#मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र मे एक महिला पत्रकार ने @meerutpolice के मवाना चौकी इंचार्ज पर अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया है। घटना के बाद महिला पत्रकार की तबीयत खराब हो गई। @Uppolice@myogiadityanath@CMOfficeUP@dgpup कृपया संज्ञान ले
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हमारी खबर के बाद उच्च अधिकारियों के संज्ञान में जाते ही उपरोक्त मामले में उठाई गई महिलाओं को नॉर्थ डिस्टिक थाना बड़ा हिंदू राव पुलिस ने चार महिलाओं को छोड़ दिया है बाकी एक महिला आमिर जहां को शाम तक छोड़ने के लिए बोल दिया है विशेष सूत्र,, लीगल एडवाइजर एडवोकेट राहुल गुप्ता दिल्ली हाई कोर्ट,
दिल्ली पुलिस की बर्बरता: 'कानून के रक्षकों' द्वारा कानून की धज्जियां
स्थान: थाना बड़ा हिंदू राव, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट, दिल्ली।
समय: 1 अप्रैल 2026, मध्यरात्रि 1:00 बजे।
जब शहर सो रहा था, तब इंस्पेक्टर गणेश कुमार और SHO राजीव रंजन के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस की टीम 'न्याय' के नाम पर मानवीय संवेदनाओं का गला घोंट रही थी। आरोपी सलमान को पकड़ने में अपनी विफलता का ठीकरा पुलिस ने उसके परिवार की बेगुनाह महिलाओं पर फोड़ा है।
प्रमुख कानूनी उल्लंघन (Legal Violations):
* सीआरपीसी की धारा 46(4) का उल्लंघन: सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला को बिना मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया जा सकता। पुलिस की यह 'मिडनाइट रेड' सीधे तौर पर अवैध है।
* बिना नोटिस हिरासत: बिना किसी आधिकारिक नोटिस के परिजनों को उठाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुला उल्लंघन है।
* अमानवीय कृत्य: 1. 10 दिन के नवजात शिशु और उसकी बीमार माँ (आरिफा) को थाने में रखना मानवाधिकारों की क्रूर अनदेखी है।
2. मानसिक रोगी (सलमा) और अविवाहित लड़कियों (समरीन व फरीन) को बिना किसी अपराध के प्रताड़ित करना पुलिसिया शक्ति का दुरुपयोग है।
कड़ा तंज: "खाकी के पीछे छिपी नपुंसकता"
> "जब पुलिस एक आरोपी को पकड़ने में नाकाम रहती है, तो वह अक्सर महिलाओं और बच्चों को 'सॉफ्ट टारगेट' बनाती है। बड़ा हिंदू राव पुलिस का यह कृत्य वीरता नहीं, बल्कि उनकी जांच प्रक्रिया की विफलता और मानसिक दिवालियेपन का प्रमाण है। क्या दिल्ली पुलिस अब अपराधियों के बजाय नवजात बच्चों और मानसिक रूप से बीमार लड़कियों से लड़ेगी?"
>
मांग: हम दिल्ली पुलिस कमिश्नर और मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग करते हैं कि इस अवैध हिरासत पर तुरंत संज्ञान लें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं (जैसे 342 - अवैध कारावास) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए,
Legal advisor advocate Rahul Gupta Delhi High Court,
@Ravindra_IPS@CPDelhi@CellDelhi@DelhiPolice@DcpNorthDelhi@AcpSaraiRohilla@shobhrao_del@CMODelhi@gupta_rekha@LtGovDelhi@ManojTiwariMP@HMOIndia@MinistryWCD@hrw@ANI@aajtak@ndtvindia@ABPNews@PTI_News
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के थाना खजूरी खास इलाके में करावल नगर रोड पर स्थित दिल्ली चिकन पॉइंट नामक होटल बिना किसी वैध लाइसेंस के लंबे समय से संचालित हो रहा है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार यहां न केवल बिना FSSAI, स्वास्थ्य विभाग या MCD की अनुमति के खाना परोसा जा रहा है,
बल्कि अवैध रूप से शराब भी पिलाई जा रही है। यह दिल्ली एक्साइज नियमों और FSSAI एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह पूरा गैरकानूनी धंधा पुलिस और बीट अधिकारियों की कथित मिलीभगत से चल रहा है।
हर महीने मोटी रकम (रिश्वत) देकर संरक्षण लिया जा रहा है, जिसके कारण अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि ये बातें सही हैं, तो यह कानून व्यवस्था की गंभीर अनदेखी और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।बिना लाइसेंस का होटल चलाना अपराध है,
लेकिन उसमें अवैध शराब परोसना और भी गंभीर है। इससे इलाके में नशे की लत, झगड़े, मारपीट और असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ रही है। आसपास के परिवारों, बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।यह मामला कानून के पालन और प्रशासन की निष्पक्षता का है। यदि पुलिस और FSSAI ऐसे मामलों में आंखें मूंदेंगे, तो आम जनता का विश्वास कैसे बचेगा?
