अखिलेश दो बार हारे ।
तेजस्वी दो बार हारे ।
चाणक्य शरद पवार पार्टी नहीं बचा पाये ।
बाहुबली उद्धव ठाकरे की पार्टी टूट गई ।
महान केजरीवाल अपनी सीट हार गये ।
ममता दो बार अपनी सीट हारीं ।
स्टालिन अपनी सीट हार गये ।
नवीन पटनायक अपनी सीट हार गये ।
लेकिन सीखने को तैयार नहीं । अंहकार, स्वार्थ और मैं । राष्ट्रीय सोच विहीन । 1/2
पंजाब में शिरमोणी अकाली दल - खत्म
बिहार में JDU(जनता दल यूनाइटेड ) - खत्म
महाराष्ट्र में शिवसेना ( उद्धव ) - खत्म
हरियाणा में जे जे पी (JJP ) - खत्म
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी - खत्म
जम्मू कश्मीर में पीडीपी ( महबूबा ) - खत्म
आंध्र प्रदेश में YSR कांग्रेस - खत्म
बिहार में LJP ( लोजपा ) लगभग खत्म
उत्तर प्रदेश में RLD ( लोक दल ) - खत्म
हरियाणा में INLD ( इनेलो ) - खत्म
कर्नाटक में JDS जनता दल सेक्युलर - खत्म
इन सभी पार्टियों में एक बात ही कॉमन है,
वो ये कि ये सब बीजेपी के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे.
सब इस टाइम विलुप्त प्रजाति बन चुके हैँ
जिससे भी हाथ मिलाया, उसको ही डुबाया.
आपके हिसाब से और कौन कौन सी पार्टियां इनके साथ जुड़ी हुईं हैँ जिनका सफाया निश्चित है.
बोलिये???
पूजा सिंह राजपूत और मोहम्मद कैफ़ की प्रेम कहानी धर्मों से ऊपर उठ कर शादी के बंधन में, बंधने तक का सफ़र है।
राजपूत और मुस्लिम समाज अधिक्तर इंटरकास्ट मैरिज को बढ़ावा देता आया है, इतिहास प्रमाण देता ……see more
ईरानी बच्चा:- आप मेरे लिए दुआ करें मैं शहीद हो जाऊँ.
अली खामेनेई:- आप पहले बड़े हो जाएं, अच्छी तालीम और इल्म हासिल करें, इस्लाम के लिए फायदेमंद बने, 80-90 साल जिए, उसके बाद शहीद हो जाएं.
इज़राइल इस क़ौम को हराने का ख्वाब पाल रहा है जिसका बच्चा बच्चा शहादत को तैयार बैठा है.
• Sarfarosh was the 1st Indian Film to call
out Pakistan-sponsored proxy wars
• Didnt Release Dangal in Pakistan
without National Anthem
• Never done pro Pak Spy Universe films
• Rejected Bajrangi Bhaijaan
• Never shot a single film outside India
• Didn’t charge a single rupee for the Incredible India campaign
• Consistently called out extremism across the Border on-screen
For the last 10 years been called Anti-national Received D€ath threats yet never said a word
Stayed silent Stayed classy !!
