अगर 6 महीने का सर्टिफिकेट ही पर्याप्त है, तो फिर MBBS की 5.5 साल की पढ़ाई क्यों?
6 महीने का सर्टिफिकेट ≠ 5.5 साल की MBBS + 3 साल की MD/MS
डिग्रियाँ नहीं, तपस्या बोलती है।
शॉर्टकट नहीं, वर्षों की साधना बोलती है।
सर्टिफिकेट से पहचान मिल सकती है,
ले��िन विशेषज्ञता नहीं।
सफेद कोट पहन लेना आसान है,
उसका भार उठाना कठिन है।
नीतियाँ बदल सकती हैं,
लेकिन विज्ञान के सिद्धांत नहीं।
मरीज कोई प्रयोग नहीं,
विश्वास कोई समझौता नहीं।
चिकित्सा का सम्मान बचाइए,
मरीज की सुरक्षा सर्वोपरी रखिए।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा CCMP के आधार पर BHMS चिकित्सकों के पंजीकरण संबंधी निर्णय ने चिकित्सा जगत में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
आधुनिक चिकित्सा केवल औषधिय���ं का ज्ञान नहीं, बल्कि वर्षों का वैज्ञानिक प्रशिक्षण, क्लिनिकल अनुभव,आपातकालीन प्रबंधन और विधिक उत्तरदायित्व का समन्वय है।
यदि किसी नीति से चिकित्सा शिक्षा के स्थापित मानकों, रोगी सुरक्षा या नियामकीय स्पष्टता पर प्रश्न उठते हैं, तो उसका व्यापक वैज्ञानिक, विधिक और सार्वजनिक विमर्श होना आवश्यक है।
हम मांग करते है :-
इस निर्णय की स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षा कराई जाए।
सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श किया जाए।
लंबित न्यायिक कार्यवाहियों के अंतिम निर्णय का सम्मान किया जाए।
रोगी सुरक्षा और वैज्ञानिक चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
नीति का मूल्यांकन सुविधा से नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।
@PMOIndia @MoHFW_INDIA @narendramodi @JPNadda @CMOMaharashtra @Dev_Fadnavis @mieknathshinde @mrhasanmushrif @NMC_BHARAT @Central_MARD @mybmc @ANI @thewire_in @the_hindu @NewIndianXpress @Abhinavpinch @khabar_gaon @jist_news @TheLallantop @BBCHindi
Requiring ₹25 lakh bank guarantee from doctors selected in NEET SS before joining Super Speciality is unfair and impractical. Doctors from middle-class families may lose the opportunity for higher medical education due to this financial barrier. Govt must revoke the BG rule.
Sir, I would like to draw your attention towards the atrocities being committed on first year residents in Maulana Azad Medical College Delhi . In orthopaedics department First year PG pays the Lunch bill of SRs,2nd &3rd year PGs & interns. It costs around 20K ₹/month/resident.
BHU में डॉ सत्या, सर्जरी JR-1 ने सुसाइड का प्रयास किया। अब वहाँ आतंक का माहौल है। सच छुपाने के लिए आंतरिक जांच कमिटी बना दी। जबकि यह पुलिस केस है। स्टूडेंट्स, पै��ेंट्स को मीडिया से बात न करने की हिदायत दी गई है। यह मेडिकल कॉलेज है या कत्लगाह? स्टूडेंट्स पैरेंट्स खुलकर सामने आएं।
सलंग्न - BJP घोषणा पत्र
चुनाव से पहले बीजेपी ने राजस्थान में अपने चुनावी घोषना पत्र में राजस्थान प्रदेश की जनता और बेरोजगार MBBS डॉक्टर्स से वादा किया था कि वो सत्ता में आते हैं तो पांच साल में 15000 डॉक्टर्स की भर्ती करेंगे , सरकार अपने सत्ता के सफलतम दो वर्ष पूरे करने को है और 2 वर्ष में 6000 डॉक्टर्स की भर्ती हो जानी चाहिए थी जबकि राजस्थान में भर्ती हुई है सिर्फ 1700 डॉक्टर्स की , उन 1700 पोस्ट पर करीब 17000 हजार आवेदन आए थे , आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में MBBS डॉक्टर्स भी बेरोजगार घूम रहे हैं , वही पूरे प्रदेश में हर जिले में पीएचसी सीएचसी पर चिकित्सकों की पोस्ट खाली पड़ी हुई हैं आम जनता इलाज के लिए दूर दराज बड़ी सिटीज में जाने को मजबूर है ।
क्या भारतीय जनता पार्ट��� @BJP4India प्रधानमंत्री @narendramodi या प्रदेश के मुखिया @BhajanlalBjp @RajCMO @jawaharbedam की कोई जवाबदेही नहीं बनती है चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की ??