@DelhiPolice@CPDelhi@fssaiindia@DCPNEastDelhi@gupta_rekha@LtGovDelhi@HMOIndia@narendramodi@MCD_Delhi@narcoticsbureau@DelhiComplaint@ani_digital@CMODelhi
से आग्रह है कि इस शिकायत को तुरंत संज्ञान में लें। निष्पक्ष जांच कराएं। आरोप सिद्ध होने पर होटल सील करें, अवैध शराब जब्त कर नष्ट करें और दोषियों (संचालक व शामिल अधिकारी) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें। थाना खजूरी खास SHO भी जांच में शामिल हों।कानून सबके लिए बराबर हो। समय रहते कार्रवाई से ही क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनी रहेगी।
#KhajuriKhas #IllegalLiquor #DelhiPolice #FSSAI #ExposeCorruption
हर्ष विहार बीट नंबर, 1, बना अवैध बोरिंग का 'हॉटस्पॉट': NGT के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे वर्दीधारी और जल माफिया!
[विशेष संवाददाता: अशरफ सैफी |
दिल्ली रोशन]
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: राजधानी दिल्ली की प्यास बुझाने के दावों के बीच, उत्तर-पूर्वी दिल्ली का हर्ष विहार थाना क्षेत्र आज भ्रष्टाचार और पर्यावरण के कत्ल का गवाह बन रहा है। जहाँ एक ओर सरकार गिरते भूजल स्तर (Water Lable) को लेकर विज्ञापनों पर करोड़ों फूँक रही है, वहीं हर्ष विहार में 'जल माफिया' और 'भ्रष्ट पुलिस तंत्र' का एक ऐसा कॉकटेल तैयार हो गया है जो दिल्ली के भविष्य को रेगिस्तान बनाने पर तुला है।
हर्ष विहार : मंदिर वाली गली मे खुलेआम 'धरती का सीना' चीर रहा माफिया,,,
ताजा मामला आज दिनांक, 19/3/26, हर्ष विहार (पिन: 110093) का है। विशेष सूत्रों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, ब्लॉक ए-3 गली नंबर, 16, मंदिर वाली गली हर्ष विहार दिल्ली 110093, का है जहां पर विशेष सूत्रों द्वारा पता चला है कि, आरिफ और दानिश नामक व्यक्तियों, द्वारा बरमे वाली बड़ी मशीन से अवैध रूप से बोरवेल/समरसेबल लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मशीन संचालक का नाम आबाद बताया जा रहा है,
हैरानी की बात यह है कि यह कोई लुका-छिपी का खेल नहीं है। यह सब कुछ बीट नंबर, 1, के बीट ऑफिसर भूपेंद्र, और शशांक,के कथित 'संरक्षण' और 'आशीर्वाद' के तले हो रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून के रखवाले ही माफिया के लिए 'सुरक्षा कवच' का काम करने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
फिक्स 'रेट कार्ड' और पुलिस की 'स्पेशल पेट्रोलिंग',,,
क्षेत्र में चर्चा है कि हर्ष विहार थाने के अंतर्गत आने वाले इलाकों में अवैध बोरिंग के लिए एक 'रेट कार्ड' तय है। सूत्रों का दावा है कि:
* मोटा सेवा शुल्क: हर नए बोरवेल की खुदाई के लिए एक निश्चित रकम बीट लेवल से लेकर थाने के आला अधिकारियों के नाम पर वसूली जाती है।
* सुरक्षित घेरा: स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस गली में बोरिंग मशीन (Drilling Machine) लगती है, वहां अचानक पुलिस की गश्त बढ़ जाती है। यह गश्त अपराधियों को रोकने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि माफिया के काम में कोई 'विघ्न' न पड़े।
