आज पटना के गांधी मैदान से अतिथि सहायक प्राध्यापकों के आंदोलन में शामिल हुआ!
ये यूजीसी गाइडलाइन और रोस्टर का पूर्णतः पालन करते हुए नियुक्त हुए थे और राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में 3 से 8 वर्षों से कार्यरत हैं। इन्हें हटाने का फ़रमान वापस लेकर इनका समायोजन किया जाये!
सरकार की मानसिकता साफ नजर आ रही है......सरकार बिहारियो को ही बाहर करने में लगी है....नौकरी के नाम पे ठगी कर रही है..
मूंह का निवाला छीना जा रहा..
ये कतई शुशाशन नही..
बेहद शर्मनाक!!!
इस दमनकारी फैसले को वापस लो..वापस लो!
अतिथि सहायक प्राध्यापकों का हक वापस दो..वापस दो!
🙏🙏🙏
माननीय उपमुख्यमंत्री महोदय @yadavtejashwi आपके घर खुशियां आई हैं। इसके लिए बधाई। पर हम अतिथि सहायक प्राध्यापक तो सड़क पर आ गए हैं। कृपया अतिथि सहायक प्राध्यापकों को हटाने के आदेश पर रोक लगवाएं। आपने रोजगार देने का वादा किया था पर हमारा रोजगार छीना जा रहा है।
@ppbajpai@ravishndtv सर आपलोग विश्वविद्यालय के ऐसे तुगलकी फरमान और स्वयंभू सरकार के इस दमनकारी निति पर भी कुछ reporting कीजए। ये अतिथि शिक्षक पिछले 4 साल से कार्यरत हैं। अपनी आजीविका के सभी साधनों को छोड़ कहीं अन्यत्र कार्य न करने की शपथपत्र देने के उपरान्त। अब ये use & throw
@Sandeep_Saurav_@NitishKumar सर अपने स्वयंभू लोकतंत्र के तथाकथित आका ने माँगने से किसको क्या दिया है आजतक। जो निर्माणकर्ता है वो विध्वंस करना भी जानत है। याचना नही अब रण होगा , जीवन जय या मरण होगा।
बिहार के गेस्ट फैकल्टी के समायोजन की मांग जायज है! यूजीसी गाइडलाइन और रोस्टर का अनुपालन करते हुए इनकी नियुक्ति हुई; इनसे शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्य लिए गए और अब हटाने की बात चल रही है।
सरकार को प्राध्यापकों के नए पद सृजित कर इनका समायोजन करना चाहिए।
न्याय हो @NitishKumar
@NitishKumar@CPIMLBIHAR@yadavtejashwi@RJD_BiharState याचना नहीं अब रण होगा।
जीवन जय की मरण होगा।। माननीय आपने सही सोचा आपके इस स्वयंभू लोकतंत्र में माँगने से किसको क्या दिया है महराज आपने आजतक। याद रहे जहाँ निर्माण है वहीं विध्वंस है। अब अपनी माँगे लडकर लेंगे। बहुत हुआ सम्मान
विश्वविद्यालय में कार्यरत अतिथि शिक्षक बेहद चिंतित हैं. उनकी चिंता जायज है. उनकी नौकरी पर खतरे मँडरा रहे हैं.
अतिथि शिक्षकों को हटाने की बजाय उनके समायोजन के विकल्पों पर सरकार को गम्भीर होना चाहिए! यह लड़ाई हम जरूर जीतेंगे!
@NitishKumar@yadavtejashwi
1972 के बाद से बिहार के विश्वविद्यालयों में फैकल्टी का कोई नया पद सृजित नहीं हुआ है, जबकि छात्रों की संख्या तब से काफी बढ़ गई है!
नए पद सृजित कर सभी गेस्ट फैकल्टी के समायोजन की मांग विधानसभा में उठाई गई !
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