Vijay Thalapathy की इस Video ने सारे record तोड़ दिए है 2 घंटे में 100 million
इसी वजह से कुछ लोगों के दबाव में आकर meta इस तरह की videos को delete कर रहा
करो RT दबा कर dekhte है कितना delete करते है #VijayTNCM
Breaking News
व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट का Fox News पर बड़ा दावा
"प्रधानमंत्री मोदी ने U.S. एनर्जी, ट्रांसपोर्टेशन, खेती के प्रोडक्ट्स की $500B की खरीद का वादा किया... यह एक बहुत बड़ी डील है, और अमेरिकी वर्कर्स, बिज़नेस और कंज्यूमर्स के लिए एक बड़ी जीत है।"
दुनिया के सबसे बदनाम यौन अपराधी और मानव तस्कर जैफरी एप्स्टीन के काले कारनामों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आया है।
एक ई मेल में यहाँ तक लिखा है कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एप्स्टीन से
'सलाह ली और अमेरिका के राष्ट्रपति के लाभ के लिए इज़राइल में नाचा और गाये।'
वे कुछ हफ्ते पहले मिले थे।
उल्लेखनीय है कि मोदी और ट्रंप की 25,26 जून 2017 को अमेरिका में मुलकात हुई थी। उसके बाद मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 को इजरायल दौरे पर गये थे।
कांग्रेस ने इस नए खुलासे पर मोदी और सरकार से जवाब मांगा है।
ग्रीनलैंड की पॉलिटिशियन टिली मार्टिनुसेन की बातें सुनिए
“हम अमेरिकियों की तरह अमीर नहीं बनना चाहते। देखो वे कितने लालची हैं, अपने दोस्तों पर भी हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।”
“भले ही हमारी ज़मीन के नीचे मिनरल और तेल हों और उनकी कीमत कहीं ज़्यादा हो फिर भी हम खुद को नहीं बेचेंगे।”
“हम जानते हैं कि अलास्का में मूल निवासियों और मूल अमेरिकियों के साथ क्या हुआ। उनकी ज़मीन छीन ली गई, और उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया गया।”
“हम देखते हैं कि ट्रंप अपने आस-पास किन लोगों को रखते हैं व्हाइट पावर वाले लोग और हम व्हाइट नहीं हैं। हम अश्वेत लोग हैं।”
“हम जानते हैं कि हमारे अधिकार शायद छीन लिए जाएंगे।”
जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई —
यासिर अराफात फूट-फूट कर रो पड़े। बोले — “मेरी बहन चली गई।”
ग़ाज़ा में कई घरों में उस दिन खाना नहीं बना।
ईरान, इराक, फिलिस्तीन… हर जगह मातम था।
ऐसा था भारत का सम्मान। ऐसी थी इंदिरा की विदेश नीति।
कल राहुल गांधी ने जो कहा, वो सिर्फ प्रशंसा नहीं —
वो उस नीति पर गर्व था,
जिसने भारत को दुनिया की नजरों में ऊँचा किया था।
इंदिरा ने यासिर अराफात को आतंकवादी नहीं, स्वतंत्रता सेनानी माना।
ईरान से तेल नहीं, संस्कृति की साझेदारी की।
इराक से सिर्फ सौदा नहीं, भरोसे का रिश्ता बनाया।
1971 में जब पूरी दुनिया भारत के खिलाफ थी,
ईरान, इराक और फिलिस्तीन ने विरोध नहीं किया —
क्योंकि वो जानते थे, भारत न्याय कर रहा है।
और आज...
भारत ग़ज़ा पर चुप है।
इजरायल की गोद में बैठकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” का जाप कर रहा है।
शब्द बचे हैं, आत्मा खो गई है।
ऐसे में इंदिरा जी याद आती हैं —
क्योंकि वो धर्म नहीं, देश को आगे बढ़ाती थीं। 🇮🇳
#IndiraGandhi #RahulGandhi #घोरकलजुग
https://t.co/JnNH1wSAyy
NBT की पहल: स्क्रीन से आजादी
जानिए कैसे मोबाइल से ही तय करें मोबाइल को इस्तेमाल करने की समय सीमा
#screenseaazadi#mobileaddiction
"देश में 142 करोड़ लोगों के आधार बने हैं। क्या उनमें से एक भी आधार ऐसा है जिसपर पता 0 लिखा हो? अगर आधार पर किसी का पता 0 नहीं है, तो बिहार की वोटर लिस्ट में लाखों लोगों का एड्रेस 0 कैसे है?"