इलाकों की कुंडली: कहाँ-कहाँ चल रहा है 'पाताल का दोहन',,
प्रभावित क्षेत्र | वर्तमान स्थिति | माफिया का मोडस ऑपेरेंडी,
1, प्रताप नगर व सबोली हर दूसरी गली में अवैध समरसेबल घरेलू कनेक्शन की आड़ में व्यावसायिक दोहन।
2, मिलन गार्डन (इंडस्ट्रियल) भारी मशीनों द्वारा अंधाधुंध खुदाई फैक्ट्रियों में गुपचुप तरीके से हाई-कैपेसिटी बोरिंग।
3, राजीव नगर व बैंक कॉलोनी सघन आबादी के बीच माफिया का राज विरोध करने वाले निवासियों को पुलिस का डर दिखाना।
NGT के आदेशों की सरेआम 'शव-परीक्षा',,
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और दिल्ली सरकार के कड़े निर्देश हैं कि बिना अनुमति के भूजल का दोहन दंडनीय अपराध है। लेकिन हर्ष विहार पुलिस के लिए ये आदेश महज रद्दी के टुकड़े हैं। यहाँ 'वर्दीधारी सौदागर' चंद रुपयों की खनक के लिए आने वाली पीढ़ी की बूंद-बूंद का सौदा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 'गैरकानूनी जल-अभिषेक' नहीं रुका, तो यह इलाका जल्द ही 'डार्क जोन' घोषित हो जाएगा, जहाँ जमीन के अंदर पानी का नामोनिशान नहीं बचेगा।
तीखे सवाल: जवाबदेही की बारी अब किसकी?
* क्या DCP (उत्तर-पूर्वी दिल्ली) को अपने क्षेत्र में चल रहे इस संगठित अपराध और 'आशीर्वाद समारोह' की जानकारी नहीं है?
* क्या थाना अध्यक्ष (SHO) की चुप्पी उनकी इस अवैध कारोबार में सीधी संलिप्तता का प्रमाण है?
* क्या प्रशासन तब जागेगा जब जनता की प्यास बुझाने के लिए टैंकर माफियाओं के आगे हाथ फैलाना पड़ेगा?
एलजी (LG) और पुलिस कमिश्नर से आस,,
अब गेंद दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पाले में है। क्या इन 'दागी' बीट अफसरों और जल माफियाओं के गठजोड़ पर गाज गिरेगी? क्या प्रताप नगर और हर्ष विहार की जनता को इस माफिया राज से मुक्ति मिलेगी?
'दिल्ली रोशन' इस मुद्दे को तब तक प्रमुखता से उठाता रहेगा, जब तक पाताल को खोखला करने वाली इन मशीनों पर सरकारी ताला नहीं लग जाता और भ्रष्टाचार के इन संरक्षकों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@HMOIndia@rashtrapatibhvn@CMODelhi@LtGovDelhi@gupta_rekha@ManojTiwariMP@MCD_Delhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPNEastDelhi@AcpNand@ShoHarshvihar@Ravindra_IPS@CrimeBranchDP@MCDdelhi@delhijalboard0@DelhiJalBoard@NGTIndia@DMNorthEast1@SdmNorth
* "वर्दी का पहरा, न्याय का संकल्प—नफरत की साजिश का अब होगा अंत!"
* "दिल्ली पुलिस की हुंकार: अमन के दुश्मनों पर प्रहार, भाईचारे की जीत अबकी बार।"
* "खून की होली का ख्वाब पालने वालों, सुन लो—खाकी खड़ी है तुम्हारी 'अकड़' ढीली करने को!"
* "दंगाइयों के लिए काल, अमन पसंदों की ढाल—दिल्ली पुलिस बेमिसाल।"
* "धर्म के नाम पर मत लड़ो, कानून के नाम पर डरो—दिल्ली पुलिस की चेतावनी, अब सुधर जाओ!"
