वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा।
बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी।
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद।
मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
@UPRVPAS@myogiadityanath@UPPCLLKO@narendramodi@myogioffice@aksharmaBharat@UPGovt अत्यंत निराशजनक है अपनी नाकामियों का ठीकरा मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल पर फोड़ कर निलंबन करना न्यायोचित नहीं है मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल के निलंबन को शीघ्र ही हटा कर अपनी नाकामियों पर विचार करें और उन्हें दूर कर विभाग को सुव्यवस्थित रूप से काम करने की आवश्यकता है
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
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निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
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आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
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विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आज आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन: लोकतांत्रिक तरीके से किए गये आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को समाप्त कराने की मांग:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्देशानुसार लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन के दौरान ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों को निरस्त कराने के लिए आज आंदोलन के पहले दिन प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
अभियंता संघ के महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि उत्पीड़न के कार्रवाइयों के विरोध में प्रारंभ हुई आंदोलन के आज पहले दिन प्रदेश में जनपदों एवं परियोजनाओं पर काली पट्टी बांधकर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री जी के समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभी तक मार्च 2023 के आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त नहीं लिया गया है जिसके कारण कई अभियंताओं के पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोक कर अभियन्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है इसके साथ-साथ लगभग 1 वर्ष से बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के दौरान भी ऊर्जा प्रबंधन ने तानाशाही रवैया बनाते हुए उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं को चिन्हित कर अकारण चार्ज शीट देकर अभियन्ताओं की प्रोन्नति तक रोकने की तैयारी हैं तथा परामर्श पत्र के नाम पर अभियन्ताओं के स्थायीकरण आदेश तक रोक दिए गए हैं, अभियन्ताओं को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया है उपरोक्त कार्रवाइयों से पूरे प्रदेश के अभियंताओं में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।
अभियंता संघ के अध्यक्ष इं. संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियन्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए अभी तक न तो कोई वार्ता की गयी है और न ही कोई सार्थक कार्यवाही की गयी है जो प्रबंधन की हठधर्मिता रवैया को दर्शाता है।प्रबंधन के तानाशाही रवैये को देखते हुए संघ के पास आंदोलन के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं है। ऊर्जा प्रबंधन से पुनः अनुरोध किया गया है कि जल्द वार्ता के माध्यम से समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके।
अभियंता संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन किया है कि उपरोक्त प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियों को वार्ता के माध्यम से समाप्त कराने की कृपा करें जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता आंदोलन की राह छोड़ उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने व “बिजली बिल राहत योजना 2025" को सफल बनाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर सभी संवर्गो के हजारों पदों को समाप्त करने के विरोध में तथा निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 350वें दिन राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन पर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन:
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।
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