लिखता हूँ कलम का सिपाही हूँ
खामोश रहूँ तो झूठों का भाई हूँ
कि पहरे है तमाम स्याही की लिखावट पर
अखबार में अब गुनहगारों के नाम लिखूंगा
जय श्री महाकालेश्वर
@incshivendra सही ही तो बोल रहा है बकलोल इसके जेब में है रूपया अब महगाई बढ़े या ना बढ़े इसको क्या ही फर्क पड़ेगा फर्क तो आमजनमानस को पड़ता है जिसके पास कुछ खोने को नहीं बचा है जिसकी जेब मे रूपया तो क्या पैसा भी नहीं बचा है इस महगाई में, अब फ्लाइट का 6000 देना हो या 60 इनको घंटा फर्क पड़ेगा
@Don826037 Aur agar khaul raha hai to sirf tweet se kaam nahi chalne wala hathiyaar uthao aur kar do sir dhad se alag fir koi nahi bolega aur karne ki sochega kya ham unse kamjor hai uske ek ne bola 10 kar rahe hamaare 10 ke 10 sirf bol rahe kar koi nahi raha durdasa ke jimmedaar khud ho
@Don826037 Ap log sirf tweet tweet khelna rt aur comment ke liye bhadkau post karne ke alawa kiya kya hai ap logo ne pata nahi aisi khabre dekh kar chudiya pahan lete hai ya chudiya pahan kar aisi post dekh rahe samjh se pare agar wo ek ko mare to tum bhi sachham ho 10 maar sakte ho
@highcourtadvo Tum log sirf gyaan de sakte ho ek baar bhi inke khilaf khade hone ki himmat nahi huyi chahe wo kamlesh tiwaari ki hatya ho ya ankita pandey isiliye aaj inki itni himmat hai, jab rajniti talwa chat rahegi to rajneta labh uthata rahega
सोचकर देखिए… कैसी गिरी हुई सोच वाले लोग हैं जो हमारी बहन-बेटियों पर गंदी नजर डालने की हिम्मत कर रहे हैं। इन दो कौड़ी के जहरीले मानसिकता वाले लोगों को लगने लगा है कि इनके खिलाफ कोई आवाज़ उठाने वाला नहीं है, कोई कार्रवाई नहीं होगी—इसलिए इनके हौसले आसमान छू रहे हैं।
अगर संतोष वर्मा जैसे मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई हो जाती, तो आज ऐसे घटिया लोग मंचों पर खड़े होकर समाज के सम्मान को खुली चुनौती देने की औकात भी नहीं रखते। इनकी पूरी हिम्मत सिर्फ इसलिए है क्योंकि व्यवस्था की नरमी ने इन्हें बेलगाम बना दिया है।
यह वीडियो देखकर किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति का खून खौल उठेगा। आखिर ये किस भ्रम में हैं? हमारी बहन-बेटियों के सम्मान पर हमला करोगे? हमारे संस्कारों को चुनौती दोगे? और उम्मीद करोगे कि हम चुप रहेंगे?
अब बहुत हो चुका।
सनातनियों को अब एकजुट होकर, संगठित होकर और पूरी ताकत के साथ ऐसे मानसिक अपराधियों को कानूनी और सामाजिक स्तर पर उनकी असली जगह दिखानी होगी।
सम्मान के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ का जवाब अब पहले से ज़्यादा कड़ी, ज़्यादा तेज़ और ज़्यादा संगठित होगा।
समाज की मर्यादा पर हमला करने वालों को अब साफ संदेश—
अब ये सब बर्दाश्त नहीं होगा।
@Jeetuburdak अच्छा तो पिछली बार किसके नेतृत्व में लड़े थे जो इतनी बुरा हाल हुआ, देखिए राजनीति मे बदलाव आवश्यक होता है और जो बदलता नहीं जनता उसे बदल देती है,
@Jeetuburdak मुर्दा हैं ये जनेऊ सिर्फ दिखाने के लिए पहनता है ब्राह्मण कहता है खुद को लाचार है बेचारा, मुझे तो शर्म आ रही है इतने दिनों मैं इसके समर्थन में था
रोहिणी जी आप पढ़ी लिखी है,इसलिए मैं आप से अनुरोध करना चाहूंगा *आप अंबेडकर विचारधारा का परित्याग करें क्योंकि अंबेडकर जी सामाजिक एकता और स्वतंत्रता के धुर विरोधी थे।उन्होंने सनातन धर्म का अपमान कर देश के बहुसंख्यक वर्ग को आहत किया था।
1928 में एक गवाही के दौरान अंबेडकर जी ने भारत के ट्राइब जातियों के मताधिकार का भी विरोध किया था जबकि यही जातियाँ आगे चलकर एससी एसटी ओबीसी का दर्जा प्राप्त किया था।वे कई मौके पर देश के स्वतंत्रता का भी विरोध किया था और ब्रिटिश शासन को अच्छा बताया था।सोचों क्या ऐसे व्यक्ति कभी हमारे महापुरुष बन सकते हैं,। @DrRohinighavari
जिस इंसान का हथियार उसकी मेहनत होती है,
तो सफलता भी उसकी गुलामी,
करने पर मजबूर हो जाती है
"पिता नीम के पेड़ जैसा होता है,
जिसके पत्ते भले ही कड़वे हो,
पर छांव हमेशा ठंडी देता हैं "
भारी मन, अहंकार और दिखावा साधना की ऊर्जा को रोक देते हैं।
Down to Earth रहने से ग्रहणशीलता बढ़ती है।
जब मन शांत और सरल होता है,
तब गुरु की कृपा भीतर तेज़ी से उतरती है।