- राजीव रंजन, वरिष्ठ पत्रकार
कल राहुल गांधी ने वोट चोरी के भयंकर सबूत दिए थे. मतलब एक कमरे के मकान में 80 वोटर हैं.
अब इंडिया टुडे के पत्रकार बैंगलोर के उस मकान पर पहुंचे.
हाउस नंबर- 35, इस एक कमरे के मकान में 80 वोटर रजिस्टर हैं. ये मकान BJP के आदमी का है.
गजब ही खेल चल रहा है.
“द केरल स्टोरी” को अवॉर्ड देने के NFDC के फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारतीय फ़िल्म और टेलीविज़न संस्थान, पुणे छात्र संघ का बयान
हम, FTII के छात्र समूह की ओर से, ‘द केरल स्टोरी’ को एनएफडीसी द्वारा सम्मानित किए जाने के फ़ैसले की सख़्त मुख़ालफ़त करते हैं। इस फ़िल्म को 17वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय डॉक्युमेंट्री और शॉर्ट फ़िल्म फेस्टिवल (Mumbai International Film Festival) में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम (NFDC) द्वारा अवॉर्ड दिया गया है।
यह फ़िल्म एक राजनीतिक अजेंडा पर आधारित प्रोपेगैंडा है, जिसे एक सच्ची कहानी के लिबास में पेश किया गया है। ‘द केरल स्टोरी’ को एक कट्टरपंथी और घृणा फैलाने वाले संगठन से जुड़ी विचारधारा का समर्थन हासिल है। इस फ़िल्म में इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को झूठे आरोपों और घृणित कल्पनाओं के ज़रिये निशाना बनाया गया है। यह फ़िल्म पहले ही हमारी सामाजिक एकता, भाईचारे और शांति को नुक़सान पहुंचा चुकी है।
ऐसी फ़िल्म को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार देना हमारे देश की फ़िल्म इंडस्ट्री को एक ऐसे रास्ते की तरफ़ ले जा रहा है जहां राजनीतिक और सांप्रदायिक हस्तक्षेप का डर है। एक ऐसा माहौल बन रहा है जहां रचनात्मक अभिव्यक्ति को कुचल दिया जाएगा, और स्वतंत्रता पर पहरा बिठा दिया जाएगा।
जब कोई सरकारी संस्था इस तरह की नफ़रत फैलाने वाली फ़िल्मों को सम्मानित करती है, तो यह केवल एक फ़ैसला नहीं होता — यह हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला होता है। यह कला की उस ताक़त को कमज़ोर करता है जो समाज को जोड़ने, सच्चाई को उजागर करने और इंसाफ़ की बात करने के लिए होती है।
हम इस बात को दोहराते हैं कि हम ऐसे किसी भी नैरेटिव को स्वीकार नहीं करेंगे जो नफ़रत फैलाये, या इंसानियत को बांटे। हम अपने इस इंडस्ट्री को, जिसे हम प्यार करते हैं, ऐसे प्रोपेगैंडा और घृणा से भरे विचारों से बचाना ज़रूरी समझते हैं।
हमारी लड़ाई केवल एक फ़िल्म से नहीं है, बल्कि उस सोच से है जो कला का इस्तेमाल करके नफ़रत फैलाती है। और हम — जो अलग-अलग सोच, पहचान और संस्कृति से आते हैं — इस चुप्पी और हिंसा के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।
अंबानी ने बैंक से मदद मांगी। 49000 करोड़ का कर्ज लिया। इज्जत के साथ कर्ज मिला, फिर मोदी सरकार ने इसे 455 करोड़ में सेटल कर दिया। 48,545 करोड़ हजम।
एक किसान सिर्फ एक बोरी खाद मांग रहा है। उसकी भी कीमत चुकाएगा। लेकिन खाद के बदले उसे लाठी से पीटा जा रहा है।
यही अमृतकाल है!