#AamirKhan
#SitaareZameenPar
रविवार को बिहार में दो बड़ी सभाएं हुई। पहली ऊर्जा और उत्साह से भरे युवा नेता चिराग पासवान की तो दूसरी धीर गंभीर और अनुभवी नेता उपेन्द्र कुशवाहा की। उपेन्द्र कुशवाहा मुजफ्फरपुर में और चिराग पासवान आरा में थे। अलग - अलग इलाके में हो र���ी अलग - अलग सभाओं पर बिहार भर की निगाहें टिकी थी। पक्ष - विपक्ष, सबकी। दोनों अपने पुराने दल को ��ो चुके हैं। दोनों ने आज अपने नए दल और निशान के साथ बिहार विधानसभा के लिए चुनावी शंखनाद किया। खासकर चिराग पासवान के बिहार चुनाव लड़ने के ऐलान और उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी की खबरों के बीच आज का दिन अहम था।
दोनों नेताओं ने यह साफ किया कि वे एनडीए में रहेंगे लेकिन सीटों को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे। चिराग पासवान और और उपेंद्र कुशवाहा अपनी सियासी ताकत जानते हैं इसलिए एनडीए को इसका एहसास करा ���हे हैं।
दोनों नेताओं की पार्टी पिछले बिहार चुनाव में करीब 5 दर्जन सीटों पर फैक्टर थे। इनमें करीब 50 सीटें वह थीं जहां एनडीए के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए एनडीए किसी भी हालत में इन दोनों को खोना नहीं चाहता।
दोनों नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड भी बड़ा दिलचस्प है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव से हर बार दोनों नेताओं ने पाला बदला है। उपेन्द्र कुशवाहा 2010 में जदयू में थे, 2015 का चुनाव भाजपा के साथ लड़ा और 2020 में तीसरा मोर्चा बनाया था। वहीं लोजपा 2010 में राजद के साथ लड़ी, 2015 में भाजपा गठबंधन का हिस्सा बनी और 2020 में अकेले चुनावी मैदान में कूदी। इसलिए फिलहाल वे एनडीए में रहने की बात भले कहें लेकिन चुनाव तक उनका मन न बदले, इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।
पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए गठबंधन को 39 सीटों का नुकसान पहुंचाया। इनमें 32 सीटों पर जदयू उम्मीदवारों क�� हार हुई। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी भी 13 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों के हार का कारण बनी इनमें 5 सीटें जदयू की थी। लिहाजा जदयू 43 सीटों पर सिमट गई। उपेन्द्र कुशवाहा और चिराग पासवान एनडीए के कमजोर और महागठबंधन के शानदार प्रदर्शन के "एक्स फैक्टर" थे। एनडीए इस बार यह जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है। लोकसभा चुनाव में लगे झटके के बाद पार्टी अलर्ट है। वोट काटने का या छिटकने का कोई जोखिम एनडी�� नहीं उठाएगी। इसलिए दोनों नेता दबाव बना रहे हैं।
बीते दो- तीन दिन से बिहार में एनडीए के सीट शेयरिंग ��ा एक फॉर्मूला हवा में तैर रहा है। इसके अनुसार जेडीयू को 102-103, बीजेपी को 101-102, चिराग पासवान की पार्टी को 25-28, जीतन राम मांझी को 6-7 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 4-5 सीटें मिल सकती हैं। लेकिन दोनों नेताओं ने आज इस फॉर्मूला को खारिज कर दिया है।
दोनों महत्वाकांक्षी हैं, दोनों की मजबूत पकड़ है। चिराग पासवान को पासवान वोटरों के अलावा युवा वोटर का भी एक तबका पसंद करता है। चिराग पासवान को लगता है कि वे दलित मुख्यमंत्री की कमी पूरी कर सकते हैं। भाजपा का किसी भी राज्य में दलित मुख्यमंत्री नहीं है। भाजपा ने राजस्थान और महाराष्ट्र में ब्राह्मण, यूपी में राजपूत, दिल्ली में बनिया, हरियाणा और मध्यप्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री बनाया, वहीं छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है लेकिन अनुसूचित जाति का कोटा खाली है। चिराग इस जगह को भरना चाहते हैं। हालांकि भाजपा किसी दूसरे दल के नेता को मुख्यमंत्��ी क्यों बनाएगी, यह सवाल बना हुआ है। लेकिन उसका भी उपाय ढू��ढ़ा जा रहा है।
वहीं उपेंद्र कुशवाहा कोइरी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं, जो पारंपरिक रूप से एनडीए का वोटर माना जाता है लेकिन लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोटरों ने जो हलचल दिखाई, उसने एनडीए को डरा दिया। कुशवाहा वोटरों ने कई सीटों पर एनडीए के खिलाफ इंडिया अलायंस को वोट किया। इसी का परिणाम था कि लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहने के बावजूद उपेन्द्र कुशवाहा को भाजपा ने राज्यसभा भेज कर कुशवाहा ��ोटरों को रिझाने की कोशिश की।
एनडीए और इंडिया अलायंस के बीच सबसे बड़ा अंतर यही दोनों हैं।अगर वे दोनों एनडीए में बने रहे तो सबसे ज्यादा लोकप्रिय होने के बावजूद तेजस्वी यादव का सीएम की कुर्सी तक पहुंचना मुश्किल होगा। लेकिन अगर वे बिखरे तो तेजस्वी उस लाइन को पार कर जाएंगे जिसे 2020 में वे छूते - छूते रह गए थे।
(( बिहार चुनाव पर यह मेरी पहली पोस्ट है। अब लगातार लिखूंगा। कमी - बेसी बताइएगा तो अच्छा ल��ेगा।))
#BiharElections2025
इस देश में चाय पर तो बहुत चर्चा होती है, लेकिन क्या वो लोग जो हाड़-मांस गलाकर चाय की एक-एक पत्ती बागान ���े चुनकर आपके कप तक पहुंचाते हैं, उनपर चर्चा होती है? असम में लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की सालाना चाय उत्पादन करने वाली चाय इंडस्ट्री मजदूरों को 200-250 रुपये मजदूरी दे रही है.
