जब बहुत दिनों तक अपने परिवार में कोई विवाह आदि उत्सव न हो तो ऐसे में किसी दूर के रिश्तेदार के यहां से कोई निमंत्रण आ जाये तो मग्न हो कर उस उत्सव में शामिल होने के लिये अतिरिक्त उत्साह में लोग निकल पड़ते हैं।कुछ ऐसा ही हुआ कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में।