जिनका जमीर जिंदा है वे सरकारी अत्याचार, तानाशाही और शोषण के खिलाफ आंदोलन करते हैं।
आपको क्या लगता है?आंदोलन नहीं होना चाहिए!
जबतक दुनिया कायम है तब तक जन आंदोलन होते रहेंगे। इसे कोई रोक नहीं सकता।
कल जो भारत था वो आज पाकिस्तान है और कल जो पाकिस्तान था वही आज भारत है। यह बदलाव पिछले 12 सालों में हुआ है। यही पीएम मोदी की उपलब्धि है।
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है ना मूर्खता वाला तर्क!
संविधान में कोई भी सामान्य वर्ग में आ सकता है, अगर कोई सामान्य वर्ग से आवेदन करना चाहे तो नहीं कर सकता क्या ?
सामान्य वर्ग का मतलब सवर्ण नहीं होता गधों!
अब कुर्मी पटेल को ही देख ले, जाट को देख लो, किसी राज्य में ओबीसी में है किसी में सामान्य में। उस प्रदेश में उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के हिसाब से उनको अलग अलग वर्गों में रखा गया ना की जन्मजात। यहाँ तक की पहाड़ी क्षेत्रों में ब्राह्मण और राजपूत जातियां भी ओबीसी और आरक्षित वर्ग में रखी है।
अब मनुस्मृति के हिसाब से कौन सा ब्राह्मण आजतक शूद्र बन गया? या कौन सा शूद्र ब्राह्मण बन गया आजतक।
विशुद्ध मूर्खता वाले तर्क …OBC तो 1990 के बाद आया वर्ग, उससे पहले तो लोहार, नाई, कुम्हार ..ये सब जातियां भी सामान्य में आती थी।
यह आपके चैनल की ग़लतबयानी या ओवरसिम्प्लिफ़िकेशन है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप G 7 की बैठक में हिस्सा लेंगे.
भारत G 7 का सदस्य नहीं, लेकिन फ़्रांस के राष्ट्रपति के बुलावे पर पीएम मोदी वहाँ उनके अतिथि के रूप में बुलाये गये हैं.
फ़्रांस जान चुका है कि पीएम मोदी एक अनस्किल्ड ख़रीददार हैं, जो ‘इलीट फ़ोरम’ में थोड़ा भाव दे देने पर उनके 4.5 जनरेशन वाली पुरानी टेक्नोलॉजी के राफ़ेल अपनी वायुसेना के लिए ख़रीद लेंगे.
5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों के युग में नए 4.5 जनरेशन विमानों पर भारी निवेश उचित नहीं है, वो भी 100 से ज़्यादा एयरक्राफ़्ट और दुनिया में सबसे ज़्यादा दामों पर !! फ़्रांस को इस छोटे से शिष्टाचार का फ़ायदा अरबों डॉलर्स के रूप में मिल जाएगा.
अब यूरोपियन यूनियन, अमेरिका और ब्रिटेन सहित विश्व के लगभग सभी देश पीएम मोदी की ‘फ़ेयर स्किन’ के सामने लहालोट होने की कमज़ोरी भाँप चुके हैं.
लेकिन दुर्भाग्य से पीएम मोदी की इस ख़र्चीली विज़िट का ख़ामियाज़ा भारत की वायुसेना और देश को भुगतना पड़ेगा - पुरानी तकनीक के एयरक्राफ़्ट्स को फ़्रांस से कई गुना भारी क़ीमत में ख़रीदने के कारण!
US-Iran MoU के बाद 48 घंटों में तंग-ए-होर्मुज़ (Strait of Hormuz) से गुज़रने वाला पहला जहाज़ एक भारतीय टैंकर है, जो IRGC के तय किए गए रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है।
तंग-ए-होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहेगा।
अमेरिका : स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में गूगल CEO सुंदर पिचाई का विरोध हुआ, छात्रों ने लगाए 'फ्री पैलेस्टीन' के नारे
◆ छात्र इसराइली सरकार के साथ गूगल के कॉन्ट्रेक्ट का विरोध कर रहे थे
◆ कार्यक्रम में गूगल के CEO सुंदर पिचाई अपना भाषण शुरू ही करने वाले थे कि कुछ छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी
#SundarPichai | Sundar Pichai | Stanford University | Project Nimbus
दैनिक भाष्कर की रिपोर्ट में कहा गया- राम मंदिर में 200 करोड़ का चढ़ावा चोरी हुआ.
