मोबाइल बैन है, केवल आम जनता के लिए 🤡
अगर आप विराट कोहली और कुल��ीप यादव जैसे बड़े क्रिकेटर या सांसद,विधायक हों तो वीडियो रिकॉर्डिंग भी allowed है ।
महाकालेश्वर मंदिर , उज्जैन
देश में ट्रांसपेरेंसी इतनी मजबूत है कि
जैसे ही सवाल पूछो—पोर्टल ही बंद कर दो।
पिछले 15 दिनों में देश के दो बड़े ट्रांसपेरेंसी पोर्टल बंद कर दिए गए।
क्यों? क्योंकि आम लोगों ने जाकर सवाल पूछ लिए।
पहले जल शक्ति मंत्रालय का CTR पोर्टल—जैसे ही पोल खुली, बंद।
फिर MPLADS पोर्टल—जैसे ही खर्च का हिसाब मांगा, गायब।
याद रखिए,अगर सही सवाल सही तरीके से सही लोगों से पूछे जाएं तो देश के “नौकरों” को जवाब देना ही पड़ता है। 🔥
📍 गोरखपुर , उत्तर प्रदेश
“तोहार लहंगा उठा देब रिमोट से”
��स गाने से फेमस होने वाले गोरखपुर के सांसद रवि किशन जी का विकास भी शायद रिमोट में ही अटक गया है।
₹9.80 करोड़ के बजट में से अब तक सिर्फ ₹61 लाख खर्च हुए, 9 काम सुझाए गए और पूरे हुए शून्य। पिछला कार्यकाल भी कुछ अलग नहीं था — ₹5.56 करोड़ खर्च, 135 काम सुझाए गए, 24 पूरे हुए और उनमें भी फोटो सबूत सिर्फ 6 में।
लेकिन वेंडर सिलेक्शन में ज़बरदस्त निरंतरता है। 62 लाइटिंग प्रोजेक्ट एक ही वेंडर को, और 49 स्मार्ट बोर्ड दूसरे एक वेंडर को। काम ज़मीन पर दिखे या न दिखें, वेंडर तय हैं, पेमेंट चालू है, और जनता बस दर्शक बनी हुई है।
तो सवाल सीधा है कि ये विकास है या रिमोट कंट्रोल सिस्टम? जनता का पैसा है, पर असली सबूत गायब हैं। गाने तो सुपरहिट हैं , लेकिन जवाबों की चुप्पी भी उतनी ही ज़ोरदार है।
MPLADS की वेबसाइट अब दोबारा चालू हो चुकी है और उसमें काफी सारा डेटा अपडेट भी कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि जब जनता सही तरीके से सवाल उठाती है, तो सिस्टम को सुनना ही पड़ता है और जवाब भी देना पड़ता है। कल तक “मेंटेनेंस” का बहाना था , आज अचानक सब कुछ ठीक-ठाक दिख रहा है।
याद रखिए — जनता का दबाव काम करता है। चुप रहोगे तो फाइलें भी चुप रहेंगी, लेकिन बोलोगे तो सिस्टम हिलेगा। सवाल पूछना ही बदलाव की शुरुआत है।
565 राजाओं को ख़त्म करके हम लोगों ने 6 लाख वीआईपी पैदा किए हैं,जिन्हें जीवन भर बंगला ,गाड़ी,राशन,पेंशन और मुफ्त हवाई/रेल यात्रा की सुविधा मिलती है।और ये लोग आम नागरिकों को अपने सामने कीड़े मकोड़े समझते हैं।
(वीडियो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शंकर नगर इलाक़े का है) #kunalshuklaofficial #indianpolitics #vipculture #chhattisgarh #raipur
एक नेता ���े लिए 40 गनमैन, बुलेटप्रूफ गाड़ियाँ , ज़ेड+ सुरक्षा और पूरा काफ़िला आसानी से मिल जाता है। उसकी सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन वहीं 40 बच्चों के लिए एक शिक्षक तक नहीं मिल पाता। नेता की जान की चिंता है, बच्चों के भविष्य की नहीं। सत्ता को सुरक्षित रखा जाता है, शिक्षा को नहीं।
