ब्राह्मण थी - कपड़े गंदे थे - खाने को पैसे नहीं थे
मां दूसरों के यहां काम करती थी - इसलिए भेद भाव करते थे - डांट के पीछे बैठा देते थे
कोई बता सकता इसे भेद भाव जातीय उत्पीड़न कहा जाए या सिर्फ विशेष लोगों पर मोहर लगाई गयी है
इस ब्राह्मण बच्चों की दुर्दशा के बारे में तो जान ही गए होंगे आप सब
कुछ लोग कभी कभी मुझे बड़ी ज्ञान देते हैं - ऐसा मत लिखो फलाना एकता टूट जाएगा
इनको - एक आवास तक नहीं दिया गया था
मोदी घर घर शौचालय की बात करते हैं वो तक इनके पास नहीं था - थोड़ा सोचना ऐसे जिंदगी आपकी होती तो क्या करते ?
विधायक: राम सिंह पटेल
सांसद डॉ. शिव पाल सिंह पटेल
ग्राम प्रधान (रायगढ़): राकेश कुमार
जाति मैटर करती है - याद रखना ब्राह्मणों और वो ब्राह्मण जो बे फालतू का मुझे ज्ञान देते हैं
ठाकुर का कुआं तुम खुद रहे थे और अपना कुआं नहीं खुद पा रहे थे, ये सब फर्जी कहानियां फैलाई गई की दलितों के पीछे मटकी, झाड़ू बांध कर घुमाया जाता है।
इन बातों का कहीं कोई प्रमाण नहीं है।
— अजीत भारती
भरत तिवारी ब्राह्मण जाति से हैं... इसीलिए भगतसिंह घोषित किया जा रहा है... कोई दलित, पिछड़ा या मुसलमान होता तो...? 🤔
चलिए इस आरोप का थोड़ा विश्लेषण करते हैं।
मैं राजस्थान से हूँ।
अर्थात बिहार से 1000 किलोमीटर दूर।
अपने क्षेत्र के एक साथी के घर काफ़ी दिनों के अंतराल के बाद गया... चर्चा चली... बीच में बोले कि "मोहित ज़ी....कल रात से मेरा दिमाग़ खराब है... सुनी होगी ना आपने भी बिहार की वो खबर..."
मैंने आश्चर्य से पूछा... कौनसी?
मुझे भरत तिवारी की खबर पता तो थी लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि वो इसी घटना का जिक्र करेंगे।
उनके भरत तिवारी के जिक्र करने के बाद मैंने कहा कि... "अरे यार... होता रहता है... इतना ज्यादा ध्यान मत दिया करो... मीडिया की ऐसी खबरों पर..."
वो नहीं मानें और बहुत सी बातें गिनाने लगे...
वो तमाम बातें जो भरत तिवारी की फेसबुक पोस्ट्स के माध्यम से लोगों के बीच पहुंच रहीं हैं। विभिन्न विषय और व्यक्तियों पर विचार व क्षेत्र के लोगों के लिए संघर्ष।
यहाँ यह उल्लेख करना जरूरी है कि मेरे उक्त साथी OBC वर्ग की एक भूमिहीन जाति से संबंधित हैं।
जहाँ ब्राह्मणों के पास जमीन पर पर्याप्त नियंत्रण है, उन क्षेत्रों में कई ब्राह्मण गेंगस्टर व बाहुबली देखने को मिले... जिनकी हत्या/मौत पर भी उन्हें इस तरह का जनसमर्थन नहीं मिल पाया।
फिर भरत तिवारी को क्यों? 🤔
शायद कारण वहीं सब रहे जो मेरे साथी ने गिनाए।
भरत तिवारी के प्रति सहानुभूति और संवेदना को अधिक बढ़ाने वाली 4 बात निम्न प्रकार से है...👇
1) पूर्व में हत्या/लूट आदि का कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। जो कि सामान्यत: अन्य गेंगस्टर्स के साथ दिखाई देता है।
2) भरत तिवारी का फेसबुक LIVE चालू था। और उसमें हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने की घटना स्पष्टत: रिकॉर्ड हो गई।
3) भारत देश में होने वाले तमाम एनकाउंटर में अपराधी इस तरह वैचारिक बातें करता सामान्यत: दिखाई नहीं देता है, जैसा इस केस में हुआ।
4) एनकाउंटर का अर्थ है - मुठभेड़। जिसमें सिंपल सी शर्त होती है... या तो दोनों पक्ष हमला कर रहे हों। या अपराधी पुलिस से बचकर भागने का प्रयास कर रहा हो। यहाँ ये दोनों ही बातें नहीं हैं।
अब इन 4 बिंदुओं को दोबारा से पढ़ लीजिए... और बताइए कि अतीत में कितने अन्य लोगों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है? 🤔
इन्हीं 4 बिंदुओं को फॉलो करने वाले किसी अन्य जाति के व्यक्ति के साथ ऐसा होता तो क्या आउटरेज नहीं होता? 🤔
किसी SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के साथ यह होता तो उनके लिए गठित संवैधानिक आयोग अभी तक संज्ञान लेकर सरकार से जबाव तलब नहीं कर चुके होते...? 🤔
अगर सिर्फ मुसलमान की बात करें तो बताएं क्या देश में ऐसी घटना ( उपर्युक्त 4 पैमानों के साथ ) किसी मुस्लिम व्यक्ति के साथ हुई है क्या? 🤔
या हिन्दुओं के अन्य समुदायों के साथ? 🤔
इसलिए यह कहना अनुचित ही कि सिर्फ ब्राह्मण पहचान के कारण भरत तिवारी की तुलना भगतसिंह आदि क्रांतिकारियों से की जा रही है।
बिहार में युवक यादव समुदाय के लोगों का भी एनकाउंटर हुआ... उनका इस तरह हथियार डालने का वीडियो वायरल होता तो यकीनन उन घटनाओं पर भी सहानुभूति उपजती।
जो भरत तिवारी के एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं... वे भी उसे निर्दोष नहीं बता रहे। वे यह भी नहीं कह रहे कि पुलिस को हथियार उठाने वाले का एनकाउंटर नहीं करना चाहिए था।
वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि ज़ब हथियार LIVE वीडियो में पुलिस के हवाले कर दिया... तो निःहत्थे को गोली क्यों मारी गई?
