पंचायती राज चुनाव में अनेक योग्य व अनुभवी लोगों का चयन जनता ने पूरे प्रदेश में किया है ।हमारे आदरणीय पदमसिंहजी सोढा को बावड़ी ग्राम पंचायत से सरपंच निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।पदमसिंहजी पूर्व में जब गंगारामजी चौधरी चौहटन से विधायक थे उस समय भी सरपंच रह चुके है।गंगारामजी आपकी बात का मान सम्मान रखते थे।आप हमारे सिंध व राजस्थान की सांझी सांस्कृतिक व सामाजिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते है।ब्रिटिश इंडिया में सिंध बोम्बे असेम्बली में अखेसिंहजी लालसिंहजी मेंबर रहे।फिर लक्ष्मणसिंहजी सांसद व मंत्री रहे।लक्ष्मणसिंहजी जुल्फीकार अली भुट्टो के बहुत क़रीबी रहे बेनजीर भुट्टो उनकी गोद में खेली।भुट्टो पर सांगड़ (पाकिस्तान)में हमला हुवा खुमाणसिंह सोढा पाकिस्तान में पुलिस अधिकारी थे भुट्टो को लिपटकर मंच पे नीचे गिराकर बचाया व भीड़ से सुरक्षित निकाल कर लाए।70 में पाकिस्तान इस्टेबलिशमेंट से लक्ष्मणसिंहजी के रिश्ते ख़राब हो गए।लक्ष्मणसिंहजी 36 क़ौम के हज़ारों लोगों के साथ पलायन कर आए।यहाँ नागरिकता मिलने पर चौहटन के प्रधान बने फिर बाली में स्थाई निवास कर दिया।कुछ परिवार नहर पर बीकानेर रहने लगा बाकि बावड़ी में।लक्ष्मणसिंहजी के देवलोकगमन पर इनायत रहुमो जो छाछरो विधायक थे 12 दिन तक हिन्दु रश्मो रिवाज से छाछरो कोटड़ी में शोक सभा चलाई ।आदरणीय हिंदुसिंहजी सोढा पिछले तीन दशक से निःस्वार्थ भाव से पाक विस्थापितो के हकों की लड़ाई लड़ रहे है।सम्पूर्ण छाछरो परिवार को जीत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।
अरावली को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर तथ्य आधारित स्पष्टता।
इस वीडियो में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव जी अरावली से जुड़ी वास्तविक स्थिति को साफ़ शब्दों में समझा रहे हैं और फैलाए जा रहे मिथकों को तोड़ रहे हैं।
अरावली खतरे में नहीं है।
सरकार का हर कदम संरक्षण के लिए है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी पर्यावरण सुरक्षा के पक्ष में हैं।
निवेदन है पहले पूरा विषय पढ़ें, समझें और फिर कोई राय बनाएं।
अधूरी जानकारी और भावनात्मक नैरेटिव के जाल में न पड़ें।
#AravalliIsSafe
शस्त्र और शास्त्र का पूजन केवल यूनिवर्सिटी में नहीं सभी जगह होने चाइए
जिस कार्यक्रम का केवल एक पोस्टर फाड़ा आप कह रहे है वहाँ आपके सूरमा झक मरवाने गए थे ?
देश बाबासाहेब के संविधान से चलेगा और वही संविधान कहता है कि सभी को अपने विचार और कार्य की आजादी है देश कांग्रेस की बपौती नहीं है
और वैसे आप तो राजीव गांधी पेपर लीक सर्कल के सरगना है आप कब से यूनिवर्सिटी के ज्ञाता हो चले 🤮
"कुछ साल पहले मैं RSS के एक शिविर में गया था, जब उसके संस्थापक डॉ. हेडगेवार जीवित थे। मैं आपके अनुशासन, अस्पृश्यता से पूर्ण मुक्ति और कड़ाई की सादगी से बहुत प्रभावित हुआ था।"
- महात्मा गांधी
#RSS100Years
मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा पूर्णतः समरस और एकात्म भारत के निर्माण में संघ का असीम योगदान रहेगा। मैं पुनः आप सभी को विजयादशमी के पावन पर्व की बधाई देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं। - श्री रामनाथ कोविंद
#RSS100Years
संघ की ताकत और संघ का विरोध...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आज 100वां स्थापना दिवस है। 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन की स्थापना की थी और 100 से ज्यादा सहयोगी संगठनों के साथ आज यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है।
अनेक विवादों के बावजूद संघ की भारतीय जनमानस में मौजूदगी निर्विवाद है। संघ मूल रूप से हिंदू समाज को संगठित करने, युवाओं को भारतीय संस्कृति व संस्कारों से जोड़ने और वंचित वर्ग की सेवा के लिए काम करता है।
इस संगठन की खास बात यह है कि इसका स्वामित्व किसी परिवार के पास नहीं है। वे हजारों लोग, जिन्होंने संघ के लिए पूरा जीवन समर्पित किया है, वे ही इसे संचालित करते हैं। पूरा जीवन मतलब पूरा जीवन। उन लोगों ने विवाह नहीं किए हैं। परिवार का परित्याग किया है और पूरी तरह संघ के लिए ही काम करते हैं। वे ही वरिष्ठता और काबिलियत के आधार पर इस संगठन को नेतृत्व देते हैं। गुरु के रूप में संघ ने भगवा ध्वज को स्थापित किया है और भगवा ध्वज को ही प्रणाम किया जाता है। संघ के कार्य प्रणाली में कोई भी व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं माना गया है।