स्कूलों की छतें टपक रही हैं, क्लासरूम खाली हैं , लेकिन नेताओं के काफ़िले चमकते रहते हैं। बंदूकें जरूरी हैं , क��ताबें नहीं? यही हमारी व्यवस्था की सच्चाई है — जहाँ कुर्सी बचाना प्राथमिकता है , लेकिन आने वाला कल बनाने की कोई जल्दी नहीं।
यहां हम सबने अपने 4 साल विज्ञापन 51 की परीक्षा की तैयारी और फिर उसके साक्षात्कार के लिए झोंक दिए। ना घर गए, न किसी की शादी अटेंड की, न ढंग से खाया। अपने कमरे में 4 अलग अलग जगह सिलेब्स लगाया था कि पूरा सिलेब्स याद हो जाए।कितनी बार लाइब्रेरी में बैठ के रोए हैं कि भगवान मेहनत करने की शक्ति दें जिससे यह एग्जाम निकाल के अपने मम्मी पापा को गौरवानवित कर सकें, लेकिन @myogiadityanath और @PrashantK_IPS90 आप लोगों ने पूरे जीवन की तपस्या पे अपने एक तानाशाही फैसले से पानी फेर दिया।
#withdraw_decision_to_cancel_AP51
@narendramodi@BJP4UP@ravish_journo@abhisar_sharma@ajitanjum@DainikBhaskar@JagranNews
पूर्णिया के सांसद Pappu Yadav उर्फ़ राजेश रंजन जी की ओर से MP फंड के ख़र्च को लेकर पूछे गए सवालों पर लीगल नोटिस भेजा गया है।
लीगल नोटिस से सवाल नहीं मरते।
MP फंड का हिसाब माँगना अपराध नहीं, लोकतांत्रिक अधिकार है।
धमकी नहीं, जवाब चाहिए।
सांसद जी, पैसा कहाँ गया?
आपके नोटिस में ही लिखा है कि सांसद का आचरण संवैधानिक जवाबदेही के दायरे में है।
तो सवाल पूछने ��र नोटिस क्यों?
यह कोई आरोप नहीं था, सरकारी डेटा था, MPLADS पोर्टल की एंट्री थी।
सवाल को आरोप कहना, जवाब से बचना है।
प्रतिष्ठा का अधिकार है, लेकिन जनता के पैसे का हिसाब भी संविधान मांगता है।
हम नहीं डरेंगे।
@saltbylutyens
@khurpenchh
ऐसी कोई पार्टी नहीं ऐसा कोई नेता नहीं जिसका MPLADS �� खंगाला गया हो , सबने सुना कुछ ने सुधार किया लेकिन किसी ने लीगल नोटिस या डिफेमेशन नहीं भेजा ,
लेकिन हमेशा फ्रीडम ऑफ स्पीच की बातें करने वाली पार्टी DMK के दयानिधि मारन ने धमकी और कांग्रेस के पप्पू यादव ने एक कदम आगे जाकर लीगल और डिफेमेशन नोटिस भेजा है ।
आप स्वयं निर्णय लीजिए कि फ्रीडम ऑफ स्पीच को कौन दबा रहा ।
आदरणीय @narendramodi जी, बाबा सोमनाथ के दर्शन कर आपने जन-कल्याण की कामना की, इसके लिए आभार। बाबा से प्रार्थना है कि विज्ञापन 51 के पीड़ितों को भ�� न्याय मिले। 2022 से शुरू हुई भर्ती 2026 में रद्द होने से हम हताश हैं। कृपया हमारा कल्याण करें। 🙏
@AmitShah @dpradhanbjp @CMOfficeUP
@AmitShah Advt 51 Assistant Professor bharti mein dhandli ki jaanch ho, lekin bina notice ke exam radd karke 1.14 lakh chhatro ko pratarit na karein. Top Secret ki report dekhein aur nyay karein.
@myogiadityanath@upesscprayagraj @PrashantK_IPS @UPGovt
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