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Founder- @navalkant
अयोध्या में दंतधावन कुंड के निकट ये स्मृति है भगवान बुद्ध जी की चरण पादुका की,
ये पहले संगमरमर की थी ऐसी स्थिति में है ऐसा मानना है प्राचीन धरोहर चोरी हो गई और किसी ने सीमेंटेड बना दिया।
चुनावी समर में शायद ही किसी का ध्यान इस ओर जाए।
@AmarnathDubeji@MamtaTripathi80@navalkant
जय श्री राम जय हनुमान 🙏🙏🚩
हनुमान चट्टी बद्रिनाथ धाम🙏🚩
हनुमान चट्टी एक मंदिर है, जो भगवान हनुमान को समर्पित है। यह ऋषिकेश, उत्तराखंड से लगभग 286 किमी की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर जोशीमठ से 34 किलोमीटर की दूरी पर हैं और बद्रीनाथ मंदिर लगभग 12 कि.मी. तथा दोनों के बीच में स्थित है।
गढ़वाल हिमालय में हनुमान चट्टी के एक ही नाम से दो स्थान हैं। एक मंदिर यमुनोत्री धाम पर स्थित है, जबकि दूसरा बद्रीनाथ मंदिर तक है।
हालांकि मंदिर कद में छोटा दिखता है लेकिन यह बहुत सुंदर है और इसके पीछे एक प्रभावशाली इतिहास है। किंवदंती यह है कि यह इस स्थान पर था कि भगवान हनुमान ने पांडव भाई भीम को गले लगाया था और उनके अहंकार को कुचल दिया था।
मंदिर के पीछे की कहानी....
भीम अपनी ताकत और शक्ति के लिए प्रसिद्ध पांडव भाइयों में से एक थे। एक दिन जब भीम इस रास्ते से गुजर रहे थे, तो उन्हें रास्ते में एक बूढ़े बंदर का सामना करना पड़ा। भीम के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के कारण उनकी पूंछ फैल हुई थी। भीम ने पूंछ हटाने के लिए बूढ़े बंदर से कई बार अनुरोध किया, लेकिन बंदर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह बहुत बूढ़ा है और वह बहुत थका हुआ है। भीम इस कारण क्रोधित हो गए और मामले को अपने हाथों में लेने का फैसला किया और खुद से बंदर की पूंछ को हिलाना शुरू कर दिया।
जब कई प्रयासों के बाद भी पूंछ नहीं हिली, तो भीम को आश्चर्य हुआ और महसूस किया कि यह कोई साधारण बंदर नहीं हैं। फिर उसने विनम्रतापूर्वक बंदर से अपनी असली पहचान प्रकट करने का अनुरोध किया। तब भगवान हनुमान जो भगवान राम के समर्पित शिष्य हैं, ने उन्हें अपना मूल रूप दिखाया और इस तरह इस जगह को अपना नाम मिला।
🚩🚩🙏जय बजरंगबली🙏🚩🚩
🚩🚩जय सियाराम🚩🚩
5000 साल के इंतजार के बाद बन रहे प्रभु श्री राम के मंदिर का पहला दरवाजा.. सोने के पत्तर से मढ़ा पहला दरवाजा.. ऐसे बहुत सारे दरवाजे भी भव्य और दिव्य मंदिर में लगने बाकी हैं .. दर्शन करिए और बोलिए जय श्री राम.. 🚩🚩🙏🙏
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के साथ-साथ जटायु जी का भी मंदिर कुबेर किला पर बनाया जा रहा है।आज यहां कुबेर किला गिद्धराज जटायु जी की प्रतिमा लगा दी गई।
काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पहुँचने से पहले, संसार से मुक्ति प्रदान करने वाले राम भक्त प्रभु हनुमान जी के दर्शन होते है।
सभी शव इनके समक्ष से हो कर के ही, अंतिम क्रिया के हेतु आशीष ले के जाते हैं।
पर्यावरणीय संकट से घिरे रहते हैं, काशी के लहरतारा हनुमान जी।
हर रोज़, धूल और पैट्रोकेमिकल प्रदूषण की परत इस विग्रह पर पड़ता रहता है और मूर्ति काली हो जाती है।
