@AmanChopra_@ARanganathan72 ये शंकराचार्य नहीं कालनेमि हैं,कभी भी इनको मैंने धर्मपरिवर्तन के मुद्दे पर बोलते नहीं सुना है अगर किसी ने सुना है तो बताये?ये क्या धर्म की रक्षा करेंगे और शिक्षा देंगे ।
लड़कियों को अब पुरुषों के लिए नई गालियाँ गढ़नी चाहिए। जिन्हें पुरुषों ने ज़्यादातर स्त्रियों के लिए, उन पर केंद्रित गालियाँ बनाया बरता है उन्हें क्यों दोहराना?
जब तक पुरुष अपनी गालियाँ देनी बंद न कर दें तब तक उन्हें ऐसे ही जवाब मिलना चाहिए।
आज ढेर सारे ‘भले’ लोग नई पीढ़ी की लड़कियों की गालियों पर बहुतई व्यथित हैं। कितनी असंस्कारी हो गई हैं ये लड़कियां…हमारी प्यारी संस्कृति का क्या होगा हाय!…
इनमें से जितने संस्कारियों ने अपने परिवारों, परिचितों में, राजनेताओं, सड़क के संस्कारी शोहदों, सामाजिक, धार्मिक , जातिवादी गुंडों को गालियों पर टोका है, सार्वजनिक निंदा की हो वे आगे आएँ। हम उनका ह्रदय से अभिनंदन करेंगे।
लेकिन “पचास करोड़ की विधवा” से लेकर कपड़ों से पहचानने वाले, दिन-रात मंदिर-कब्रिस्तान, मुल्ले, जेहादी, पाकिस्तानी, देशद्रोही घोषित करने वाले संस्कारी आदरणीयों के लिए जिन्होंने तालियाँ बजाई हैं, आरतियाँ उतारी हैं, कानूनन प्रमाणित हत्यारों-बलात्कारियों को जेल से छुड़वाया है, बाहर आने पर मालाएँ चढ़ाने पर एक शब्द न बोला हो वे कृपया इन बेटियों को सभ्यता सिखाने की जुर्रत न करें।
सालों से सुनता रहा हूँ कि नयी पीढ़ी, ख़ास तौर पर Gen-Z बहुत शार्प है और अपने फैसले ख़ुद लेने में सक्षम है इसलिए माता-पिता की नहीं सुनती
इस आंदोलन में ये भ्रम पूरी तरह से दूर हो गया, अब तो इस पीढ़ी की चिंता हो रही है, कहाँ जा रहे हैं ये लोग और कहाँ ले जायेंगे देश को 🤨