विपक्षी पार्टी कांग्रेस @RahulGandhi @INCIndia @ashokgehlot51 @TikaRamJullyINC @SachinPilot तो अपनी विपक्ष की भूमिका भूल ही गई है उन्हें तो अपनी घर की लड़ाई से ही फुर्सत मिले तब राजस्थान प्रदेश की जनता के सरोकार के बारे में सोचे। @8PMnoCM @Poojasharma_DB
#Jaipur: मौसमी बीमारियों के बीच 600 डॉक्टर्स की नौकरी पर संकट
बात प्रदेश में अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस(UTB) पर लगे चिकित्सकों की सेवा से जुड़ी, पिछले ��ंबे समय से प्रदेशभर के चिकित्सा संस्थानों..
#RajasthanWithFirstIndia @RajGovOfficial @ml_vikas
"I am waiting outside the student cell, but still haven’t received any response or update from the college management."
Tomorrow is my proffesional exams (1st paper pathology)
इनकी पीड़ा वाजिब है!
इनको शिक्षा के अलावा अन्य सभी दायित्वों से मुक्त करने का अब वक़्त आ ग���ा है !
इनको प्रशासनिक दायित्व जैसे प्रिंसिपल, चिकित्सालय अधीक्षक,हॉस्टल वार्डन और राज्य की फ्लैगशिप योजनाओं MNDY, MNJY का सुपरविजन जैसे ग़ैर शैक्षिक दायित्व पकड़ा दिए गए हैं, इनके साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस के चलते राज्य के मेडिकल कॉलेज़ों में चिकित्सा शिक्षक अपने कार्य दायित्व की मूल भावना के अनुरूप UG छात्रों और PG चिकित्सकों को अच्छे से पढ़ा नही पा रहे हैं। यह बहुत ही पीड़ादायक स्थिति है और उन्होंने अपने इस ज्ञापन से अपने मन की इस पीड़ा को आज सार्वजनिक भी कर दिया है, ज्ञापन को पढ़ कर प्रतीत होता है कि इससे इनका म��� भी बहुत व्यथित है। इस स्थिति में यह कहना भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रदेश में इसी कारण से एलोपैथी चिकित्सा पद्धति की “भ्रूण-हत्या” हो रही है और राज्य में बन रहे नये चिकित्सकों को चिकित्सा शिक्षकों के प्राइवेट प्रैक्टिस और अन्य दायित्वों में व्यस्त रहने के कारण वांछित शिक्षा और ज्ञान मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसके गंभीर परिणाम आगामी दशक में हमारे सामने आयेंगे !
साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षकों को निजी प्रैक्टिस की छूट के कारण ना चाहते हुए भी चिकित्सा शिक्षक निजी प्रैक्टिस में उलझे रहते हैं, जिसके चलते सरकारी मेडिकल कॉलेज चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सक की समय पर उपलब्धता नहीं मिलने के कारण प्रतिदिन सैंकड़ों मरीज़ असमय काल गति को प्राप्त हो रहे हैं ।
अब समय आ गया है कि केंद्र और दिल्ली सहित अन्य राज्यों के मेडिकल शिक्षकों के लिए लागू नियमों और प्रचलित व्यवस्था के अनुरूप राजस्थान राज्य में भी तत्काल मेडिकल शिक्षकों के लिए अनिवार्य NPA का नियम सृजित कर उनको पूर्णत शैक्षणिक कार्य का ही दायित्व देना चाहिए ताकि वो सब चिकित्सा शिक्षा के प्रति समर्पित रहें । जिसका उल्लेख आज उदयपुर के चिकित्सा शिक्षकों ने मुखर हो कर अपने ज्ञापन में किया है !
