आजकल सरकारी नौकरी करने वालों की बीवियों को Reel बनाने का ऐसा कीड़ा काटा है कि वो आगे पीछे कुछ नहीं सोच रही हैं,
इन मोहतरमा का नाम सरिता यादव है , ये ट्रेन के इंजन में पूरे परिवार के साथ Reel बना रही हैं,
@IRCTCofficial@RailMinIndia इस वायरल विडियो की जांच कर ऐसे कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई करें,
ये लोग सैंकड़ों यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
देखने से ट्रेन कोई वंदे भारत लग रही है , महिला सहित कई और लोग भी इंजन में मौजूद हैं!
🐐 आखिर तक ज़रूर देखना! ऐसा नज़ारा रोज़ देखने को नहीं मिलता। 😍 अगर वीडियो पसंद आए तो Follow और Share ज़रूर करें। ❤️
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इधर प्रधानमंत्री गाली बकने वाले युवाओं को माफी की बात कर रहे हैं,
उधर यूपी का हाल देखिए।
फतेहपुर में जिस छात्र अंकुर सोनकर ने कालेज में पानी, पंखा और शौचालय न होने के चलते प्रदर्शन किया,
अपने साथियों के सहारे पूरी तरह अहिंसक और सभ्य प्रदर्शन के जरिए प्रशासन को झुका दिया,
उसके घर अब पुलिस पहुंच रही है।
उसे और उसके साथियों को लगातार Harass किया जा रहा है।
आखिर क्यों?
क्योंकि उन्होंने योगी आदित्यनाथ के सूचना के अरबों के विज्ञापन के सहारे बनाए गए उस इकोसिस्टम को ध्वस्त कर दिया,
कि यूपी में कोई प्रदर्शन, आंदोलन नहीं कर सकता।
कि दिल्ली में किया तो किया, यूपी में न करना...!!
प्रधानमंत्री जी, एक और आप आंखें बंद करके यूपी में चल रहे इस बेलगाम व अराजक शासन को बढ़ावा देंगे,
और दूसरी ओर बच्चों के लिए माफी और करूणा का उपदेश देंगे!
दो नाव की सवारी की भी एक उम्र होती है!!
बाँकीपुर विधानसभा उपचुनाव में
मैं बिहार के लोगों से प्रशांत किशोर को वोट देने का आह्वान करता हूं,
क्योंकि कोई आँडू पाँडू विधायक बन जाएगा,
तो उससे बिहार की राजनीति और परिस्थिति में कोई अंतर ना आएगा,
लेकिन बिहार की अयोग्य सरकार की नाक में दम करने के लिए,
खुलकर सम्राट चौधरी को ललकारने के लिए
प्रशांत किशोर जैसे व्यक्ति का विधानसभा में होना बहुत जरुरी है,
यह कहानी आपने सुनी होगी । फिर भी दोबारा सुनिए ।
पुलिस ने एक बार एक चोर को पकड़ा । कोतवाल ने चोर के आगे एक टोकरी में 10 प्याज रख दीं और एक जूता रख दिया । चोर से कहा कि वह या तो 10 प्याज खा ले या 10 जूते खा ले ।
चोर ने सोचा प्याज ही खा लेता हूं । उसने कहा प्याज खाऊंगा । एक प्याज खाते खाते उसकी आंखों से भयंकर आंसू टपकने लगे । चोर ने कहा जूता खाऊंगा । सिपाही तैयार खड़ा था उसने झन्नाटेदार जूता जो उसके सिर पर रसीद किया तो चोर बोला कि प्याज खाऊंगा ।
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि चोर ने 10 प्याज भी खाई और 10 जूते भी खाये । यही हुआ है ।
अब कोई ये न कहना कि " ना मर्दो का प्रदेश मध्यप्रदेश " ,,,,,
क्योंकि 20 जुलाई इतिहास का वो काला दिन था जिस दिन मध्यप्रदेश के इस शेर ने खून से लथपथ होते हुए शेर की तरह हुंकार भरी थी !
न झुका था न डरा था न पीछे हटा था
19 जुलाई को दिल्ली जंतर मंतर पर शामिल होने मध्यप्रदेश से दो भाई आए , अगले दिन भीड़ ज्यादा होने पर भगदड़ मचने पर बिछड़ गए
इंटरनेट बंद होने व मोबाइल सेवा बंद होने से मिल न पाए और फिर शाम को अम्मा का फोन आया बड़े भाई से बोला , छोटा भाई कहा
"लहूलुहान है कहा छोड़ा उसे ढूंढो उसे" ।
अगली सुबह में ...बड़ा भाई छोटे भाई से मिला दोनों भावुक हो गए बड़े भाई ने घर चलने की बोला लेकिन छोटे भाई ने मना कर दिया कि दादा आप जाओ में यही रुकूंगा ..!!
