ज़िंदगी बहुत छोटी है। इसे शिकायतों, इंतज़ार और अधूरी उम्मीदों में मत बिताइए। अपने आत्मसम्मान को संभालिए, खुद से प्यार कीजिए और उन लोगों के साथ रहिए जो आपकी मुस्कान की वजह बनते हैं, आँसुओं की नहीं।
अपने वरदानों और अभिशापों में बंधे
हम वहीं दूर से तुम्हें देखते रहेंगे
अपना वर्तमान और अतीत लेकर
अपने उदास अकेलेपन में
भाषा और कविता से बाहर
सृष्टि की अन्तिम रात तक
चाहत के आकाश में
उदास और अकेले ....!
~ उत्पल बैनर्जी
यदि आप शायरी सीखना और आगे चलकर ग़ज़ल लिखना चाहते हैं या बस शौक के लिए पढ़ना चाहते है, तो यह अध्ययन क्रम अपनाइए।
इस क्रम से आपकी भाषा, भाव, शिल्प, प्रतीक, बिंब और ग़ज़ल की समझ धीरे-धीरे विकसित होगी।
चरण 1: सरल और लोकप्रिय शायर पढ़े (1-3 महीने)
1. बशीर बद्र
2. निदा फ़ाज़ली
3. राहत इंदौरी
4. अहमद फ़राज़
5. जौन एलिया
इन शायरों की भाषा अपेक्षाकृत सरल है और इनके माध्यम से शायरी का स्वाद विकसित होता है।
चरण 2: आधुनिक उर्दू शायरी के प्रमुख स्तंभ (2-4 महीने)
6. फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
7. परवीन शाकिर
8. कैफ़ी आज़मी
9. साहिर लुधियानवी
10. जिगर मुरादाबादी
इनके यहाँ प्रेम, समाज, राजनीति, संवेदना और मानवीय अनुभवों का व्यापक संसार मिलता है।
चरण 3: शास्त्रीय परंपरा की ओर
11. फ़िराक़ गोरखपुरी
12. अल्लामा इक़बाल
13. अकबर इलाहाबादी
14. हसरत मोहानी
15. जोश मलीहाबादी
यहाँ से भाषा अधिक समृद्ध और विचार अधिक गहरे होने लगते हैं।
चरण 4: उस्तादों के उस्ताद
16. मोमिन ख़ान मोमिन
17. दाग़ देहलवी
18. शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
19. मिर्ज़ा ग़ालिब
20. मीर तकी मीर
यदि ग़ज़ल एक विशाल वृक्ष है, तो उसकी जड़ें इन्हीं उस्तादों में मिलती हैं।
चरण 5: गहराई और विस्तार
21. नासिर काज़मी
22. मोहसिन नक़वी
23. मुनीर नियाज़ी
24. शकेब जलाली
25. वसी शाह
इन शायरों के यहाँ आधुनिक संवेदनाएँ, अकेलापन, स्मृति और मनोवैज्ञानिक गहराई देखने को मिलती है।
पढ़ने का तरीका:
प्रत्येक शायर के कम से कम 50-100 श्रेष्ठ शेर पढ़िए। जो शेर पसंद आएँ, उन्हें अपनी डायरी या कॉपी या नोटपैड में लिखिए। हर शेर का अर्थ अपने शब्दों में समझने का प्रयास कीजिए। शेर में प्रयुक्त बिंब, प्रतीक, रूपक और भाव पर ध्यान दीजिए।
अच्छे शेरों को याद भी कीजिए; इससे भाषा और लय दोनों विकसित होती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण सलाह:
जल्दबाज़ी में शायरी लिखना शुरू मत कीजिए। पहले लगभग 1000-1500 उत्कृष्ट शेर पढ़ डालिए। एक अच्छा शायर बनने से पहले एक अच्छा पाठक बनना आवश्यक है।
और यदि पुराने उस्तादों में केवल तीन शायरों को ही गहराई से पढ़ लिया जाए - मीर तकी मीर, मिर्ज़ा ग़ालिब और मोमिन ख़ान मोमिन - तो कहा जा सकता है कि ग़ज़ल की आधी तालीम वहीं से प्राप्त हो जाती है। उनके यहाँ भाषा की नज़ाकत, भावों की गहराई और शायरी का शिल्प अपने सर्वोत्तम रूप में मिलता है।
जिंदगी के बचतखाते में सिर्फ कुछ यादे ही है,अच्छी है बहोत है पर वो कम याद आती है..बुरी है जो भुलाये नही भूलती जैसे-जैसे हम बड़े होते है बुरी यादें अपना असल सूद सब मिलाके एक वजनदार बोझ बन जाती है..उस बोझ को कम करने के चक्कर मे हम बेकार ही खर्च हुए जाते है...!