ये पुरामहादेव मंदिर है इसी वन में जमदग्नि ऋषि अपनी पत्नी रेणुका सहित अपने आश्रम में रहते थे रेणुका प्रतिदिन कच्चा घड़ा बनाकर हिंडन नदी नदी से जल भर कर शिव को अर्पण किया करती थी हिंडन नदी, जिसे पुराणों में पंचतीर्थी कहा गया है और हरनन्दी नदी के नाम से भी विख्यात 🙏🏿
रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी के ऊखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर एक स्थल है जहां से शिव भक्तों का गहरा नाता है. इसका मुख्य कारण है कि यहां शीतकाल में भगवान केदारनाथ और भगवान मद्महेश्वर का शीतकालीन गद्दी स्थल है🙏🏻🙏🏻
🙏🏻🙏🏻हर हर महादेव🙏🏻🙏🏻
विश्व में कई कई जगह खोदाई में सोना तो कहीं तेल तो कहीं कोयला खोजने की होड़ लगी रहती है, पैट दुनिया में एक जगह ऐसा है, जहां जब भी खुदाई हुई तो यहाँ देवी देवता प्रगट होते हैं।
यह है, सोनभद्र ज़िला का शिवद्वार।
बद्रीनाथ धाम के पुजारी प्रतिकूल
परिस्थिति में नियम से पूजा कर रहें है 5 बार स्नान करते है नंगे पैर चलकर आते है।
माइनस तापमान में सूबह 3 बजे स्नान करके नंगे पांव वर्फ पर चलकर जाना ईश्वर कृपा🙏आप जैसे लोग ही हमारी सनातन धर्म सँस्कृति
के रक्षक है,आपको सह्रदय कोटिशः बारम्बार नमन।🙏🚩
धनतेरस (धनत्रयोदशी) पर वाराणसी में माँ अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई है. साल में सिर्फ़ एक बार धनतेरस से अन्नकूट तक मंदिर में माँ का स्वर्ण रूप में दर्शन होता है. दर्शनार्थियों को खज़ाने से प्रसाद स्वरूप सिक्का और लावा मिलता है.
#Varanasi
दो दशहरे, दो व्युत्पत्तियाँ
1- दशपापहरा> दशहरा। १० पाप हरने वाली गंगा की जयंती, जेठ सुदी दशमी। इस दशहरा को राम ने रामेश्वरम् की स्थापना की थी।
2- दशहरा अर्थात दश अहोरात्र (दस दिन-रात)। दश अहोरात्र> दशहोरा> दशहरा> दसहरा। नवरात्र के अगले दिन विजया दशमी तक, राम की विजय का उत्सव!
सनातन यहाँ है।
सनातन के संदेश के नाम समर्पित किया गया अमेरिका का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे विराट हिंदू मंदिर।
हिंदुत्व यहाँ है।
अमेरिका के न्यू-जर्सी में बने इस अक्षरधाम मंदिर की भव्यता अतुलनीय है।
185 एकड़ की ज़मीन पर फैला।
548 पत्थर के खंभे, 548 स्टोन बीम।
10000 मूर्तियाँ।
पत्थरों पर उकेरे गये 151 भारतीय वाद्ययंत्र, भरत नाट्यम की 108 मुद्राएँ।
9 विराट महामंडपम, 235 महामंडपम।
2485 फीट लंबा परिक्रमा पथ।
उत्तरी अमेरिका के कोने कोने से जुटे 12500 वॉलंटियर्स ने 8 साल दिन रात एक करके इसे तैयार किया।
हज़ारों साल अमेरिका की ज़मीन पर तक सनातन और हिंदुत्व की अलख जगाता रहेगा ये अक्षरधाम।
मैं इस इतिहास के महान शिखर को चमत्कृत आँखों से देख रहा हूँ। इस महान समय का साक्षी हूँ।
अमेरिका की जिस भूमि से स्वामी विवेकानंद की ओजस्वी वाणी से प्रवाहित हिंदुत्व की सरिता ने समूचे विश्व को आलिंगनबद्ध कर लिया था,
एक बार फिर से उसी ज़मीन से हिंदुत्व और सनातन का प्रखर उद्घोष अपनी उसी अदम्य जिजीविषा के साथ दिग-दिगंत में गूंज रहा है।
जो सनातन है, वही शाश्वत है। भला शाश्वत को कौन रोक सका है!!