संघ के कार्यकर्ता संघ की शाखाओं में तैयार होते हैं जहां उन्हें खेल-खेल में भारत माता की जय के जयकारों के बीच शिक्षित और दीक्षित किया जाता है। सौ वर्षों में संघ ने प्रतिबंध भी झेले हैं और स्वीकार्यता का एक अलग मुकाम भी बनाया है। संघ मूलतः जातियों में बंटे हुए हिंदू समाज को एकजुट करने पर जोर देता है और इसके विरोध का सबसे बड़ा कारण भी यही है। वरना संघ की गतिविधियां पूरी तरह किसी भी अन्य स्वयंसेवी संगठनों की तरह समाजोन्मुखी ही हैं। बचपन से हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियां देखते आ रहे हैं। संघ स्कूलों का भी संचालन करता है जिनमें शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों का समावेश किया जाता है। संघ आदिवासी क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन रोकने के अभियान भी चलाता है। संघ सीमांत क्षेत्रों में भी काम करता है। संघ सेवा भारती के माध्यम से शहरी क्षेत्र में सेवा कार्य भी करता है। बीस पंक्तियों की इसकी प्रार्थना पूरी तरह मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम को प्रकट करती है।
संघ राजनीति में प्रत्यक्ष भागीदारी तो अभी भी नहीं करता लेकिन परोक्ष रूप से भाजपा उसी की राजनीतिक इकाई है और संघ की ताकत से ही वह पिछले 11 वर्षों से देश की सत्ता में है। संघ ने शुरू में राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। मशहूर लेखक विनय सीतापति अपनी पुस्तक "जुगलबंदी" में लिखते हैं- वीर सावरकर ने एक समय संघ के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर से आग्रह किया था कि वह अपने कुछ प्रचार को और संगठन का उपयोग उन्हें राजनीति में करने के लिए दें लेकिन उन्होंने इससे स्पष्ट इनकार कर दिया था। बहुत बाद में संघ ने अपना विचार बदला। संघ समय-समय पर अपने कुछ प्रचारकों को भाजपा में काम करने के लिए भेजता है और कुछ समय बाद उन्हें अन्य क्षेत्र में भी भेज देता है। इस बात को मैंने तब बहुत करीब से महसूस किया जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान के निदेशक डॉ महेश शर्मा, जो संघ के प्रचारक रहे हैं और मेरे शहर चूरू से हैं, उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। इसके बाद उन्हें राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की 2003 वाली वसुंधरा राजे सरकार के समय राजस्थान भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। मजेदार यह था कि जिस दिन उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ा, उसके बाद वह कभी भी भारतीय जनता पार्टी के किसी भी मंच पर नहीं देखे गए। पुनः पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान का काम देखने लगे।
ऐसा अनुशासन मैं किसी अन्य संगठन में नहीं देखा। कोई व्यक्ति किसी पार्टी से एक बार पार्षद बनने के बाद भी अपने लिए मंच पर जगह जरूर ढूंढता है। ख़ैर।
आज संघ के उन हजारों प्रचारकों को नमन, जिन्होंने अपना जीवन, अपने सपने, अपने सुख देश के लिए न्यौछावर किए हैं। उन सभी स्वयंसेवकों को बधाई जिन्होंने संघ को इतना बड़ा बनाया है। जातियों में बंटे हिंदू समाज को एकजुट करने का संघ का अभियान निरंतर चलते रहना इस देश के लिए जरूरी है। सफलता भले ही कितनी भी मिले। यह हमारे देश के महान लोकतंत्र के लिए भी जरूरी है। इसे बचाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।
#RSS100Years #RSS100
@arvindchotia
राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री, मदन दिलावर जी ने बाड़मेर और शिव क्षेत्र के दो निर्दलीय विधायकों के क्षेत्र में जारी पत्र राजनीतिक गलियारों में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है ।।
शिक्षा की और बढ़ते कदम...
@SupriyaShrinate कांग्रेस कौनसे शास्त्र पढ़ रही है भारत के शास्त्रों में तो नहीं लिखी ये बात ? कही इटली का वाला शास्त्र पढ़ कर तो यहाँ नहीं चेप दिया 😅😅
🚨खुरपेंची ख़ुलासा:
7 अगस्त,2025 को विपक्ष के नेता माननीय राहुल गांधी जी द्वारा वोट चोरी पर एक प्रेस कॉन्फ्रेस की गई,
जो कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी, जिसमे देश के बड़े बड़े सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।
लेकिन जब खुरपेंच टीम ने इसकी तहक़ीक़ात की तो हमे Myanmar के ट्रेस मिले जो कि बहुत shocking है।
आइए नीचे टहल के आते हैं
पश्चिमी राजस्थान में आज जहां कांग्रेस और कुछ स्वतंत्र नेता कट्टरपंथियों को गोद में बैठे है, वहीं अकेला बंदा आज कट्टरपंथियों के खिलाफ खुलकर बोल रहा है, ऐसे नेता का संरक्षण करना संपूर्ण पश्चिमी राजस्थान का कर्तव्य बनता है।
जहां नेता अपने अपने समाज के नाम पर वोट लेने के बाद भी जब कट्टरपंथियों के सामने बोलने का वक्त आता है तब समाज को पीछे छोड़कर अपने वोटबैंक को बचाने के लिए अपने समाज के लिए भी बोलना बंद कर देते है, राजनीति के इस दौर में पश्चिमी राजस्थान में हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले एकमात्र नेता आज केवल स्वरूप सिंह राठौड़ ही है।
आज कोई साथ दे ना दे, लेकिन पश्चिमी राजस्थान का हर वो व्यक्ति जो राजनीति से हटकर अपने धर्म के लिए बोलता है वो स्वरूप सिंह खारा के साथ है।
मैं स्वरूप सिंह खारा के साथ हु, क्या औकात है कांग्रेसियों टटपुंजिया लोगों की।
@SSKharaBJP