माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुआ।
यह एक ऐसा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जहां आकर व्यक्ति शून्य से शिखर तक पहुँच जाता है। मेरे जीवन में भी जो परिवर्तन आया, उसकी सुखद अनुभूति करने का आज मुझे पुन: अवसर मिला इसके लिए आप सभी का आभारी हूँ।
अयोध्या में आदरणीय श्री चंपत राय जी से मिला। इसी कमरे में सोते हैं। कोई AC या कूलर नही है। खाने में 2 रोटी और लोकी की सब्ज़ी।
आने-जाने वाले लोगों से यहीं मिलते हैं। कोई मीडिया, प्रचार का माध्यम या ताम-झाम नही।
अब भला ऐसा संत आदमी भ्रष्ट लोगों को कैसे पसंद आ सकता है।
मां भारती के अमर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उनके अदम्य साहस, अद्भुत शौर्य और असाधारण बुद्धिमत्ता की गाथा देशवासियों को युगों-युगों तक प्रेरित करती रहेगी। जय शिवाजी!
भोर भयो, बिन शोर,
मन मोर, भयो विभोर,
रग-रग है रंगा, नीला भूरा श्याम सुहाना,
मनमोहक, मोर निराला।
रंग है, पर राग नहीं,
विराग का विश्वास यही,
न चाह, न वाह, न आह,
गूँजे घर-घर आज भी गान,
जिये तो मुरली के साथ
जाये तो मुरलीधर के ताज।