1: दिल्ली पुलिस की सराहना (Appreciation Post)
> 🛡️ खाकी का दम, नफरत होगी कम! 🛡️
> उत्तम नगर में तरुण हत्याकांड की आड़ में सांप्रदायिक जहर घोलने वालों को दिल्ली पुलिस ने जो करारा जवाब दिया है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। सोशल मीडिया पर 'खून की होली' की धमकी देने वाले कायरों को उनकी सही जगह दिखाने के लिए दिल्ली पुलिस का आभार। शांति और सुरक्षा ही हमारी प्राथमिकता है। 🇮🇳
> #DelhiPolice #UttamNagarPeace #LawAndOrder #SaluteToKhaki #DelhiSafety
>
2: नफरत फैलाने वालों पर तंज (Strong Satire Post)
> 📱 कीबोर्ड वारियर्स सावधान! 📱
> सोशल मीडिया पर बैठकर दंगा भड़काने का सपना देखने वालों के लिए दिल्ली पुलिस का 'स्पेशल ट्रीटमेंट' तैयार है। जो लोग ईद पर शांति बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं, उन्हें बता दें कि दिल्ली की जेलों में सलाखें बहुत मजबूत हैं। नफरत की दुकान बंद करो, वरना प्रशासन तुम्हारी 'दुकान' स्थायी रूप से सील कर देगा। 🚫🔥
> #StopHate #DelhiPoliceAction #PeaceOverHate #UttamNagarUpdate
>
वॉट्सएप स्टेटस/मैसेज (जन-जागरूकता के लिए)
> "अमन का दुश्मन कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। उत्तम नगर में दिल्ली पुलिस की सख्ती ने यह साबित कर दिया है कि राजधानी में सिर्फ संविधान का राज चलेगा, नफरत का नहीं। आइए, पुलिस का साथ दें और अफवाहों को फैलने से रोकें। जय हिंद!" 👮♂️🙏
>
> "जो लोग मजहब की आड़ में नफरत का 'वायरस' फैला रहे हैं, दिल्ली पुलिस उनके लिए 'एंटी-वायरस' बनकर मैदान में उतर चुकी है। अब नफरत के वीडियो बनाने वाले उंगलियां नहीं चटकाएंगे, बल्कि पुलिस की पूछताछ में पसीना बहाएंगे। कानून की लाठी में आवाज नहीं होती, पर उसका असर गहरा होता है।"
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सिग्नेचर ब्रिज पर पुलिस को चुनौती देने वाला ‘नफरती चिंटू’ गिरफ्तार: कब्रगाह में तोड़फोड़ और आगजनी के आरोपी आकाश पंडित पर कानून का शिकंजा,,,,
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: संध्या सक्सेना, [ दिल्ली रोशन.]
राजधानी दिल्ली के तिमारपुर थाना क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले एक युवक, जिसे सोशल मीडिया पर 'नफरती चिंटू' के नाम से संबोधित किया जा रहा है, को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। आरोपी की पहचान आकाश पंडित के रूप में हुई है। उसने न केवल वजीराबाद के पास स्थित एक कब्रिस्तान में कब्रों के साथ बर्बरता की, बल्कि पुलिस और प्रशासन को खुलेआम चुनौती देते हुए भड़काऊ वीडियो भी जारी किया था।
क्या है पूरा मामला?
