मित्र… पहला सवाल तो यही है कि नाम कटवाया ही क्यों??
फिर नाम कटा …तो जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की ???
किसी को पता कैसे चले कि नाम कट गया है??क्या आप हर साल या हर ६ महीने में चेक करते हैं क्या की आप वोटर लिस्ट में हैं या नहीं??
और आखिर में आपने सही कहा…. नाम जुड़वाने ने के लिये फॉर्म6 है पर जब ERO चुनाव आयोग के app में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का प्रयास करें तो वो ऐप का कंट्रोल आयोग में बैठे IT विभाग या सीईसी के पास ह ना कि ग्राउंड में काम करने वाले ERO/ SDM के पास!!
आपकी बात से विनम्रता के साथ असहमत हूं! अपने इलाके, मोहल्ले, गली या कोलोनी में रहने वाले बूथ एजेंट को सब पता रहता है कि कौन किस पार्टी को पसंद या नापसंद करता है… उसके फीडबैक के आधार पर चुनाव अधिकारी किसी के भी नाम कटवाने में सक्षम होते हैं।
क्या हुआ राष्ट्रपति को? थकान, तबियत नासाज़ या कोई दवा का असर??
प्रेसिडेंट अपने दफ्तर ओवल हाउस में सभी के सामने उंघते पाये गये।
ये वाकई में बहुत चिंतित करने वाली तस्वीरें हैं!!
“अगर मैं #ज्ञानेशकुमार की जगह होती.. (भगवान का शुक्र है कि मैं उस जगह पर नहीं हूं) .. तो मैं पूरे सम्मान के साथ अपने चेहरे पर दुख के भाव लाते हुये …ये कहते हुए इस्तीफा दे देती कि मैंने कुछ गलत नहीं किया, … लेकिन संस्थान की साख बचाये रखने के लिये अपने पद से त्याग दे रही हूं जब तक कि कोई इन्क्वायरी कमीशन तमाम आरोपों से मुझे बरी नहीं कर देता!”
- तवलीन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार, द इंडियन एक्सप्रेस.. में आज छपे उनके लेख से साभार!!