इनकी मंशा के अ��ुरूप प्रिंसिपल, चिकित्सालय अधीक्षक और हॉस्टल वार्डन जैसे ग़ैर शैक्षिक दायित्व अब चिकित्सा अधिकारियों ग्रुप -2 के सुपुर्द कर ��भी चिकित्सा शिक्षकों को इन प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर देना चाहिए ताकि वो अपना पूरा फोकस नव चिकित्सकों के भविष्य निर्माण में लगा सकें।
निश्चित ही इस क्रांतिकारी कदम से राज्य में चिकित्सा शिक्षा का स्तर अपना सर्वोच्च मुक़ाम हासिल करेगा और राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन करने वाले स्टूडेंट्स अपनी शिक्षा और स्किल के बल पर राज्य का नाम पूरे देश में रोशन करेंगे।
🙏
डॉ अजय चौधरी
अ���्यक्ष, अरिस्दा
@arvindchotia @8PMnoCM @rpbreakingnews @1stIndiaNews @sarkari_doctor@pantlp @zeerajasthan_ @Tv18Rajasthan
और जो ये भांति–भांति की fee ये कॉलेज प्रशासन वसूल रहा है ये जा कहां रही है?
Sports के नाम पर सालाना लगभग 1.5 करोड़ ₹ स्टूडेंट्स से वसूल रहे हो कोनसा खेल मैदान ऐसा है जिसपर कोई खेल सके तो बताओ प्रिंसिपल साहब @Principalspmc है कोई जवाब ? #MedTwitter#Medical@DrDhruvchauhan
SPMCकॉलेज प्रशासन विद्यार्थियों से Fine के नाम पर मनमर्जी की वसूली कर रहा है:हाल ही 023 बैच द्वारा जूनियर्स को फ्रेशर्स दी गई थी उसमें कुछ दीमक खाई हुई कुर्सियां टूटने से कॉलेज प्रशासन ने स्टूडेंट्स से 2.5 लाख की वसूली(Fine)का फरमान जारी कर दिया!
@Principalspmc ? @DrDhruvchauhan
“मान लीजिए कि इंसानों और जानवरों, दोनों की बीमारियों के इलाज की सेवाएँ आवश्यक हैं, और दोनों को ही इलाज मिलना चाहिए। लेकिन यदि इंसान के इलाज के लिए डॉक्टर को 28,000 रुपये दिए जाते हैं, जबकि जानवर के इलाज के लिए 56,000 रुपये—यानी दोगुना—तो यह कहाँ तक उचित है?”@nhm_rajasthan
यूटीबी डॉक्टर्स जहां पर लगे है उनको हटाया जा रहा है और नई वैकल्पिक व्यवस्था के लिए निर्देश दिए जा रहे है ये कहा तक उचित है आज यूटीबी डॉक्टर्स ने कोविड जैसी महामारी में ओर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में समय समय पर कार्य किया कृपया उचित न्याय करे 🙏
सोचनीय बात है कि जब ऑन कैमरा तथाकथित प्रशासनिक अधिकारी इस भाषा शैली का प्रयोग कर रहा है , बाकी तो इनकी क्या ही कार���य शैली रहती होगी ? गली के मवाली जैसी भाषा हो गई है अधिकारियों की ! @Sarkaridoctor12 @sarkari_doctor @zeerajasthan_ @RamswaroopRaw10 @UnityJat @8PMnoCM @8PMnoCM
मेडिकल ऑफिस भर्ती मामले में सरकार को गौर करना ज़���ूरी है - आरएमसी से सर्टिफिकेट नहीं बनने से कई कैंडिडेट बाहर हो सकते है — च���नाव के दौरान 15000 डॉक्टर की भर्ती निकलने की घोषणा की गयी थी लेकिन अभी मात्र 1220 भर्ती निकाली गयी है - 5000 पद ख़ाली पड़े हैं ! नेट पीजी कॉउन्सलिंग के बाद 1000 पद और रिक्त हो जाएँगे !