अच्छे पोषण के लिए महंगे ड्राई फ्रूट्स या विदेशी खाद्य पदार्थों की नहीं, बल्कि हमारी रसोई में मौजूद दाल, चना, मूंगफली, बाजरा और सब्जियों की जरूरत है.
थोड़ी सी रचनात्मकता से इन्हें स्वादिष्ट चना-दाल टिक्की, मूंग-दाल टिक्की, बाजरा टिक्की, सोया टिक्की या मिक्स वेज टिक्की जैसे पौष्टिक नाश्तों में बदला जा सकता है.
रोजमर्रा का स्थानीय खाना ही बेहतर पोषण का खजाना है.
#PoshanMaah2026 #HamariAnganwadiHamariJimmedari
Breaking---
इंडिगो फ्लाइट पर बिजली गिरी लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई
पटना से लखनऊ आ रही इंडिगो फ्लाइट आकाशीय बिजली की चपेट में आई। विमान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। खराब मौसम के दौरान 17000 फीट की ऊंचाई पर विमान था। पायलट की सूझबूझ से विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया।
150 यात्री थे विमान में।
भारत की पहली यात्रा पर आए जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे जी ने भारत की संसद को संबोधित करते हुए कहा था- मजबूत भारत, जापान के सर्वोत्तम हित में है, और मजबूत जापान, भारत के सर्वोत्तम हित में है...
टाइफाइड
आप सब लोगों ने एक बीमारी का नाम सुना होगा । टाइफाइड
आइए जानते हैं इसके बारे में ।
टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है। यह बीमारी Salmonella Typhi नामक बैक्टीरिया के कारण होती है जो आंतों को संक्रमित करता है और धीरे-धीरे खून तक पहुँचकर पूरे शरीर में प्रभाव डाल सकता है।
भारत जैसे देशों में, जहाँ पानी की स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और व्यक्तिगत हाइजीन संबंधी समस्याएँ अधिक हैं, वहाँ टाइफाइड एक आम और गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जाता है।
टाइफाइड कैसे होता है:
दूषित पानी पीने से
ऐसे भोजन का सेवन करने से जिसे संक्रमित व्यक्ति ने बिना हाथ धोए तैयार किया हो।
❌ खुले में बिकने वाला पानी, ठेले-ठेले पर मिलने वाले कटे फल, सलाद और गंदे हाथों से बनाकर दिया गया भोजन टाइफाइड फैलने के सामान्य कारण हैं।
खराब सीवेज प्रणाली और पीने के पानी में गंदगी या मल-मूत्र के अंश मिल जाना भी संक्रमण को बढ़ाता है।
बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है और आंतों में संक्रमण करके धीरे-धीरे खून में पहुँचता है।
यही कारण है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकती है।
टाइफाइड की जाँच:
टाइफाइड का पता लगाने के लिए जाँच आवश्यक है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अन्य बुखारों जैसे वायरल फीवर, मलेरिया या डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं।
आम तौर पर लंबे समय तक रहने वाला बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, भूख में कमी, सिरदर्द और कभी-कभी दस्त या कब्ज इसके प्रमुख लक्षण हैं।
डॉक्टर इसके लिए कुछ ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।
सबसे आम जांच विडाल टेस्ट है, जिसमें शरीर में बने एंटीबॉडी की जाँच की जाती है। हालांकि यह जांच हमेशा पूरी तरह से सटीक नहीं मानी जाती।
✅ आजकल टाइफाइड के लिए ब्लड कल्चर को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, जिसमें खून के सैंपल से सीधे बैक्टीरिया की पहचान की जाती है।
इसके अलावा CBC और लिवर फंक्शन टेस्ट में हल्की गड़बड़ी जैसी चीजें भी देखी जाती हैं।
कुछ मरीजों में यूरिन टेस्ट या अल्ट्रासाउंड भी कराया जाता है, खासकर तब जब पेट में अधिक दर्द हो या जटिलता की आशंका हो।
इलाज:-
टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों और बीमारी की गंभीरता देखकर उपयुक्त एंटीबायोटिक देते हैं।
सामान्य मामलों में oral tablet दी जाती हैं और गंभीर मामलों में इंजेक्शन के रूप में एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है।
बुखार और डिहाइड्रेशन कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नारियल पानी और तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
खाना हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए।
मरीज के लिए पूर्ण आराम बेहद जरूरी है। इलाज में लापरवाही करने पर आंतों में छेद, खून आना, मानसिक भ्रम, और कई अन्य जटिलताएँ हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर की दवाई समय पर और पूरा कोर्स पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है।
टाइफाइड से बचाव
✅ साफ पानी पीना, पानी को हमेशा उबालकर या फिल्टर करके इस्तेमाल करना, बाहर का कटा हुआ फल, सलाद, गोलगप्पा, गंदा पानी या सड़क किनारे बनने वाला खाना न खाना, हाथों को साबुन से धोना और भोजन बनाने से पहले स्वच्छता रखना जरूरी है।
बच्चों के लिए और उन क्षेत्रों में जहां बीमारी अधिक मिलती है, टाइफाइड का टीका लगवाना बहुत फायदेमंद है।
यह टीका संक्रमण की संभावना को काफी कम कर देता है।
खुले में शौच से बचाव, घर के आसपास की सफाई और स्वच्छ पानी की उपलब्धता टाइफाइड को रोकने के सबसे प्रभावी तरीके हैं।
सही जानकारी, समय पर जांच, उचित इलाज और सावधानियां मिलकर टाइफाइड को पूरी तरह नियंत्रित कर सकती हैं।
