@UPPCLLKO@dvvnlhq
5237901106
Sir ye mere sanyojan ka account Number h jiska bill to aata but abbi tak na to cable lagi h na to meter installed h 1 year ho gya h connection huye
Sub Station muraval
Sub division fatehabad
Agra
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चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निजीकरण के नाम पर महा घोटाला होने जा रहा है इसके विरोध में शक्ति भवन पर"भ्रष्टाचार बंद करो, कुर्सी छोड़ो कुर्सी छोड़ो"के नारे के साथ शांतिपूर्वक रैली निकाली गई।देश की सरकारी संपत्तियों को ना बिकने देंगे,ना लुटने देंगे!
@UPPCLLKO
माननीय मुख्यमंत्री जी आपके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की वर्तमान बिजली आपूर्ति के कीर्तिमान से प्रभावित होकर दिल्ली वासियों ने 27 साल बाद आपको चुना। जनता ने यूपी की बिजली मॉडल चुनी।कृपया जनहित में निजीकरण वापस लीजिए।
@myogiadityanath@CMOfficeUP@samajwadiparty@aksharmaBharat
बिजली के निजीकरण से आम जनता को बेहद नुकसान होने वाला है । प्रबंधन द्वारा झूठे आंकड़े सरकार के सामने रखे जा रहे हैं। इस जनविरोधी कार्य से जनहितैसी सरकार को बचना चाहिए ।
बिजली के निजीकरण के लिए कंसल्टैंटों की नियुक्ति की बिडिंग में बड़े स्तर पर कॉर्पोरेट घरानों को शिथिलता देना अपने आप में एक बहुत बड़ी मिली भगत को उजागर कर रहा है।
1-कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के प्रावधान को शिथिल कर देना मतलब साठ-गाँठ का रास्ता निकाल लेना है।
2- कंपनी का औसत 3 साल का टर्नओवर 500 करोड़ के स्थान पर 200 करोड़ कर देना।
3- कंपनी के वर्किंग स्टाफ की रिक्वायरमेंट 500 के स्थान पर मात्र 200 कर देना,
4- जो 10 एक्सपर्ट रखे जाएंगे उन सभी को ऑफिस आने की भी जरूरत नहीं है, इसका मतलब क्या यह है की निजीकरण की रिपोर्ट कहीं और से उठाकर कॉपी पेस्ट कराना है।
इतनी शिथिलता देना इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि जिसको भी यह काम देन��� है उसका चयन अंदर ही अंदर कर लिया गया है, बिडिंग की प्रक्रिया तो मात्र एक औपचारिकता है।
इससे तो ऐसा भी लग रहा है कि जिन निजी घरानों को ऊर्जा निगमों को बेचना है उनके नाम भी अंदर ही अंदर तय हो गए है जिन निजी घरानों को निगमों को खरीदना है कहीं ना कहीं यह कंसलटेंट उन कंपनियां उनके साथ या पावर कारपोरेशन के साथ पहले से ही कार्य कर रहे है, यह सरासर मनमानी एवं असंवैधानिक है, सरकारी संपत्तियों को कौड़ियों के भाव निजी घरानों को बेचना, नहीं तो प्रदेश की आम जनता के हित में है, ना ही किसानों के हित में है, और ना ही बिजली कर्मचारियों के हित में है इसलिए उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण रूपी हो रही खुली लूट को तत्काल व्यापक जनहित में रोका जाना चाहिए।
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