केवल रट्टू तोते होते हैं और वो जब सेलेक्ट हो कर जाते हैं तो कहते हैं कि परीक्षा तो ऑफलाइन होती है, कोई हैक कैसे कर लेगा वेबसाइट!
UPSC में जाने वाले भारत के टॉप ब्रेन नहीं होते, वो घूसखोरी के सबसे बड़े प्रतिमान होते हैं। उनमें से कुछ अपवाद हैं जो देश को किसी तरह चला रहे हैं, इसलिए उन्हें जो भी उदाहरण बना रहा है, उसे ना देश की समझ है, ना प्रतिभा की।
कोचिंग माफिया एक माफिया है, जो बच्चों की असफलता पर थ्राइव करते हैं। असफलता का भार कभी कोचिंग पर नहीं होता, वह सदैव ही तंत्र पर होता है। मैंने दिव्यकीर्ति की बकवास भी सुनी हुई है और मुखर्जीनगर में 16 वर्ष रह कर यह जानता हूँ कि कोचिंग वालों को स्वयं ना भाषा का ज्ञान है, ना विषय का। तंत्र भी बेकार है, पर तुम दूध के धुले नहीं हो।
परंतु हाँ, इसमें भी कई अपवाद होंगे जैसे कि मीडिया में भी कई अपवाद हैं जो अच्छे हैं। पर हाँ, यदि मीडिया बिकी हुई है (जो कि वास्तव में है), तब भी बच्चों के नाम पर नैतिकता की बात करने वाले ये अधिकांश यूट्यूब टीचर स्वयं अनैतिक हैं।
आजकल एक नया ट्रेंड चल पड़ा है - लाखों फॉलोअर्स बटोर लो, फिर खुद को जज और जूरी मानकर किसी के भी दशकों के करियर और योग्यता पर सरेआम कीचड़ उछालना शुरू कर दो।
पटना के फैजल खान (खान सर) ने जिस तरह देश की एक बेहद प्रतिष्ठित और सीनियर महिला पत्रकार अंजना ओम कश्यप की योग्यता पर सवाल उठाए और पूछा कि "क्या अंजना का लेवल पुतिन का इंटरव्यू करने का है?" - वह न सिर्फ बेहद आपत्तिजनक है, बल्कि उनकी संकीर्ण मानसिकता को भी दर्शाता है।
असल में यह विवाद एक पुरुषवादी अहंकार (Ego) का है, जो एक महिला पत्रकार की अंतरराष्ट्रीय कामयाबी को पचा नहीं पाया। हम पूरी तरह से अंजना ओम कश्यप के साथ खड़े हैं। अपनी मेहनत से पहचान बनाने वाली महिलाओं को नीचा दिखाने की इस 'यूट्यूबी बकैती' को अब बंद होना चाहिए।
@anjanaomkashyap
#westandwithanjanaomkashyap