सावरकर के प्रपौत्र को RSS का सच इस कदर जनता के सामने नहीं लाना था। वो या तो कांग्रेसी हो गए हैं या वामपंथी? अंग्रेजों के सामने दया याचिका! वो भी 10 बार! यह शर्म की बात है।
सावरकर का परपोता अगर राहुल गांधी की लाइन पर अपने दादा का सच कोर्ट के सामने सामने रख रहा है तो भक्तों को सोचना चाहिए कि वो किस मुगालते में हैं।
जिस वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे को बीजेपी महान क्रांतिकारी बताती है
उनके नाम पर देश मे एक भी योजनाये नहीं चलायी? एक स्मारक तक नहीं बनवाया?
किसी गली का नाम तक उनके नाम पर नहीं रखा गया तो किस बात के महान क्रांतिकारी हैं ये?
अपने बच्चों के नाम तक उनके नाम पर नहीं रखें?
आखिर क्यों पूछता है भारत?
🔥 आप सभी से निवेदन है कृपया एक बार जरूर पढ़ें और अपनी राय कमेंट में लिखें,,,🔥
🚨 2014 में एक चूहा पार्टी बनी थी....
🔸जिनके पास बढ़ती महंगाई ,
🔸गैस सिलेंडर 300 का,
🔸पेट्रोल 35 रुपया लीटर ,
🔸डीजल 30 रुपया लीटर,
🔸गिरता रुपया,
🔸जनलोकपाल बिल,
🔸विदेशों से कालाधन वापिस,
🔸2 करोड़ रोजगार,
🔸100 स्मार्ट सिटी,
🔸100 पीजीआई और एम्स,
और विकसित भारत , जैसे अनेकों मुद्दे थे....,
👉 अन्ना हजारे दिल्ली के जंतर मंतर पर बोरी बिस्तर लगाकर बैठे,
👉 देश के बच्चे, फिल्मी एक्टर मॉडल सिंगर हीरोइन, कवि ,
बाबा लोग भी समर्थन में आए,
📢 आंदोलन कांग्रेस के खिलाफ इतना तेज हुआ कि चंद ही दिनों बाद देश की सता पलट दी गई और देश की चाबी बीजेपी के हाथ सौंप दी गई , नरेंद्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने.....
👉 बड़े बड़े जुमलो के वादे हुए,
👉 बड़े बड़े सपने दिखाए गए,
👉 रामराज्य लाएंगे,
👉 गंगा को साफ करवाएंगे,
👉 2 करोड़ रोजगार देंगे,
👉 100 स्मार्ट सिटी पीजीआई एम्स बनाएंगे,
👉 देश के अच्छे दिन लाएंगे,
👉 आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे,
👉 मेक इन इंडिया बनाएंगे,
👉 विश्व गुरु कहलाएंगे.....
मगर हुआ क्या ❓❓
👉 गैस सिलेंडर 1000 पार,
👉 पेट्रोल डीजल 100 पार,
👉 रुपया गिरता गिरता 96 पार,
👉 2 करोड़ रोजगार छोड़ो पकौड़े तलने की नौबत आ गई,
👉 विश्व गुरु की जगह विश्व कॉमेडियन बन गए,
👉 100 स्मार्ट सिटी की जगह पहले से बने शहरों की दुर्गति हो गई,
👉 महंगाई आटा तैल दाल सब अपने चरम पर पहुंच गए,
👉 लाखों लोगों के रोजगार चले गए,
🔸करोना काल ,
🔸नोट बंदी , GST,
आदि में जनता को लाइनों में लगकर पुलिस वालों से डंडे खाने पड़े ,
रेलवे की पटरियों पर लोगो ने दम तोड़ दिया,
मुर्दों को दफनाने के लिए जगह नहीं मिली,
ऑक्सीजन के बिना लोग मर गए
बिना पैसे के लोगों का धंधा चौपट हो गया....
👉 मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत का जुमला फैल हो गया,
जो कहते थे अच्छे दिन आयेंगे वो अब कहने लगे कि बुरे दिन आने वाले है,
#अच्छे_दिन -
🔸देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी दिन में 10 10 ड्रेस बदलते है,
🔸काजू की रोटी रसियन मशरूम की सब्जी खाते है,
🔸8400 करोड़ के जहाज में चलते है,
🔸12 करोड़ की गाड़ी रखते ह
🔸10 लाख का सूट पहनते है,
🔸2 लाख की घड़ी 1 लाख का पैन रखते है,
🔸100 से भी अधिक विदेश यात्राओं का आनंद ले चुके है,
🔸चुनाव प्रचार में अरबों फूंकते है, झालमुडी खाते है फोटोग्राफी करते है,
👉 फिल्मी एक्टरों ने देशभक्ति की आड में खूब माल कूटा,
👉 अरविंद केजरीवाल सीएम बन गया,
👉 बाबाओं की संपति 250 गुणा बढ़ गई,
👉 कवि बाद में कथावाचक बन गए ,
👉 हीरोइन सांसद बन गई,
👉 लेखक मंत्री बन गए,
जनता के हाथ क्या आया पार्टी का झंडा,
🔸जय श्री राम के नारे,
🔸डीजे के आगे डांस,
🔸सड़कों पर तलवार लहराना,
🔸मंदिर मस्जिदों के आगे डांस करना,
🔸रोजगार के लिए लात खाना...