मुझे दैनिक भाष्कर की खबर पर जरा भी भरोसा नहीं है. राम मंदिर में ऐसा हो ही नहीं सकता.
सरकार को तुरंत इसका खंडन करना चाहिए. खंडन न करने से खबर को बल मिलेगा.
ये भक्तों की आस्था का सवाल है
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी बहुत बड़ा मुद्दा है। बताता है कि मंदिर के प्रबंधन से जुड़े लोग भ्रष्ट हैं और बड़े नास्तिक हैं। इन सबको केंद्र और राज्य सरकार ने नियुक्त किया है।
विपक्ष को इसे दमखम से उठाना चाहिए और मुद्दे को घर-घर तक पहुँचाना चाहिए।
संघ परिवार और भाजपा कूड़ेदान बन गये हैं देश भर का कूड़ा कचरा स्टोर हो रहा है एक दिन ऐसा आयेगा जब जब ये कचरा ही रह जायेंगे।
इसके तीन मुख्य पात्र हैं।
1-संघप्रमुख डॉ0 मोहन भागवत
2-नरेन्द्र मोदी
3-अमित शाह
शेष तमाशबीन हैं और सत्ता की शहद चाट रहे हैं।
राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का नाम लेने पर जनता इन्हें दौड़ा लेगी।
अमेरिकी दूतावास से सामने से सुरक्षा बैरियर हटाना देवयानी के मामले में अमेरिकी को ‘लाल आँख’ दिखाने का ही एक और चरण था।
ख़ैर ये तो मनमोहन सिंह सरकार के ज़माने की बात थी।
आज कोई विरोध स्वरूप एक तिनका भी हटा के दिखा दे!
जिस पार्टी में विलय हुआ उस पार्टी के नेताओं को पता ही नहीं की उनके पार्टी में कौन आ गए हैं!
एनसीपी (Nationalist Citizen Party) पार्टी अब NDA में बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है!
यह पार्टी राजनीति की राजेश एक्सपोर्ट कंपनी बन गयी है जिसने पांच सालों में बिहार की इकॉनमी के पांच गुणा अधिक एक्सपोर्ट कर दिया था और देश को पता भी नहीं था
बंगाल में जनता के नाम पर आरएसएस के गुंडे ठीक उसी तरह टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों पर हमले कर रहे हैं, जिस तरह 1975-76 में गुजरात में छात्र आंदोलन की आड़ में संघी गुंडों ने कांग्रेस के विधायकों और उनके परिवार व घरों पर हमले कर उन पर इस्तीफे का दबाव बनाया था।
दल-बदल के ऑपरेशन में यह नया कीर्तिमान! ढाई साल पहले रजिस्टर हुई एक पार्टी. उसका न कोई MLA-MP न कोई मुखिया-प्रधान! रातोंरात छप्पर फाड़कर उसकी झोली में गिर पड़े 20 अनुभवी और गणमान्य सांसद! कमल खिलखिला रहे!
इतिहास में पहली बार 20 सांसदों ने एक ऐसी पार्टी में Merger किया, जिसका न तो उन्होंने कभी नाम सुना.. न मुखिया का पता... न ऑफिस का पता.. न सिंबल का पता...
अंदर गये तो भंडारा खत्म, बाहर निकले तो चप्पल गायब 😀
यही स्थिति है तृणमूल के भगोड़ों की - मारे मारे फिर रहे हैं.
जिस नेशनलिस्ट सिटीजेन्स पार्टी में विलय का दावा किया उसके महासचिव ऋतिक मंडल कह रहे हैं इन्हे नहीं लेंगे. बदनामी होगी.
लोकतंत्र और संसद का तमाशा बना दिया बीजेपी ने.
You must have heard of Shell companies for laundering money
Now, introducing Shell political parties for laundering MPs
Bought to you by Tadipar
Paid for by Indian taxpayers.
Valid only in Vishwaguru.
Yet another history created in legislative architecture. Suddenly. An unknown Registered Unrecognised Political Party #RUPP known as Nationalist Citizen Party acquires 20 rebel #TMC Lok Sabha Members without contesting a single seat. And becomes the third largest party. Doesn’t have a list of office bearers and never submitted any details?