झारखंड के हजारों गरीबों का करोड़ो रूपया सहारा इंडिया में जमा है,गरीब व्यवसायी,किसान व दिहाड़ी मजदूरों ने अपना पेट काट कर एक-एक रुपया सहारा में जमा किया है पर जब ऐसे लोग अपना पैसा मांगने सहारा के ऑफिस में जा रहे हैं तो तरह-तरह के बहाने बना कर उन्हें टाल-मटोल किया जा रहा है..1/2
कहासुनी: NCRB रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2021 में क़रीब 42 हज़ार दिहाड़ी मज़दूरों ने आत्महत्या की, इनमें 4,246 महिलाएं भी शामिल थीं.
इन हालात के लिए कौन ज़िम्मेदार?
अपने 'मित्रों' का भविष्य विदेशों तक में सुरक्षित करने वाले प्रधानमंत्री जी ने अपने देश के युवाओं को बेरोज़गार बनने के लिए छोड़ दिया है।
इन युवाओं के साथ इतना पक्षपात क्यों?