बकरीद एक ऐसा त्यौहार है जिसमें हर शहर और कस्बे में आर्थिक ऐक्टिविटी बिल्कुल टॉप पर पहुंच जाती है
देहात में गैर मुस्लिम समाज के लोग जो बकरी पालन करते हैं, इस त्यौहार का इंतजार करते हैं और बकरों की बिक्री से एक एक आदमी इतनी अर्निंग करता है कि साल या आधे साल का खर्च इसी से निकल आता है
पूरे मु���्क के पैमाने पर देखा जाए तो सैकड़ों करोड़ रुपए एक सूबे में अकेले इकॉनमी में पंप होते हैं और ��ेश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत होती है, आपको पसंद नहीं, कोई बजट नहीं मगर अपना bias और अपने लिमिटेड एक्सपीरिएंसको समाज पर मत लाड़िए
बकरीद के अगले कई दिन मुस्लिम, सभी धर्मों के लोगों को फ्री मटन भी देते हैं, 70-75 परसेंट नॉनवेज खाने वालों के देश में हर आदमी इतना अफोर्ड नहीं कर पाता मगर बकरीद की वजह से लोगों को प्रोटीन मिल जाता है और काफी दिन लोग खाते हैं
खास बात ये है कि अक्सर खबरों और मीडिया के स्टाफ मे��� जो लोग हैं वह इससे अंजान बने रहते हैं, इनको अपनी कॉलोनी और शहर के चंद मोहल्लों के बाहर बसे बत्तीस लाख स्वायर किलोमीटर में फैले हिन्दुस्तान और इसकी सामाजिक संरचना की कितनी समझ है, इसका अंदाजा आप लगा सकते है
इनको सैकड़ों साल से डेवलप हुए भारतीय समाज में ग्राउंड पर हिंदू और मुस्लिम की इकॉनमिक और सोश��, कल्चरल और सामाजिक रिश्तों से क्या लेना देना?
जब जहन रेस्ट्रिक्टेड कर लिया जाए और एक छोटे दायरे के पार देखना ही नहीं है, तो इसकी जरूरत भी नहीं होती, बहरहाल अपने शहर की ही गलियों और मोहल्लों, रियल इशूज से नावाकिफ लोगों को इस विशाल देश और इसके मल्टीपल एस्पेक्ट्स से कितना लेना देना है ये तो आप इन अखबारों का हाल देख कर ही समझ सकते हैं
--Shams Ur Rehman Alavi
Baqrid boosts economy in a huge way. Hundreds of millions in each city across India, innumerable Hindus from rural parts arrive with goats.
They sell them in goat markets in cities before Baqrid & return with cash that helps them run their household.
Locally, on Baqrid, poor keep coming to Muslim homes & take mutton away, free. Big push to economy. Billions pumped in economy.
--Shams Ur Rehman Alavi
#Baqrid #Iduzzuha #Festival #India #IndianMuslim #IndianMuslims #NonVeg #mutton #meat #nonvegetarian #IndianEconomy #Economy #Hindu
@AjayKumarJourno@RahulGandhi आदरणीय सर, राहुल गाँधी ने गाली नहीं दी है। तीखा हमला किया है और उ��मे आप जनाब नहीं चलता है। बाक़ी विपक्ष के नेताओं पर सवाल उठाना आसान बात है।
A legacy lives on. 🇮🇳
My Memories of I.N.A. & Its Netaji by Major General Shah Nawaz Khan
a powerful firsthand account from one of Netaji Bose’s closest commanders is now republished
🛒 Get your copy: https://t.co/Z9HfjahLab
#INA#Netaji#IndianHistory#FreedomStruggle
18 साल का इंतज़ार अब खत्म हो गया।
यह जीत बहुत मायने रखती है।
कोहली - टी 20 चैम्पियन
कोहली - चैम्पियन ट्रॉफी
कोहली - IPL चैंपियन
कोहली - 2027 में वर्ल्ड कप जीत भी हासिल करेंगे। ❣️
शुभकामनाएं RCB और उनके फैंस को और किंग कोहली को ❣️
फोटो - AI
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