OBC SC ST समाज का विरोधी मुस्लिम नहीं सवर्ण हैं ✊
कुछ दिन पहले UGC के मुद्दे पर OBC समाज का साथ चाहिए था, और आज OBC आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए!
साथियों, अब तो पहचानो कि कौन आपके अधिकारों के साथ खड़ा है और कौन आपके अधिकारों के खिलाफ!
OBC समाज, भावनाओं में नहीं—अपने अधिकारों और हितों को देखकर फैसला करो! ✊
#OBCएकता #OBCअधिकार #सामाजिक_न्याय
आरएसएस/मनुवाद के मुखपत्र दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता ने खुलकर आरएसएस से जुड़ाव को खुले तौर पर स्वीकार किया।
अब देश के पिछड़ों को भी खुलकर दैनिक जागरण को बायकॉट करना चाहिए क्योंकि आरएसएस बीजेपी शासन में सबसे ज्यादा ओबीसी को लूटा जा रहा है।
#ओबीसी_महासभा@DrMohanBhagwat
🚨 ओबीसी महासभा की चेतावनी: उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2018 (UMS-2018) में कथित प्रवर्ग परिवर्तन की निष्पक्ष जाँच हो!
@DrMohanYadav51@BJP4MP@udaypratapmp@schooledump
माननीय मुख्यमंत्री @drmohanoffice51 जी,
मध्यप्रदेश उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2018 में DPI द्वारा मेरिट सूची, अभ्यर्थियों के मूल प्रवर्ग और अंतिम चयन सूची में कथित प्रवर्ग परिवर्तन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यदि UR मेरिट में चयनित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का प्रवर्ग बदला गया, तो इसकी नियमसम्मतता और UR पदों के आवंटन पर पड़े प्रभाव की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
📌 ओबीसी महासभा की क्रमबद्ध एवं समयबद्ध माँगें:
1️⃣ 7 दिवस में: निष्पक्ष जाँच समिति गठित कर जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किए जाएँ।
2️⃣ 15 दिवस में: मूल एवं संशोधित मेरिट सूची, रोस्टर, प्रवर्ग परिवर्तन के आदेश तथा पद आवंटन का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित किया जाए।
3️⃣ 30 दिवस में: प्रवर्ग परिवर्तन के नियमगत आधार और UR पदों पर उसके प्रभाव की जाँच की जाए।
4️⃣ 45 दिवस में: जाँच की अंतरिम रिपोर्ट जारी की जाए।
5️⃣ 60 दिवस में: अंतिम जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक कर अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर नियमानुसार विचार किया जाए।
6️⃣ 75 दिवस में: अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को नियमानुसार राहत दी जाए।
📢 ओबीसी महासभा की स्पष्ट चेतावनी:
यदि निर्धारित समयसीमा में माँगों पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई और सरकार ने लिखित कार्ययोजना जारी नहीं की, तो ओबीसी महासभा द्वारा DPI (लोक शिक्षण संचालनालय), भोपाल में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
यह लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि मेरिट, पारदर्शिता, समान अवसर और भर्ती नियमों के निष्पक्ष पालन के लिए है।
अब केवल आश्वासन नहीं—जाँच चाहिए, जवाबदेही चाहिए और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए!
— ओबीसी महासभा, मध्यप्रदेश
प्रधानमंत्री @narendramodi जी आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का संवैधानिक माध्यम है।
EWS आरक्षण आर्थिक आधार पर, जबकि SC, ST और OBC आरक्षण सामाजिक भेदभाव, पिछड़ेपन व प्रतिनिधित्व पर आधारित है।
अगर गरीबों के लिए EWS को 10% आरक्षण मिल सकता है, तो SC, ST और OBC के गरीबों को आर्थिक आधार पर अतिरिक्त आरक्षण क्यों नहीं? 🤔
जब EWS यानी सुदामा कोटा आर्थिक आधार पर 50% की सीमा पार हो सकती है,
तो OBC, SC और ST के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को दूर करने के लिए आरक्षण की समीक्षा और विस्तार पर सवाल क्यों नहीं? ⚖️
सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मनुवादी सोच तथा सामाजिक न्याय के प्रति असंवेदनशीलता इसके पीछे एक कारण है?
न्यायपालिका में सभी वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए। ⚖️
-40 बोलने से सच झूठ में नहीं बदल जाता! 💥
आरक्षण के नाम पर मेरिट पर सवाल उठाने वालों, पहले यह देखो कि चयन में जनरल और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच कितने अंकों का अंतर है।
जब चयन लिखित परीक्षा के अंकों से हो सकता है, तो इंटरव्यू के नाम पर मनमानी की गुंजाइश क्यों?
🔥 इंटरव्यू बंद करो, पारदर्शी और निष्पक्ष चयन लागू करो! @narendramodi@GaneshSingh_in
#obc_हक_हुंकार #OBCएकता #OBCअधिकार #CasteistCollegium #CasteistJudiciary #सामाजिक_न्याय
‼️ तथ्यों को समझिए, भ्रम में मत आइए!
