वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री ने कहा, राम मंदिर घोटाले से आहत हूँ. राम मंदिर आंदोलन और चंदे से जुटी राशि का सार्वजनिक हिसाब किताब कभी VHP ने नही दिया.
यह बात चित्रा त्रिपाठी को बुरी लग गयी. चित्रा त्रिपाठी ने विनोद अग्निहोत्री को जवाब दिया, राम मंदिर आंदोलन में VHP RSS और BJP के योगदान को भुलाया नही जा सकता है,
चित्रा त्रिपाठी ने आगे कहा, VHP के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल आजीवन राम मंदिर की लडाई लड़ते रहे. आडवाणी ने रथ यात्रा नही होती तो राम मंदिर आंदोलन नही बनता.
इस राजकुमार भाटी साहब ने चुटकी लेते हुए कहा, विनोद जी आप चित्रा त्रिपाठी की बात मानिए VHP RSS को पूरा अधिकार है वो मंदिर के धन को लूटने का.
अब ये स्वीकारा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर में 6 भारतीय सैनिक शहीद हुए
पर सुनिए
संसद में 28 जुलाई 2025 को जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को ललकारते हुए कहा था
“आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए की क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवान सैनिकों को कोई क्षति हुई? तो उसका उत्तर है नहीं”
और इस पर सत्ता पक्ष ने जमकर ताली बजायी थी… मेज़ थपथपाई थी
महुआ मोइत्रा ठीक उसी तरह से ज्यादा बोल रही है, जिस प्रकार और MP बोलते थे
अमित भाई का फोन जाएगा,
अभी उन्हें जा नहीं रहा, वह खुद TMC के खिलाफ बोलना शुरू कर देगी।
— प्रमोद कृष्णम
क्या इनके अनुसार अमित शाह द्वारा MP, MLA को फोन करके डराया-धमकाया जाता है इसलिए पार्टी छोड देते है।
I have a VOTER ID card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a AADHAR card but NO, it is not proof of citizenship
I have a PAN Card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a PASSPORT but NO, it is not proof of citizenship.
So who will give me a CITIZENSHIP CERTIFICATE? A govt bureaucrat?
My question is simple: is the problem with the citizen, or with the Mai Baap State itself?😡
आज कांग्रेस को डीके शिवकुमार जैसे चाणक्य नेताओं की आवश्यकता है जो बीजेपी को उसी की भाषा में जवाब दे सकें.!
कर्नाटक MLC चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की साथ में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद मौजूद रहे।
सुरजेवाला बोले कांग्रेस को 138 विधायकों का समर्थन प्राप्त था लेकिन कांग्रेस को कुल 151 वोट प्राप्त हुए जो कि 13 मत ज्यादा रहे..!
बीजेपी के पास 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त था लेकिन उसे 56 वोट मिले और 1 वोट रद्द हुआ.. JDS को 18 बोटों का समर्थन प्राप्त था लेकिन उसे 14 वोट मिले।
हम इस जीत को कर्नाटक की जनता को समर्पित करते हैं।
BJP is saying that Dalits should not question RSS, why? Are Dalits not part of society, are Dalits not part of the Constitution?
If RSS is running such a bug organization in my state, they have to get registered or answer me under which you are operating.
— Priyank Kharge Ji to anti Dalit BJP
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की हिम्मत में भारी गिरावट
Brent Crude oil लगभग 79.5 - 79.9 USD प्रति बैरल
उम्मीद है भारत में पेट्रोल डीजल की क़ीमत पुरानी दरों पर लौटनी शुरू होगी… एक नहीं तीन बार में सही 🤔
सुशांत — "कल तो Modi जी ने Trump को सामने बैठकर जो सुनाया, ट्रंप की हालत खराब हो गई। मोदीजी की तारीफ़ पर तारीफ़ कर रहे थे ट्रंप, इतना डरा हुआ था।"
ज़रा कल्पना कीजिए, मीडिया सिर्फ़ इस बात पर मोदी की तारीफ़ कर रहा है कि वह ट्रंप के सामने कुर्सी पर बैठकर क्यू-कार्ड्स पढ़ रहे थे।
चापलूसी की भी हद होती है। 🤡
"मोदी जी ने लड़खड़ाते ट्रंप को हाथ बढ़ाकर सपोर्ट किया है"
"इसका साफ साफ मतलब है कि भारत के सपोर्ट के बिना अमेरिका लड़खड़ा सकता है"
मुझे लगता है अगर देश का मीडिया सुधर जाए तो देश से 50% भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा।
प्रख्यात पत्रकार तवलीन सिंह का यह ट्वीट भाषायी चिंता नहीं, राजनीतिक पाखंड की एक बहुत महीन मिसाल है।
राहुल गांधी कोटा में छात्रों से परीक्षा-व्यवस्था की तबाही, पेपर लीक, कोचिंग के आर्थिक शोषण, बेरोज़गारी, पारिवारिक दबाव और विद्यार्थियों की मानसिक यातना पर बात कर रहे थे।
उन्होंने उस व्यवस्था को चुनौती दी, जिसमें करोड़ों बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और कुछ गिनी-चुनी परीक्षाओं की सुरंग में धकेलकर बाकी प्रतिभाओं को लगभग विफल घोषित कर दिया जाता है।
लेकिन तवलीन सिंह को इस पूरी बातचीत में समस्या यह दिखाई दी कि राहुल अंगरेज़ी में क्यों बोले!
यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी जलते हुए घर के सामने खड़े होकर पूछा जाए कि आग बुझाने वाला आदमी बाल्टी पर हिन्दी में क्यों नहीं लिखकर लाया।
पहली बात, भारत के विद्यार्थी इतने असहाय नहीं हैं कि अंगरेज़ी का एक सामान्य संवाद समझ ही न सकें। कोटा में देश के लगभग हर प्रदेश से आए विद्यार्थी पढ़ते हैं। वहाँ हिन्दी, अंगरेज़ी और अनेक भारतीय भाषाओं का सहज मिश्रण है। अंगरेज़ी में कही गई बात अपने आप जनता-विरोधी नहीं हो जाती और हिन्दी में कही गई हर बात अपने आप जनपक्षधर नहीं बन जाती।
दूसरी बात, तवलीन सिंह स्वयं मुख्यतः अंगरेज़ी में लिखती हैं, अंगरेज़ी मीडिया के मंचों पर बोलती हैं और भारतीय राजनीति पर अपनी राय अंगरेज़ी में व्यक्त करती हैं। तब भाषा लोकतांत्रिक संप्रेषण का माध्यम होती है; लेकिन राहुल गांधी अंगरेज़ी बोल दें तो अचानक हिन्दी की आत्मा संकट में पड़ जाती है। यही चयनात्मक भाषायी राष्ट्रवाद है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात—यदि राहुल केवल हिन्दी बोलते तो यही लोग शायद पूछते कि दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के विद्यार्थियों से संवाद किस भाषा में होगा। वे अंगरेज़ी बोलते हैं तो पूछा जाता है कि हिन्दी क्यों नहीं। अर्थात आपत्ति भाषा से नहीं, वक्ता से है। निष्कर्ष पहले तय है, तर्क बाद में खोजा जाता है।
किसी पत्रकार का काम यह पूछना होना चाहिए था कि राहुल गांधी ने परीक्षा-व्यवस्था को “एक्सटॉर्शन मशीन” क्यों कहा; क्या कोचिंग उद्योग वास्तव में परिवारों को कर्ज़ में धकेल रहा है; पेपर लीक की जवाबदेही किसकी है; और विद्यार्थियों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए क्या संरचनात्मक बदलाव चाहिए।
परन्तु जब सत्ता से कठिन सवाल पूछने की इच्छा क्षीण हो जाए, तब विपक्षी नेता के वाक्य की भाषा ही सबसे बड़ा राष्ट्रीय प्रश्न बना दी जाती है। तवलीन सिंह का ट्वीट दरअसल यह नहीं पूछ रहा कि राहुल ने अंगरेज़ी क्यों बोली। वह शिक्षा-संकट पर उठी असुविधाजनक बहस से बचने के लिए पूछ रहा है—हम असली मुद्दे को भाषा की बहस में कैसे डुबो दें?
@RahulGandhi@tavleen_singh
यह ड्रामे बंद होने चाहिए।
चाहे एथानॉल और बढ़ा दो पेट्रोल में, चाहे GST डबल कर दो, चाहे यूरिया का कट्टा 1000 का कर दो।
बस यह बेशर्मी भरी स्तुति बंद होनी चाहिए। https://t.co/k23fNpOeze
रिटायर सैन्य अफसर बहुत हैं लेकिन मेजर जनरल जी डी बख़्शी जो इलाज इस बेशर्म , बेगैरत सरकार का कर रहे हैं कोई नहीं करता।
जिस वक्त लाल आंख और ,56 इंची का सीना दिखाने की जरूरत थी देश का पीएम ठंडी मनाने फ्रांस चला गया। विदेश मंत्री ने ट्वीट करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। ऐसे थोड़े न चलेगा।
सैल्यूट मेजर जनरल
जब भारत के तीन नाविक हमले में मार दिए गए हों
जब भारत के 5 वायु सैनिक हादसे में मारे गए हों
तब किस बात का जश्न है ये? मना किया जा सकता था कि मौक़ा ठीक नहीं है। ज़रूरी विदेश है तो सादगी से होने दें। शासन सत्ता की भी कोई संवेदनशीलता होती है!
ख़ैर। ऐसी कोई तस्वीर अगर नेता विपक्ष राहुल गांधी की आ जाती तो गोदी चैनल डिबेट करने लगते!
What happens when ctal guardians &custodians decide not to decide!! Last date for #meenakshi N nomination 8/6; #RO rejects her nom 9/6; matter heard patiently & wo a comment by #ECI on 10/6; last date of withdrawal is 11/6; no decision ever by #ECI reversing RO (as asked by Cong) & not even affirming RO! Case listed on 12/6 in #SC & #ECI wo deciding anything & wo any order uptodate announces the result of an uncontested election on 11/6 evening, not even awaiting #SC hearing! #Babasaheb & wise founders of our Ction can only draft ctal text; they cannot imbue such biased institutions with ctal spirit, objectivity and independence.