@ajeetbharti पब्लिक :- प्रशांत किशोर जी आपने कहा था जदयू को 25 से ज्यादा सीट आयी तो राजनीति छोड़ ���ेंगे।
@PrashantKishor :- मैं राजनीति में था ही कब?? मेरा धंधा तो दलाली का है।
@Saurabh_MLAgk अरे फट्टू डरपोक नालायक भगोड़े चिंदीचोर जेब मे पंजाब पुलिस होते हुए भी तुम लोगों से एक FIR नही हो पाया??
बिना FIR के गिरफ्तार करने वाले थे क्या??
फिर जब कोर्ट पूछता क्यों उठाया अजीत भारती को तो क्या कहते?? बहन ब्याहनी थी इसलिए उठाया??
@Bhagnetrabhag अगर तुमने खुद नही लिखा तो फिर लिखने वाला तुम्हारा परिचित ही होगा।
बाकी देख लो हैंडराइटिंग से पहचान सकती हो तो... पुलिस भगवान तो है नही जो लिखने वाले को ढूँढ के लाये।
@ArvindKejriwal@ArvindKejriwal@Saurabh_MLAgk अरे दोगलों के नाजायज फसल दिखाओ इस साल की कोई तस्वीर जिसमे झाग में कोई छठ व्रती खड़ा हो।
तेरे वीडियो में भी कहीं वैसा ��ाग नही दिख रहा जो तुम पापियों के समय देखा था।
@ArvindKejriwal अरे दोगले जब बोर्ड लगा कर 10 सालों के लिए यमुना किनारे छठ पर प्रतिबंध लगाया था तब आस्था की याद नही आई??
उस समय तो अपने रोहिंग्या दामादों की आंड खुजाने में व्यस्त थे न।
@AjiHaaan NOTA से टक्कर है, प्रचार करने भी नही निकल पा रहा क्योंकि जिन 12 हजार लोगों से 21-21 हजार लिया था टिकट देने के लिए वह क्षेत्र में आने का इंतज़ार कर रहे हैं।
@Altamash_3412 हमारे गांव में तो मुसलमानों के साथ-साथ यादवों को भी नही मिलता, इसमे अलग क्या है?
जो जैसा ��ै, समाज में जैसी पहचान बनाई है उसे हिस��ब से समाज इज्जत भी देता है।
चुतिया वकील आपको कितना नुकसान पहुँचा सकता है ये @Malabartweets को बहुत जल्द पता चलने वाला है. जो बात आई गई हो गई थी उसको सुप्रीम कोर्ट तक ले जाकर और ख़ुद तथ्यों में ग़लत होते हुए भी @vijaygajera औ�� @Pamphlet_in पर केस करना इसके ताबूत में एक कील का काम ही करने वाला है.
#BoycottMalabarGold
@AjiHaaan उनके तो यही लगता है हिंदुत्व की बात है तो सिर्फ हिंदुत्व के साथ चलो, जाति क्यों... उन्हें समझ ही नही है कि हिंदुत्व सैकड़ों जातियों का समावेश है। आपको अपनी आइडियोलॉजी की रिच बढ़ानी है तो सामने वाले को भी समझना होगा।
@AjiHaaan जिन्होंने बचपन से अपने घर-समाज में सामंती व्यवहार देखा हो, समाज के निचले तबके को हीन भाव से देखे हो, आरक्षण को पूरा खानदान सिर्फ गाली देता हो उन बालकों को ये बातें कहाँ समझ आयेंगी?
भारत का चुनावी सिस्टम फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (FPTP )है. मतलब जो उम्मीदवार सीट पर सबसे आगे निकल गया वही जीत गया, भले कुल वोट 40 प्रतिशत ही हों. इसलिए किसी भी पार्टी के लिए जीत का असली गणित coalition building है, न कि pure ideology.
यही वजह है कि BJP ने एक तरफ core Hindutva delivery दिखाई, दूसरी तरफ बहुजन outreach भी बढ़ाया. मुस्लिम वोट का strategic voting behaviour दिखता ही है. इसलिए भाजपा को हिन्दू समूह में ही मेजोरिटी लेके आनी है.
पिछले दशक में विपक्ष द्वारा “Jai Bhim – Jai Meem” जैसी कोशिशें narrative level पर जोर पकड़ीं. उद्देश्य था दलित और मुस्लिम वोट का एक साथ consolidation. उसी समय BJP ने Ambedkar iconography और policies को मेनस्ट्रीम में मजबूत तरीके से रखा. पंचतीर्थ का विचार, 15 जनपथ पर Dr Ambedkar International Center, BHIM ऐप जैसा नामकरण, लाभार्थी schemes की deep penetration, ये सब उसी लॉन्ग गेम का हिस्सा रहे. मैसेज साफ था, Hindu umbrella के भीतर OBC–SC–ST–Savarn सबको representation और respect मिले. यही FPTP में broad social coalition बनाता है.
यहाँ friction भी यहीं पैदा होता है. एक हिस्से को लगता है कि पार्टी “Ram से Ambedkar shift” कर रही है. सोशल मीडिया पर caste-centric trolling और आपसी polemics बढ़ जाते हैं. पर याद रखिए, ऑनलाइन हीट हमेशा ऑफलाइन रियलिटी नहीं बनाती. ग्राउंड पर वोटर अक्सर तीन चीजें देखता है, delivery, dignity, और local connect. जिस तरफ इन तीनों का जोड़ भरोसेमंद दिखेगा, swing वहीं होगा.
अब इसे timeline की तरह समझिए. पहले फेज में national upsurge और core delivery, जैसे मंदिर, कल्याणकारी schemes, infrastructure. दूसरे फेज में Ambedkar-centric outreach और OBC-SC-ST micro-messaging. तीसरे फेज में विपक्ष की तरफ strategic consolidations और regional experiments.
यह push-and-pull चलता रहेगा क्योंकि यही competitive politics है. जो party coherence के साथ coalition बनाए रखेगी, वही लोकतंत्र में बढ़त लेगी.
ग्लोबल लेंस से देखें तो पैटर्न ���ैमिलियर है. UK Conservatives ने Red Wall में cultural-economic blend के साथ नए voters जोड़े. Israel में Likud का लॉन्ग टर्म फार्मूला religious parties और Mizrahi base के साथ durable coalition रहा. Turkey में AKP ने values plus welfare mix से decade-long dominance बनाया. तीनों केस यही बताते हैं कि ideology तभी जीत में बदलती है जब coalition management और delivery साथ चले.
BJP के मौजूदा मोमेंट को एक लाइन में समझाएं तो यह ideology delivery and coalition management का exam है.
Online डिस्कोर्स Hindutva बनाम caste को zero-sum बनाकर पेश करेगा, पर ग्राउंड पर जीत उसी की होगी जो Hindu umbrella को intact रखते हुए बहुजन representation और material delivery का भरोसा देगा, और साथ में opposition के strategic consolidations को local work, cadre strength और credibility से counter करेगा.
Politics में प्यूरिटी का scorecard नहीं चलता, performance और partnership का चलता है. यही सबको समझने की जरूरत है.
Caste flame-wars से दूरी सबको बनाके रखनी होगी. डिजिटल अनुशासन जरूरी है. No slur, no doxxing, fact-first rebuttal. पार्टी कार्यकर्ताओं को क्लियर SOP देनी चाहिए.