घटना होली से ठीक एक दिन पहले की है। आरोपी आकाश पंडित अपने एक सहयोगी के साथ वजीराबाद सिग्नेचर ब्रिज के पास स्थित संगम विहार कब्रिस्तान में अवैध रूप से दाखिल हुआ। वहां उसने न केवल कब्रों को तोड़ा, बल्कि इस दुनिया से जा चुके लोगों की कब्रों में आग लगाकर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई। इस शर्मनाक कृत्य को अंजाम देने के बाद, आरोपी ने सिग्नेचर ब्रिज पर खड़े होकर एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
प्रशासन को खुली चुनौती और अभद्र भाषा का प्रयोग,,
वायरल वीडियो में आरोपी का अहंकार और नफरत साफ देखी जा सकती है। उसने वीडियो में दिल्ली पुलिस और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आरोपी ने सीना ठोकते हुए कहा, "अगर पुलिस या किसी में दम है तो मुझे पकड़कर दिखाएं, मेरा एक बाल भी उखाड़ कर दिखाएं।" इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में तनाव फैल गया और दोनों समुदायों के बीच भारी रोष देखने को मिला।
हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर किया विरोध आरोपी की इस हरकत ने न केवल मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत किया, बल्कि हिंदू समुदाय के लोगों ने भी इसकी कड़ी निंदा की। दोनों समुदायों के लोग एकजुट होकर तिमारपुर और वजीराबाद थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐसे 'नफरती' तत्व समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं और इनका सही इलाज कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 8 मार्च को हुई गिरफ्तारी,,
मामले की गंभीरता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए तिमारपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। लिखित शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और 8 मार्च को आरोपी आकाश पंडित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उसके सहयोगी की तलाश कर रही है और यह जांच कर रही है कि इस घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश का हाथ तो नहीं था।
सामाजिक प्रतिक्रिया,,
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिल्ली जैसे शहर में जहां लोग मिल-जुलकर रहते हैं, वहां इस तरह की घृणित मानसिकता वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। लोगों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि आरोपी पर ऐसी धाराएं लगाई जाएं जिससे भविष्य में कोई भी धर्म या आस्था के अपमान की हिम्मत न कर सके।
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नंद नगरी में सट्टा माफिया का आतंक: क्या भ्रष्टाचार की चादर ओढ़े बैठी है दिल्ली पुलिस?
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले का नंद नगरी इलाका आज अपराध और अवैध गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। विशेष रूप से A-Block, तांगा स्टैंड के पास संगठित सट्टेबाजी का काला कारोबार अपनी जड़ें जमा चुका है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो साक्ष्यों
https://t.co/ZpZGjj4RdP
में साफ देखा जा सकता है कि कैसे 'नवीन' नामक व्यक्ति कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सट्टे का अड्डा चला रहा है।हैरानी की बात यह है कि हफ्ते बीत जाने और पुख्ता सबूत सार्वजनिक होने के बाद भी दिल्ली पुलिस मौन साधे हुए है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस की यह निष्क्रियता केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गहरे भ्रष्टाचार का परिणाम है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कारोबार को बीट ऑफिसर उमेश यादव का सीधा संरक्षण प्राप्त है। जब रक्षक ही सट्टा माफियाओं के ढाल बन जाएं तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? पूर्व में दी गई तमाम शिकायतों को या तो दबा दिया गया या रसूख के दम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इस अवैध धंधे ने नंद नगरी के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है। सट्टे की लत के कारण सैकड़ों परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से तबाह हो चुके हैं। क्षेत्र का युवा वर्ग मेहनत की कमाई के बजाय 'शॉर्टकट' से अमीर बनने के लालच में अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है। इसी सट्टेबाजी के कारण इलाके में स्नैचिंग, लूटपाट, और घरेलू हिंसा जैसी आपराधिक घटनाएं चरम पर हैं।
हम DCP North East, पुलिस आयुक्त और माननीय उपराज्यपाल से मांग करते हैं इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेकर कार्रवाई करें: वीडियो साक्ष्यों के आधार पर तुरंत छापेमारी कर सट्टा का अड्डा स्थायी रूप से बंद कराएं मुख्य संचालक नवीन पर Gambling Act के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
बीट ऑफिसर उमेश यादव और संलिप्त स्टाफ के विरुद्ध ACB/CBI स्तरीय जांच कर Prevention of Corruption Act के तहत मुकदमा दर्ज हो
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May the festival of Colours brighten Your life with Joy, Happiness & Prosperity !
*Wishing You & Your Family*
*H A P P Y H O L I*
Regards,
*Rahul Gupta*
*Advocate*
*Delhi High Court*
9818175453
9899973508
सट्टा माफिया की ' सूचना देने पर दिल्ली थाना वेलकम पुलिस ने सुजा दी खाल: कबीर नगर में खाकी का खौफनाक चेहरा,,,,
संवाददाता:- संध्या सक्सेना,
दिल्ली रोशन.