🔥जो नेता थे उनको कुर्सी मिल गई, बाबा अपने बिजनेस बना गए, बाकी बचे चूहे बनकर अब बिल में छुप गए है,
इसलिए इनका नाम चूहा पार्टी बन गया है।👇
अजीत अगरकर अपनी धारदार गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं।
भारतीय टीम के इस पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर ने बल्ले से भी कई रिकॉर्ड बनाए हैं। 16 साल के अपने करियर में उन्होंने 26 टेस्ट, 191 वनडे और 4 टी20 मैच खेले।
अजीत का करियर जितना शानदार रहा, उनका निजी जीवन उससे भी ज्यादा दिलचस्प है। क्रिकेट के इस दीवाने को अपने दोस्त की बहन से प्यार हो गया और फिर उन्होंने धर्म की दीवार तोड़कर शादी कर ली।
अजीत अगरकर की पत्नी फातिमा उनके दोस्त मजहर की बहन हैं। दोनों की मुलाकात मैच के दौरान हुई थी। जब मजहर अजीत का मैच देखने जाते थे, तो कभी-कभी फातिमा भी उनके साथ स्टेडियम जाती थीं। यहीं से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे दोनों दोस्त बन गए।
अजीत अगरकर की प्रेम कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 1999 में क्रिकेट करियर शुरू करने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी की मुलाकात फातिमा घड़ियाली से हुई। अजीत अगरकर की पत्नी फातिमा उनके दोस्त मजहर की बहन हैं। दोनों की मुलाकात मैच के दौरान हुई थी। जब मजहर अजीत का मैच देखने जाया करते थे, तो कभी-कभी फातिमा भी उनके साथ स्टेडियम जाती थीं। य
हीं से इन दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे दोनों दोस्त बन गए। अजीत अगरकर का जन्म एक मराठी पंडित परिवार में हुआ था, जबकि फातिमा मुस्लिम हैं। दोस्त की बहन, और वो भी मुस्लिम, ऐसे में टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी को अपने प्यार को शादी के बंधन में बांधने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा।
अजीत और फातिमा को मुस्लिम और मराठी पंडित परिवारों के मिलन के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। शादी के बाद भी उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। दुनिया की परवाह न करते हुए, दोनों ने अपने प्यार है दोनों शादी कर ली ❤️
@CommonBS786OM सस्ते और नफरती कीबोर्ड यौद्धाओं द्वारा सोशल मीडिया पर झूठी कहानी फैलाई जा रही है।
इलाके के लोगों के मुताबिक, मामला तब शुरू हुआ जब युवक ने मुस्लिम महिला के शरीर को जबरन छूने की कोशिश की, बिना उसकी मर्ज़ी रंग लगाया, तब दोनों पक्षों के बीच झगड़ा बढ़ा और इसी टकराव में, तरुण की जान गई
@WasimAkramTyagi इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजीऊन...
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है कि मरहूम को अपनी ज्वार-ए-रहमत में आला मक़ाम अता फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए और अहल-ए-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाएं..आमीन या रब्बुल आलमीन 🤲
उत्तराखंड से असम तक हिंदू - मुस्लिम सांप्रदायिकता की स्क्रिप्ट तेज़ी से चालू कर दी गई है ।
ना ही सिर्फ बजरंग दल जैसे संगठनों को गुंडागर्दी और हिंसा के काम पर लगाया गया है बल्कि संविधानिक पदों पर बैठे लोग खुले आम हिंसा भड़काने का काम कर रहे हैं ।
अखबारों से ले कर चैनलों और देश के सर्वोच्च और उच्च न्यायालय तक सब खामोश हैं .. कानून और संविधान से हो रहे खिलवाड़ के विरुद्ध बोलने की किसी में हिम्मत नहीं बची है ।
पर यह सब हो क्यों रहा है ?
सांप्रदायिकता का यह नया अध्याय क्यों लिखा जा रहा है ?
कारण है .. चुनाव ।
आने वाले कुछ महीनों में असम , केरल , तमिल नाडू, बंगाल , पंजाब , उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड समेत कई राज्यों के चुनाव होने हैं ।
देश पर 12 साल राज करने के बावजूद भाजपा के पास हिंदू- मुसलमान को छोड़ कर ना तो कोई मुद्दा है , ना ही वोट मांगने के लिए कोई विकास का दावा है ।
आज परीक्षा हर हिंदू की है ।
क्या आप एक बार फिर अपने मुद्दों को भुला कर , देश को पिछड़ता छोड़कर , अपने भविष्य को तबाह कर के , देश के संसाधनों को बिकता देखते हुए, लोकतंत्र को मरता देखते हुए भी सिर्फ नफ़रत के चलते भाजपा के एजेंडा को स्वीकार करेंगे ?
या इस भाजपा द्वारा प्रायोजित एजेंडा को हरा कर सरकार को अपने मुद्दों पर आने के लिए मजबूर करेंगे ।
परीक्षा अब आपकी सूझ बूझ की है ।
यह नफ़रत और हिंसा मुसलमानों को परेशान करने के लिए नहीं , आपको अंधा बहरा गूंगा बनाए रखने के लिए फैलाई जा रही है ।
आप चाहें तो देश को और अपने भविष्य को गर्त में जाने से आज रोक सकते हैं.. आपने सिर्फ़ और सिर्फ़ नफ़रत के एजेंडा को अस्वीकार करना है ।