ओबीसी महासभा की ओर से मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी को बधाई एवं आभार!
मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर करना कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है।
जो लोग इसे Merit बनाम Rights का मुद्दा बना रहे हैं, उनसे सवाल है—क्या OBC युवाओं को 27% आरक्षण की कानूनी लड़ाई लड़ने का अधिकार नहीं है? क्या सामाजिक न्याय और प्रतिभा एक-दूसरे के विरोधी हैं?
हमारी स्पष्ट अपेक्षाएँ:
1️⃣ सुप्रीम कोर्ट में 27% आरक्षण के पक्ष में मजबूत पैरवी हो।
2️⃣ 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले।
3️⃣ आरक्षण बहाली के लिए हर उचित कानूनी विकल्प अपनाया जाए।
मुख्यमंत्री जी, ओबीसी महासभा इस कानूनी पहल का स्वागत करती है।
अब लक्ष्य स्पष्ट है—27% OBC आरक्षण की बहाली और प्रभावित युवाओं को न्याय।
आरक्षण कोई दया नहीं, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का संवैधानिक सवाल है।
— ओबीसी महासभा
#OBCReservation #MadhyaPradesh
कथित मेरिट धारियों से।कोई शीट बचे तब न मेरिट में आकर लेंगे।
@DrMohanYadav51 जी से निवेदन है कि...
@schooledump अंतर्गत DPI में हुई शिक्षक भर्तियों की CBI जाँच करवाने का कष्ट करें।
मप्र शासन को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई, दोषियों की निजी संपत्ति से करें।
@INCIndia@INCMP@BJP4MP
इसलिए ओबीसी को मिलते क्योंकि रोस्टर में विज्ञापन ओबीसी का निकला है सामान्य का नहीं ।
आखिर कितना शोषण होगा आरक्षित वर्गों का ।
जब देश में बिना सर्वे आवादी से EWS दिया गया तब सब चुप थे ।
जब 52% ओबीसी के अधिकार की बारी आती है सब मिलकर शोषण के समर्थक होते है।
अत्यंत दुखद
@BJP4MP
ओबीसी नाम से इतनी मिर्ची लग रहेंगे तो भारत छोड़ दो ये देश ओबीसी राज्य देश जो कि संविधान से चलने वाला देश ओबीसी की आबादी 55 प्रतिशत से ज्यादा। हे ओर तुम लोग मात्र 8 प्रतिशत जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा
अब जरूरत तुम्हारी यूरेशिया में वहां अपना
आरक्षण मांगो
ओबीसी को 27 प्रतिशत
OBC आरक्षण पर घमासान, दामोदर यादव के नेतृत्व में शिवराज और कृष्णा गौर के बंगलों का घेराव
पढ़िए पूरी खबर.. https://t.co/CdXS923qui
#OBCReservation#DamodarYadav
[ OBC Reservation Madhya Pradesh, Bhopal Political News ]
आज मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से OBC महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने ओबीसी आरक्षण पर सार्थक चर्चा की।13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत, अतिरिक्त पदों के सृजन एवं नए अध्यादेश के माध्यम से समाधान की मांग रखी।
27% आरक्षण हमारा अधिकार है,न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा! ✊
OBC समाज के नेताओं को इससे सबक लेना चाहिए! 27% OBC आरक्षण हटाने को भाजपा अपनी जीत कह रही की और हमने OBC समाज को हरा दिया और आरक्षण को 14% कर दिया "द्वितीय स्वरूप"
आज समय की माँग है कि OBC समाज के सभी राजनीतिक दलों के नेता समाज के अधिकारों के लिए एकजुट हों। यदि वे समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें अपने पदों पर बने रहने के बजाय सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।
जिस तरह OBC आरक्षण के मुद्दे पर पिछड़े समाज के हित प्रभावित हुए हैं, उस पर पूरे देश की नजर है।
मध्य प्रदेश में OBC समाज की आबादी लगभग 60% होने का दावा किया जाता है, जबकि समाज को 27% आरक्षण देने की माँग लंबे समय से उठती रही है। लेकिन 27% आरक्षण के स्थान पर 14% आरक्षण तक सीमित रहने की स्थिति को मैं गलत और अन्यायपूर्ण मानता हूँ।
मेरा सवाल OBC समाज के सभी नेताओं से है:
जब समाज के अधिकारों की बात आती है, तो सभी नेता एक मंच पर आकर आवाज क्यों नहीं उठाते? आखिर कब तक समाज के नाम पर राजनीति होगी और समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा?
अब समय आ गया है कि OBC समाज के नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठें और अपने समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
समाज को केवल राजनीतिक वादे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की ठोस पैरवी चाहिए।
✊ OBC समाज की एकता ही उसके अधिकारों की मजबूत आवाज है।
— अपने विचारों के साथ, सामाजिक न्याय के पक्ष में