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: "कानून के हाथ लंबे होते हैं"– यह कहावत कबीर नगर के फुरकान के लिए अब एक डरावनी सच्चाई बन चुकी है। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि ये हाथ अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि अपराध की सूचना देने वाले एक आम नागरिक की कमर तोड़ने के लिए उठे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कबीर नगर इलाके से थाना वेलकम पुलिसिया बर्बरता की एक ऐसी दास्तां सामने आई है, जो न केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि खाकी की साख पर भी गहरे दाग लगाती है।
बर्गर लेने निकले पिता को मिला थाना वेलकम'पुलिसिया टॉर्चर' का तोहफा,,,
30 वर्षीय फुरकान, जो दिन-रात मजदूरी कर अपने मासूम बच्चों का पेट पालता है, उसे क्या पता था कि रोज़ा इफ्तार के बाद बच्चों के लिए बाजार से बर्गर लाने की छोटी सी खुशी उसे अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा देगी। पीड़ित के अनुसार, वह इफ्तार के बाद बाजार निकला ही था कि गश्त कर रही पुलिस ने उसे दबोच लिया। आरोप है कि बिना किसी अपराध, बिना किसी वारंट और बिना किसी पूछताछ के उसे दिल्ली के वेलकम थाने ले जाया गया। वहां चार दीवारी के भीतर जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए दुःस्वप्न जैसा है। चार पुलिसकर्मियों ने मिलकर फुरकान को इस कदर पीटा जैसे वह कोई नामी अपराधी हो।
जुर्म सिर्फ इतना: सट्टा माफिया के खिलाफ उठाई थी आवाज,,,
फुरकान का असली 'गुनाह' पुलिस की लाठियों ने नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी ने तय किया था। फुरकान का दावा है कि उसने इलाके में बेखौफ चल रहे सट्टा कारोबार की सूचना पुलिस को दी थी। उसे लगा था कि सूचना पाकर पुलिस अपराधियों पर नकेल कसेगी, लेकिन यहाँ तो गंगा ही उल्टी बह निकली। आरोप है कि सट्टा माफिया और पुलिस के बीच का 'नेक्सस' (अपवित्र गठबंधन) इतना गहरा है कि पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के बजाय मुखबिर को ही 'सबक' सिखाने की ठान ली।
> "क्या दिल्ली पुलिस अब सट्टा माफियाओं के लिए रिकवरी और प्रोटेक्शन एजेंट का काम कर रही है?" यह सवाल अब कबीर नगर की हर गली में गूंज रहा है।
>
खाकी, क्रैक टीम और सट्टा किंग का 'त्रिकोण',,
पीड़ित का गंभीर आरोप है कि इस बर्बरता में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ 'क्रैक टीम' और एक विशेष कॉल ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल थे। यानी पूरे ताम-झाम के साथ एक निहत्थे मजदूर को घेरकर उसकी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई। मारपीट के बाद उसे थाने से दुत्कार कर भगा दिया गया, मानो उसकी जान की कोई कीमत ही न हो। बाद में GTB Hospital में कराए गए मेडिकल परीक्षण में फुरकान के शरीर पर मौजूद चोटों के निशान उन दावों की चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं, जिन्हें पुलिस दबाना चाहती है।
इंसाफ की आखिरी उम्मीद: अब अदालत तय करेगी कानून की मर्यादा,,
पुलिस की इस दबंगई के बाद अब फुरकान और उसका परिवार दहशत में है। सवाल यह है कि अगर पुलिस ही अपराधियों की ढाल बन जाए, तो आम आदमी किसके पास जाएगा? फिलहाल, फुरकान के वकील ने कमर कस ली है और इस मामले को अदालत के चौखट पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
अखबार का नजरिया: यह मामला केवल एक व्यक्ति की पिटाई का नहीं है, बल्कि उस भरोसे की हत्या है जो एक नागरिक अपनी पुलिस पर करता है। अगर सट्टा माफिया के इशारे पर पुलिस अपनों को ही निशाना बनाने लगे, तो दिल्ली पुलिस का नारा 'शांति, सेवा, न्याय' महज कागजी जुमला बनकर रह जाएगा। अब सबकी निगाहें न्यायपालिका पर हैं। क्या उन चार पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी? या फिर एक मजदूर की चीखें सट्टा माफिया के पैसों की खनक के नीचे दबकर रह जाएंगी?
@PMOIndia@PMOIndia_RC@AmitShah@HMOIndia@rashtrapatibhvn@LtGovDelhi@CMODelhi@gupta_rekha@ManojTiwariMP@CPDelhi@DelhiPolice@Ravindra_IPS@CrimeBranchDP@ACPBhajanpura@ShowelcomeNE