UPFSDA ने 1 नवंबर 2026 से हर रिटेल फार्मेसी के लिए पब्लिक वेबसाइट जरूरी कर दी है, जिस पर लाइसेंस, फार्मासिस्ट, परिसर और साप्ताहिक स्टॉक की जानकारी के साथ दवा की खरीद-बिक्री कीमत भी दिखेगी। अस्पताल फार्मेसियों की जानकारी भी ऑनलाइन होगी। साथ ही, नवरात्रि को देखते हुए 11 अक्टूबर 2026 से नए थोक बिक्री लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक हटेगी। औषधि निरीक्षक इसकी निगरानी करेंगे, जिससे मरीजों के हित और दवा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
#UPFSDA #दवाकारोबारी #FoodAndDrugAdministration #UttarPradesh #PharmacyLicense
प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जेब पर डाक डाला जा रहा है। वहाँ की फार्मेसी पर दवाएं 10 से 70 गुना महँगे दाम पर बिक रही हैं। @UPFSDA की जांच में प अस्पतालों से जुड़ी 214 फार्मेसियों की 130 दवाओं की एमआरपी की जांच गईं। इनमें 36 जीवनरक्षक दवाओं की MRP खरीद कीमत से 10 से 67 गुना तक ज्यादा मिली।
इसे देख कर अधिकारी हैरान हैं।
देखें रेट में अंतर-
Polymyxin-B (GUFIPOL 5 लाख यूनिट): खरीद ₹74.09,
MRP ₹4,980.94 — करीब 67 गुना
• Terlipressin (Terlitech 10 ml): खरीद ₹56, MRP ₹3,050 — करीब 54 गुना
• Colistimethate Sodium 4.5 MIU: खरीद ₹210, MRP ₹9,702
• Tigecycline 50 mg: खरीद ₹154.54, MRP ₹7,110
• Caspofungin 70 mg: खरीद ₹800, MRP ₹21,230
• Bevacizumab 400 mg: खरीद ₹7,541, MRP ₹69,995 — एक यूनिट पर अंतर ₹62,454
• 3-way stop cock: खरीद ₹6.40, MRP ₹163
#UPFSDA #Lucknow #UPNews
#HealthNews #MedicineBazar
#LatestMedicalNews
मैडिकल कॉलेजों में करोड़ों -अरबों का बजट खर्च हो रहा है, लेकिन बड़ा बुरा हाल है। फिर भी प्रशासन वहां मुद्दे नहीं उठा पाता है। जिला अस्पतालों का भी हाल बेहाल है। CHC पर कहीं अधिक पारदर्शिता है, गरीब-बेरोजगार भी खुल कर बोलते हैं। खैर कर्मचारियों का हाल सभी जगह लगभग एक जैसा ही है।
नारी सम्मान, सुविधा और सशक्तीकरण के सुपथ पर नया उत्तर प्रदेश!
लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत लोक कल्याण संकल्प पत्र-2022 के ‘सशक्त नारी’ संकल्प को नई गति देते हुए उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की साधारण बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा मिलेगी।
@UPSRTCHQ
हर थकान, सिर्फ़ थकान नहीं!
थकान को सिर्फ़ व्यस्त दिन का असर समझकर नज़रअंदाज़ न करें। अगर थकान और कमजोरी बार-बार महसूस हो रही है, तो इसके पीछे एनीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है। ऐसे समय पर जाँच और चिकित्सकीय सलाह लेना न भूलें।
Iron Deficiency | Anaemia Awareness #NHMUP@nhm_up@nhm_iecup
#HealthTips By Dr Vikas
गर्दन का दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता। क्या आपके हाथों में झनझनाहट या कमजोरी भी महसूस होती है?
गर्दन की नस पर दबाव पड़ने की स्थिति को Cervical Radiculopathy (सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी) कहा जाता है। इसमें दर्द या परेशानी गर्दन से शुरू होकर कंधे, हाथ और कभी-कभी उंगलियों तक भी महसूस हो सकती है।
इसके कुछ सामान्य संकेतों में शामिल हैं:
1. गर्दन में लगातार दर्द
2. कंधों में जकड़न
3. हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन
4. उंगलियों में सुन्नपन
5. सिर के पीछे दर्द
6. चक्कर या असंतुलन
7. हाथों में कमजोरी
8. गर्दन घुमाने में परेशानी
9. दर्द का हाथ तक पहुंचना
10. लंबे समय तक बैठने पर दर्द बढ़ना
हर गर्दन का दर्द सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी नहीं होता, लेकिन अगर दर्द के साथ हाथ में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी लगातार बनी रहती है, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
खासकर लंबे समय तक एक ही posture में बैठने, काम करने या स्क्रीन देखने की आदतों के कारण गर्दन पर अनावश्यक strain पड़ सकता है।
अगर आपको ऐसे लक्षण बार-बार या लगातार महसूस हो रहे हैं, तो उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन करवाना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार तय किया जा सकता है।
डॉ. विकास कुमार
न्यूरोसर्जन एवं ब्रेन-स्पाइन विशेषज्ञ
@thebrainyogi
आगामी त्योहारी सीजन के मद्देनजर FSDA का खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट के खिलाफ प्रदेश व्यापी अभियान जारी है। उन्नाव, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, हापुड़, मथुरा, नोएडा में की गई बड़ी कार्रवाई। मिलावटी खाद्य पदार्थों को नष्ट कराया गया।
#FSDA#FoodSafety#MilawatKeKhilaf #ShuddhataSarvopari #Muzaffarnagar #mathura #aligadh #Noida #FoodSafetyUP
@UPFSDA
काम की रफ्तार, सेहत का संतुलन!
ऑफिस की व्यस्त दिनचर्या के बीच शरीर के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें। काम के दौरान अपनी सेहत के लिए निकाला गया थोड़ा-सा समय आपको लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है।
Desk Wellness | Correct Posture |
#DeskWellness#NHMUP@nhm_up@nhm_iecup