इसलिए अब कोई मेरे प्रदेश को ना मर्दो का प्रदेश न कहना वक्त आने पर हम लहु का कतरा कतरा छात्र हित में न्यौछावर कर देंगे ..!!
साहिल हाथ में तिरंगा लेकर बस साफ़-सुथरी परीक्षा और मेहनत का फल मांग रहा था - पुलिस ने बंदूक उठाई और छर्रे दाग कर बुरी तरह घायल कर दिया।
ये अंग्रेज़ों का ज़ुल्म नहीं, आज़ाद भारत की मोदी सरकार की बर्बरता है - जहाँ अपना हक़ मांगते मासूम छात्रों को न्याय नहीं, छर्रे मिलते हैं।
शर्म करो नीतीश कुमार जी और चंद्रबाबू नायडू 😡
आज देशभर में जितने भी पेपर लीक हुए है और छात्रों को अपने हक की आवाज के लिए सड़को पर उतरना पड़ा है।
उसके लिए जितनी मोदी सरकार जिम्मेदार है उसे कहीं ज्यादा ये दोनों लोग जिम्मेदार है।
क्यों क्योंकि अगर इन दोनों ने सत्ता के लालच में मोदी सरकार को समर्थन नहीं दिया होता तो आज केंद्र में बीजेपी की न तो सरकार होती न ही मोदी और धर्मेन्द्र प्रधान जैसे अनपढ़ देश के नेता होते।
इन दोनों लोगों ने अपनी कुर्सी और अपने बच्चों के भविष्य के लिए देश के युवाओं को बर्बाद किया है।
और अब खुद AC में आराम से बैठकर मजे कर रहे है।
शर्म करो @NitishKumar और @ncbn 😡
- ये मुंबई नहीं
- ये दिल्ली नहीं
अब, गुजरात के अहमदाबाद से तस्वीरें सामने आई हैं- जो मोदी और शाह का गृह राज्य है।
छात्र विफल शिक्षा व्यवस्था के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
आप भी देखिए 👇
मोदी जी, अहंकार छोड़िए।
छात्रों की गूंज सुनिए, उनकी 3 मांगें पूरी कीजिए।
- नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफा लीजिए।
- छात्रों पर बर्बरता करने वाले गुनहगारों की जवाबदेही तय कीजिए।
- छात्रों के साथ हुए हर अन्याय के लिए उनसे माफ़ी मांगिए।
मैं, कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष छात्रों और उनकी इन मांगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
नारायणन ने पूरी ज़िंदगी यही सीखा, यही समझा और यही माना कि मुसलमान उनके दुश्मन हैं। आरएसएस के एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने वर्षों तक इसी बात का प्रचार किया और इसी नफ़रत को अपनी पहचान बनाए रखा।
फिर ज़िंदगी का आख़िरी मोड़ आया। मुँह का कैंसर, कमज़ोर होता शरीर और भूख से बेहाल हालत—कोझिकोड की एक दुकान के बरामदे में वे अकेले पड़े मिले।
जब यह ख़बर फैली तो लाखों कार्यकर्ताओं वाले संगठन को भी इसकी जानकारी हुई, लेकिन कोई उन्हें देखने नहीं आया। उनकी दो पत्नियाँ थीं, बच्चे थे, बहन थी—फिर भी कोई साथ देने नहीं पहुँचा।
अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। उनका शव पड़ा रहा। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, लेकिन परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया।
तब इरफ़ाना इक़बाल आगे आईं। वही मुसलमान। वही, जिन्हें "दुश्मन" बताया गया था। उन्होंने अपनी कम्युनिटी के लोगों को साथ जुटाया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार नारायणन का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और पूरी गरिमा के साथ कराया।
नारायणन की पूरी ज़िंदगी एक झूठ पर टिकी रही, और उनकी मृत्यु ने उस झूठ को बेनकाब कर दिया। जिस नफ़रत को उन्होंने अपनी ढाल बनाया था, वह आख़िरी समय में उनके किसी काम नहीं आई। और जिस मोहब्बत को उन्होंने दुश्मनी समझा, वही अंत में उनके सबसे ज़्यादा काम आई।