अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
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@UPRVPAS@myogiadityanath@UPPCLLKO@narendramodi@myogioffice@aksharmaBharat@UPGovt अत्यंत निराशजनक है अपनी नाकामियों का ठीकरा मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल पर फोड़ कर निलंबन करना न्यायोचित नहीं है मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल के निलंबन को शीघ्र ही हटा कर अपनी नाकामियों पर विचार करें और उन्हें दूर कर विभाग को सुव्यवस्थित रूप से काम करने की आवश्यकता है।
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@myogiadityanath@UPPCLLKO
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
#stop_privatization_of_uppcl
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विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आज आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन: लोकतांत्रिक तरीके से किए गये आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को समाप्त कराने की मांग:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्देशानुसार लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन के दौरान ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों को निरस्त कराने के लिए आज आंदोलन के पहले दिन प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
अभियंता संघ के महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि उत्पीड़न के कार्रवाइयों के विरोध में प्रारंभ हुई आंदोलन के आज पहले दिन प्रदेश में जनपदों एवं परियोजनाओं पर काली पट्टी बांधकर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री जी के समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभी तक मार्च 2023 के आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त नहीं लिया गया है जिसके कारण कई अभियंताओं के पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोक कर अभियन्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है इसके साथ-साथ लगभग 1 वर्ष से बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के दौरान भी ऊर्जा प्रबंधन ने तानाशाही रवैया बनाते हुए उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं को चिन्हित कर अकारण चार्ज शीट देकर अभियन्ताओं की प्रोन्नति तक रोकने की तैयारी हैं तथा परामर्श पत्र के नाम पर अभियन्ताओं के स्थायीकरण आदेश तक रोक दिए गए हैं, अभियन्ताओं को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया है उपरोक्त कार्रवाइयों से पूरे प्रदेश के अभियंताओं में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।
अभियंता संघ के अध्यक्ष इं. संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियन्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए अभी तक न तो कोई वार्ता की गयी है और न ही कोई सार्थक कार्यवाही की गयी है जो प्रबंधन की हठधर्मिता रवैया को दर्शाता है।प्रबंधन के तानाशाही रवैये को देखते हुए संघ के पास आंदोलन के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं है। ऊर्जा प्रबंधन से पुनः अनुरोध किया गया है कि जल्द वार्ता के माध्यम से समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके।
अभियंता संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन किया है कि उपरोक्त प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियों को वार्ता के माध्यम से समाप्त कराने की कृपा करें जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता आंदोलन की राह छोड़ उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने व “बिजली बिल राहत योजना 2025" को सफल बनाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके।
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में दिनांक 20 नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन प्रारंभ।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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