जो कि एक जायज प्रश्न प्रतीत भी होता है।
मेरा स्टैंड... 👇
पुलिस भारत गणराज्य की प्रतिनिधि है। उस पर हथियार तानना सीधे तौर पर शासन को चुनौती है। यह एक गंभीर अपराध है, जिसकी कानून में सजा निर्धारित है।
मैं गणराज्य के कानून के साथ ही हूँ... बंदूक तानने वाले के नहीं... 🙏🙏🙏
लेकिन हथियार रखने पर पुलीसिया कार्रवाई में मौत काफ़ी चिंताजनक है।
सरकार भी इस घटना को चिंताजनक मानती है... इसीलिए जल्द ही न्यायिक जाँच के लिए भी बोल दिया।
सारी स्थिति क्लियर हो जाएगी... ऐसी उम्मीद है। 🙏
भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि से तुलना करना उचित नहीं... लेकिन इस तुलना के पीछे उपजी जनभावनाएं हैं... जिनका आधार ऊपर लिखे 4 बिंदुओं में दर्ज है।
Note : कमेंट सेक्शन संसदीय भाषा में चर्चा के लिए खुला है। विपरीत विचारों व सवालों का भी स्वागत है।🙏
उठो विप्रदूतों..
एक ब्राह्मण भाई को नौकरी की जरूरत है,मदद कीजिए !
नाम - नारायण मिश्रा ( मिर्ज़ापुर )
योग्यता - MA
कल सुबह तक 25 हज़ार साथियों तक पहुंचा दो।
आप मदद नहीं कर सकते तो 🔁 जरूर करें !
हेलो @bastipolice
यदि चैट में दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था और आरोप है कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग पहले समीर जाटव ने किया तो कार्रवाई भी निष्पक्ष और समान होनी चाहिए
केवल हर्षित दुबे पर कार्रवाई करना और दूसरे पक्ष को छोड़ देना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
उत्तर प्रदेश पुलिस से निवेदन है कि इस समीर जाटव को गिरफ्तार करिए कैसे ये लगातार ब्राह्मणों की अभद्र टिप्पणी कर रहा है जिस गाली को मैने हाइड किया है, कृपया इसपर जल्दी करवाई करे वरना जातीय हिंसा हो सकता है
Cc @digbasti@Uppolice@dgpup@myogiadityanath@UPGovt
भरत तिवारी के एनकाउंटर का पूरा वीडियो आ गया है, देखिए कैसे उन्होंने सरेंडर किया, और कैसे पुलिस वालों ने उनके साथ छल करके 3 गोली मारी और कौन कौन पुलिसकर्मी ने मारी गोली 😡
उस वीर को जीते जी ,ये गीदड़ मार नही पाए,तो घेर के धोखे से एक शेर का शिकार किये😡
उन पापियों को फांसी होनी ही चाहिए😡
भरत तिवारी की कुर्बानी बेकार नही जानी चाहिए।
"गोली मत चलाइये - गोली मत चलाइये "
वीर - भरत तिवारी के लिए लोग प्रदर्शन कर रहे थे
तो तानाशाह सरकार की पुलिस - एक इनकाउंटर करने के बाद अब ग्रामीणों को बंदूक दिखा रही
वाह ब्राह्मणों वाह - इसलिए करते हो न इनकी अंधभक्ति -
जिसदिन बात खुद के घर पर आएगी तब समझ आयेगा
#Justice4BharatBhushanTiwari
देखिए इस ब्राह्मण विरोधी - जीतन राम मांझी बीजेपी गठबंधन मे मंत्री को
इनके एक सजातीय ने कुछ दिन पहले हत्या की थी उसका फैसला कोर्ट करेगा
लेकिन एक ब्राह्मण ने पिस्टल तान दिया -
वो समाज के गरीबों के आवाज के लिए
सरेंडर भी कर दिया - फिर उसका इनकाउंटर कर हत्या कर दिया जाता है - उसे ये सही ठहरा रहे -
ये कोर्ट हो चुके हैं - यही जज हैं ?
#Justice4BharatBhushanTiwari