किसी भी नीति के पीछे सरकार की नीयत क्या है यह समझे बिना उसे ‘मुफ्त की रेवड़ी’ कहना उचित नहीं है।
अमीर-गरीब के बीच की खाई पाटने के लिए अगर जनकल्याणकारी राज्य एक वर्ग को विशेष राहत दें तो गलत नहीं, पर मंशा बस वोट ‘खरीदने’ की हो तो प्रश्नचिन्ह लगेंगे।
इस विषय पर मेरा छोटा सा लेख!
@varungandhi80 Up mein B.edtet11 prt 7.12.12 advertisement pe 72825 seats pe bharti kre yogi sarkar ab 2024 dur nahi,berojgaron se ab aur khilwad sahan nahi ho raha
युवाओं में रोजगार दर 20.9% से घटकर 10.4% रह गयी है, यह पिछले 5 वर्षों में सबसे न्यूनतम स्तर पर है।
हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने सभी विभागों से रिक्त पड़े 10 लाख पदों को भरने का आग्रह किया, पर अब तक कोई भी विभाग ठोस कार्य योजना नहीं बना सका।
संघर्षशील युवा कब तक इंतजार करेगा?
@kpmaurya1 केवल शिगुफा है सर,आप तो टी ई टी 2011 के छात्रों के नियुक्ति दिलवाने का वादा किए थे।योगी जी मंच से इन छात्रों के बारे में बोले थे फिर भी आपकी सरकार कुछ नही किया।अब देश की जनता शिगुफा को समझ चुकी है
भैय्या सादर प्रणाम 🙏
हो सके तो सदन में चल रहे बजट सत्र में दस सालों से लम्बित बी.एड टीईटी 2011 पास अभ्यर्थियों के लिए सपा सरकार में निकलें 07/12/2012 प्राइमरी शिक्षक भर्ती विज्ञापन को लेकर सदन में आवाज उठाएं।🙏 🙏
विज्ञापन पर आज भी 290 करोड़ फीस सरकार के पास जमा है।
@MNATHYADAV
उप्र में एंबुलेंस न मिलने से मजबूर होकर एक मरीज़ को हाथ गाड़ी पर ले जाने का दृश्य शायद भाजपा सरकार को दिखाई दे, जनता के दर्द की पुकार सुनना तो उन्होंने पहले से ही बंद कर रखा है।
स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों का सिर्फ़ दिखावटी निरीक्षण न करें; भाजपाई राजनीति का आत्म परीक्षण भी करें।
ललितपुर में एक बेटी के साथ हुए दुष्कर्म के ख़िलाफ़ अगर आज हम सब एक साथ खड़े नहीं हुए तो बेलगाम हो चुकी क़ानून-व्यवस्था हम सबके दरवाज़े तक पहुँच जाएगी।
भाजपा सरकार ने पुलिस का राजनीतिक दुरुपयोग कर इंसाफ़ को थानों में गिरवी रख दिया है। ऐसी सरकार से न्याय की अपेक्षा बेमानी है।
भाजपा सरकारें बिजली संकट के लिए कितनी सफ़ाई से कोयले की कमी का हवाला दे देती हैं वो भी भारत जैसे देश में जो देश कोयला प्रोडक्शन में दुनिया में दूसरे तीसरे पायदान पर है।
यह बिजली संकट सिर्फ़ अदाणी और अम्बानी की जेबें भरने के लिए है।
जिस मैदान में लिया था ‘राष्ट्रसेवा का संकल्प’ वहीं लिखे अंतिम शब्द “बापू इस जन्म में नहीं बन सका, अगला जन्म लिया तो फौजी जरूर बनूँगा”।
विगत 3 वर्षों से रुकी आर्मी रैली के कारण आयु सीमा से बाहर हो रहे युवाओं को अवसाद तोड़ रहा है।
इन मेहनतकश युवाओं की गुहार, आखिर कब सुनेगी सरकार?
बिजली कटौती से उप्र के गाँवों-शहरों में परीक्षार्थियों के मध्य आक्रोश बढ़ रहा है। घरों में वृद्ध लोग व महिलाएँ गरमी से त्रस्त हैं और अस्पतालों में बीमार लोग व उनके ऑपरेशन व उपचार के लिए डॉक्टर भी। दुकानें व कारख़ाने भी बुरी तरह प्रभावित हैं।
भाजपा सरकार उप्र को बिजली खरीदकर दे।